जोहार यात्रा से प्रदीप सिंह। Jharkhand Assembly Election 2019 - जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री रघुवर दास कई मोर्चे साध रहे हैं। एक ओर उनके निशाने पर विपक्षी दल हैं तो दूसरी तरफ वे अपने सहयोगी दल को भी राजनीतिक संदेश दे रहे हैं। सोमवार को बोकारो के चंदनकियारी से शुरू हुई उनकी यात्रा इस मायने में अहम रही। इस सीट पर भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी दावा कर रही है, जबकि यह सीट फिलहाल भाजपा के कब्जे में है। चंदनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी राज्य सरकार में मंत्री भी है।

यह दीगर है कि अमर कुमार बाउरी ने 2014 का विधानसभा चुनाव झारखंड विकास मोर्चा की टिकट पर लड़ा था और जीत हासिल करने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके साथ झारखंड विकास मोर्चा के पांंच अन्य विधायक भी भाजपा मेंं गए थे। इस विलय को झााारखंड विधानसभा से मान्यता मिल चुकी है। अमर कुमार बाउरी मुख्यमंत्री रघुवर दास के विश्वासपात्रों में से एक हैं। यही वजह है कि जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने चंदनकियारी में खासा वक्त दिया।

इससे इस सीट पर भाजपा की दावेदारी पर मुहर लगी है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां मौजूदगी दर्ज कराकर स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भाजपा सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे में अनावश्यक दबाव में नहीं आएगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसके अलावा आजसू की दावेदारी वाली एक अन्य सीट गोमिया में भी सक्रियता दिखाई। मुख्यमंत्री भाजपाइयों में उत्साह भरने में सफल रहे।

पिलाई अनुशासन की घुट्टी

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कार्यकर्ताओं को अनुशासन की घुट्टी भी पिलाई। बोकारो के रितुडीह में जनसभा के दौरान जब कार्यकर्ताओं के जत्थे ने एक खास नेता का नाम लेकर जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू किए तो उन्होंने भाषण रोक दिया। कार्यकर्ताओं को स्पष्ट कहा कि वे अपनी सरकार की योजनाओं के बारे में लोगों को बताने आए हैं, उनका आशीर्वाद लेने आए हैं और यहां टिकट का बंटवारा नहीं हो रहा है।

उनकी झिड़की का असर यह पड़ा कि बोकारो के विधायक बिरंची नारायण थोड़े असहज नजर आए। मंच से उतरे और कार्यकर्ताओं को चले जाने को कहा। बोकारो जिले में एक दिन सोमवार का पूरा वक्त मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दिया। सुबह उनके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग चंदनकियारी से सटे झरिया विधानसभा क्षेत्र में हुई। वहां सबसे पहले उन्होंने स्वागत में स्थानीय नेताओं को चुनाव संबंधित टिप्स दिए। उसके बाद उनका काफिला चंदनकियारी, बोकारो, बेरमो और गोमिया विधानसभा की ओर चल पड़ा।

क्षेत्र में मजदूरों की बहुलता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खुद को भी उनसे भावनात्मक तौर पर जोडऩे की कोशिश की। कहा कि वे खुद मजदूर रहे हैं और मजदूरों की पीड़ा समझते हैं। उन्होंने बोकारो इस्पात कारखाने से विस्थापित हुए लोगों के बेहतर पुनर्वास का भी भरोसा दिलाया। माराफारी को औद्योगिक शहर सरीखा विकसित करने का वायदा किया और यह भी कहा कि वह किसी को भी उजडऩे नहीं देंगे। विस्थापन से पहले बसाना उनकी नीति है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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