अल्‍मोड़ा, चन्‍द्रशेखर द्विवेदी : कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रदीप टम्टा एक बार फिर अल्मोड़ा संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वह 2009 में यहां से लोकसभा सदस्य चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह फिर चिर परिचित प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा से हार गए। क्षेत्र की समस्याओं को देखें तो उनके कार्यकाल की समस्याएं लगभग आज भी वही हैं जो तब थी। 2009 में अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र आरक्षित होने के बाद से कांग्रेस उन पर विश्वास कर रही है। प्रदीप टम्टा वर्तमान में राज्य सभा सांसद भी है। अक्सर लोकसभा चुनावों में स्थानीय मुद्दे गायब रहते है। इस बार भी यही दिखाई दे रहा हैं। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के अलावा चुनावी प्रचार में कुछ नयापन  नही दिख रहा है। प्रदीप टम्टा से उनके क्षेत्र की समस्याओं और उनके कार्यकाल में हुए काम को लेकर जनता ने कटघरे में खड़ा किया है। जनता के उन्हीं सवालों को हमने बेबाकी से पूछा भी।

सवाल : सांसद निधि के खर्च के आलोक में बताए की जनता की अपेक्षाओं में कितना खरे उतरे? 

जवाब : भाजपा के सांसद ने तो पिछले पांच साल में 25 करोड़ की निधि में से केवल 6 करोड़ ही खर्च किए हैं। मैं जब लोकसभा सदस्य था तो जन कार्यों में सारी निधि खर्च कर दी थी। आप ब्योरा निकाल सकते हैं।

सवाल : पार्टी के भीतर इस सीट पर टिकट के कई दावेदार रहे आपकी नजरों में मजबूती का आधार क्या रहा?

जवाब : सभी कार्यकर्ताओं को टिकट पाने का अधिकार है। हाईकमान जिस पर निर्णय लेता है। उसी को कार्यकर्ता मानता है। संगठन व कार्यकर्ताओं की आम राय ही मेरी ताकत बनी।

सवाल : मतदाता आपको क्यों चुने? आप पर क्षेत्र में कम सक्रियता के आरोप विपक्षी लगाते हैं?

जवाब : जल, जंगल, जमीन को लेकर सबसे पहले मैने लोकसभा में सवाल उठाया। ग्रीन बोनस की मांग की। राज्य सभा में इन सवालों पर सरकार की मंशा पर सवाल किए। लेकिन केंद्र सरकार ने उन सभी मुद्दों को हाशिए में डाल दिए तो हमने पूछे थे। हमेशा जनता के समस्याओं के समाधान को सक्रिय रहा।

सवाल : चुनाव जीतने के लिए आपको किसी अन्य या खुद के चेहरे पर कितना भरोसा?

जवाब: चुनाव जीतने के लिए किसी चेहरे की जरूरत नही होती। विपक्षी कुछ कर नही पाए तो वह मोदी के नाम का सहारा ले रहे हैं। जनता ही उनका चेहरा है। वह ही निर्णय करेंगे।

सवाल : संसद में क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए दो ठोस नीतिगत प्रयास बताएं। 

जवाब : टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल किया। लेकिन, इसके बाद आई भाजपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। ग्रीन बोनस को लेकर मनमोहन सिंह सरकार की सहमति। भाजपा सरकार आई तो कोई कार्रवाई नही हुई।

सवाल : पर्वतीय जिलों में खासतौर पर अल्मोड़ा जिले में सर्वाधिक पलायन की समस्या के समाधान को आपके प्रयास क्या रहे?

जवाब : जब हरीश रावत केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री थे तब हिमालयी राज्यों को एक कर नीति बनाने के लिए बैठक की। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने पहाड़ से पलायन रोकने के लिए काम किया। स्थानीय उत्पादों मडुवा, झुगरा, कोणी आदि को बाजार दिया। जिसका असर दिख रहा है। मैने भी सदन में सवाल उठाया। इन मुद्दे को लेकर हरीश रावत के साथ रहा।

सवाल : पर्वतीय क्षेत्रों में सामाजिक आॢथक विषमता दूर करने को ठोस रोडमैप सामने नही रख पाए।

जवाब : स्थानीय मुद्दों को मैने सबसे प्रमुखता से उठाया है। अगर हमारे जल, जंगल, जमीन के सवाल पर केंद्र सरकार गंभीरता से काम करें तो सारी सामाजिक-आॢथक विषमता की समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएगी।

सवाल : भाजपा के पास मोदी का चेहरा है। पिछले चुनाव में मोदी लहर में आप हार चुके हैं। इस बार भाजपा के आक्रमक प्रचार का जवाब क्या है?

जवाब : मोदी अब चेहरा नही रहे। जनता उनकी जुमलेबाजी को समझ चुके है। हमारा जवाब पहाड़ की मूलभूत समस्याओं के समाधान, स्वास्थ्य, शिक्षा के अधिकार। पहाड़ से पलायन रोकना। हर बेरोजगार को काम देना। कुछ मुद्दे घोषणा पत्र में साफ दिए गए है। इसमें गरीबों को 6 हजार प्रति माह देना आदि है। यह जुमले नही होंगे।

सवाल : आप हरदा के सिपहसालार के तौर पर या पार्टी के सिपाही के तौर पर मतदाताओं के बीच जा रहे है। जवाब : कांग्रेस के कार्यकर्ता के रुप में जनता के बीच जा रहा हूं। जो काम मैने किए है उनको लेकर जनता के बीच जा रहा हूं। हरीश रावत हमारे नेता है। और इसी संसदीय क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके है।

सवाल : चुनाव विधानसभा के हों या लोकसभा के, आपकों ही पार्टी आगे क्यों करती रही है? 

जवाब : यह तो कार्यकर्ताओं की समझ और हाइकमान का निर्णय हैं। उसी के बाद प्रत्याशी का अंतिम निर्णय होता है।

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Posted By: Skand Shukla

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