चंडीगढ़, जेएनएन/एएनआइ। Haryana Assembly Election result में किसी दल को स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं मिलने के बाद चंडीगढ से दिल्‍ली तक दौड शुरू हो गई। त्रिशंकु विधानसभा के चलते  जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। राज्य में सरकार बनाने की गणित में भाजपा आगे दिख रही है। सीएम मनोहरलाल ने राज्‍यपाल सत्‍यदेव नारायाण आर्य से मिलने का समय मांगा है। वह राज्‍य में नई सरकार बनाने का दावा किया। चर्चा है कि BJP को सात निर्दलीय विधायकों का साथ मिल मिल सकता है। राज्‍य में निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह व गोपाल कांडा के भाजपा नेताओं से दिल्‍ली में मुलाकात हुई है। गोपाल कांडा ने शुक्रवार को कहा कि वह भाजपा को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं। रणजीत सिंह ने देर रात भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की। करीब पांच और निर्दलीय विधायकों के भाजपा के संपर्क में होेने की बात कही जा रही है।

सीएम मनोहरलाल राज्‍यपाल से मिलकर करेंगे नई सरकार बनाने का दावा, मांगा समय

गाेपाल कांडा ने शुक्रवार काे कहा कि वह भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। यह समर्थन बिना शर्त है। उन्‍होंने कहा कि सभी सात निर्दलीय विधायक भी भाजपा काे समर्थन द‍े रहे हैं। सिरसा जिले के रानियां से निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप जीते रणजीत सिंह ने दिल्‍ली मेंं भाजपा नेताओं से मिले। इसके बाद हरियाणा भाजपा के प्रभारी डॉ. अनिल जैन के साथ भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की। इससे पहले भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कार्यकारी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा के बुलावे पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल दोपहर को दिल्ली पहुंचे। वहां  करीब दो घंटे की मंत्रणा के बाद मनोहर लाल ने नई सरकार बनाने का दावा किया। शाम को वह चंडीगढ़ वापस पहुंचे और राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य से मुलाकात का समय मांगा। समझा जाता है कि वह राज्‍यपाल से नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। अगर जोड़तोड़ पूरी हो गई तो उनके दीपावली से पहले 26 अक्टूबर को दायित्व ग्रहण करने की संभावना है।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा के लोगों को धन्‍यवाद दिया है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा है, मैं हरियाणा के लाेगों को हमें आशीर्वाद देने के लिए धन्‍यवाद देता हूं। हम राज्‍य की उन्‍नति के लिए पहले की तरह ही समर्पण और जज्‍बे से कार्य करेंगे। मैं भाजपा के कार्यकर्ताओं के कड़े परिश्रम और प्रयास के लिए भी सराहना करता हूं। कार्यकर्ताओं ने हमारे विकास के एजेंडा से लोगों तक पहुंचाया। केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने भी चुनाव परिणाम के लिए हरियाणा की जनता का आभार जताया और धन्‍यवाद दिया।

तेजी से चल घटनाक्रम में रानियां से निर्दलीय जीेते रणजीत सिंह दिल्‍ली रवाना हुए। उनके भाजपा को समर्थन देने की बात कही जा रही है। गोपाल कांडा भी दिल्‍ली गए हैं। गोपाल कांडा के भाई गोबिंद कांडा ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत करते कहा है कि वह भाजपा को समर्थन देंगे। गा‍ेबिंद कांडा ने कहा कि गोपाल कांडा तीन-चार निर्दलीय विधायकों के साथ दिल्‍ली गए हैं। दूसरी ओर, अन्‍य निर्दलीय विधायकों के भी भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा है। इन विधायकों की संख्‍या करीब पांच बताई जा रही है।

चुनाव में भाजपा के दो बागी प्रत्‍याशी भी जीते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस के नेता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा दिल्‍ली रवाना हुए हैं तो किंगमेकर की स्थिति में आए जेजेपी नेता दुष्‍यंत चौटाला भी दिल्‍ली पहुंच रहे हैं। इससे पहले मुख्‍यमंत्री मनाेहरलाल दिल्‍ली रवाना हुए थे। चर्चा है कि वहां वह केंद्रीय गृहमंत्री व भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह से मिले हैं। इन सबके बीच सीएम मनोहरलाल देर शाम राज्‍यपाल सत्‍यदेव नारायण आर्य से मिलेंगे। बताया जाता है कि वह सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं।

बताया जाता है कि बहुमत से दूर रही भाजपा और कांग्रेस की ओर से किंग मेकर की भूमिका में आई जननायक जनता पार्टी से संपर्क साधा जा गया है। सत्ता की कुर्सी में निर्दलीय विधायकों की अहमियत के चलते भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकार उन्हें अपने पाले में लाने की के लिए डोरे डालने में जुटे हैं।

इसी बीच, मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल के राज्‍यपाल सत्‍यदेव नारायण आर्य की आज शाम ही मिलने की चर्चा से सियासत गर्मा गई है। इसके बाद कांग्रेस और जेजेपी की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और जेजेपी नेता दुष्‍यंत चौटाला के दिल्‍ली पहुंचे हैं।

बृहस्पतिवार सुबह मतगणना शुरू होने के बाद जैसे ही शुरुआती रूझान सामने आए, अप्रत्याशित नतीजों की तस्वीर से भाजपा और कांग्रेस नेताओं की धड़कनें बढ़ गईं। दोपहर होते-होते पूरी तरह साफ हो चुका था कि प्रदेश में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनने नहीं जा रही। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल दिल्ली पहुंच गए और केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर मंथन किया। पार्टी के हरियाणा प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने चौटाला परिवार के नजदीकी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल से संपर्क साधते हुए जजपा और भाजपा में मध्यस्थता कराने का दबाव बनाया है।

वहीं, बतासा जाता है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को फ्री-हैंड दिया है। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनावों में हुड्डा ने कांग्रेस के 40 सीटों पर सिमटने के बावजूद न केवल हरियाणा जनहित कांग्रेस में सेंध लगाई, बल्कि  निर्दलीय विधायकों की मदद से पूरे पांच साल तक सरकार भी चलाई थी। यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश में अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को आगे करने में देर नहीं लगाई।

सोनिया गांधी ने हुड्डा से फोन पर बातचीत में साफ किया कि वह सरकार बनाने के लिए कोई भी फैसला अपने दम पर ले सकते हैं। सरकार नहीं बना पाने की स्थिति में दुष्यंत चौटाला को मुख्यमंत्री बनाना है या नहीं, इस पर भी हुड्डा से विचार करने को कहा गया है।

राजनीति के माहिर हुड्डा चल रहे सधी हुई चाल

कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के साथ रणनीति बनाते हुए हुड्डा पूरी तरह सधी चाल चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने गैर भाजपा दलों को एक मंच पर आने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी दलों को मिलकर सरकार बनानी चाहिए जिसमें हर किसी को पूरा सम्मान मिलेगा। कांग्रेस विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी ने दावा किया कि पार्टी जजपा की मदद से प्रदेश में सरकार बनाएगी।

जजपा के दुष्यंत चौटाला ने आज बुलाई बैठक

चुनावी नतीजों से उत्साहित जेजेपी ने अगली रणनीति बनाने के लिए शुक्रवार को  दिल्ली में नवनिर्वाचित विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। जेजेपी संरक्षक दुष्यंत चौटाला ने अपने पत्ते खोलने से इंकार करते हुए साफ किया कि जेजेपी के बगैर प्रदेश में कोई भी सरकार बनना संभव नहीं। ऐसे में सियासी पंडितों की नजरें जेजेपी की बैठक पर टिकी हैं, इसमें सरकार बनाने के लिए कांग्रेस या भाजपा में से किसी एक को चुनने का फैसला लिया जा सकता है।

बागियों ने बिगाड़ा भाजपा का गणित

टिकट वितरण से नाखुश होकर निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले छह भाजपाइयों ने भाजपा का गणित बिगाड़ दिया। निर्दलीय जीते सात विधायकों में छह भाजपा के हैं। अगर भाजपा के खाते से ही यह विधायक विधानसभा में पहुंचते तो पार्टी पूर्ण बहुमत का आंकड़ा छू सकती थी। इसी तरह नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) के खाते में पड़े 0.52 फीसद वोटों में से अगर आधे भी भाजपा को मिलते तो चुनाव परिणाम कुछ और होता।

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