नई दिल्ली।  Delhi Assembly Election 2020: विधानसभा चुनाव में कहने को तो मुख्य मुकाबला आप, भाजपा व कांग्रेस के बीच है, लेकिन प्रचार में कांग्रेस बुरी तरह पिछड़ रही है। कांग्रेस के प्रचार की कमान अकेले प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा संभाल रहे हैं। पार्टी स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर चुकी है, लेकिन ये कहीं नहीं नजर आ रहे। 

आखिर क्यों पार्टी के दिग्गज प्रचार में नहीं उतर रहे? क्यों पार्टी चुनावी मुकाबले में एक बार फिर पीछे हो रही है आदि प्रश्नों पर संजीव गुप्ता ने दिल्ली कांग्रेस की प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष कीर्ति आजाद से बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश :

चुनाव प्रचार में कांग्रेस क्यों पिछड़ती जा रही है?

कांग्रेस बिल्कुल भी नहीं पिछड़ रही है। पार्टी के प्रत्याशी घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं। विरोधी पार्टियां फर्जी काम पर वोट मांग रही हैं, जबकि सच यह है कि इनका काम कहीं नजर ही नहीं आता। सड़कें टूटी पड़ी हैं। आज भी दिल्ली के हर क्षेत्र में पीने का पानी नहीं पहुंच पाया है। जहां पहुंच रहा है, वहां भी गंदा पानी जा रहा है। संगम विहार में जल बोर्ड की पाइप लाइन से जनता की जरूरतें पूरी करने के बजाय निजी अस्पताल को पानी दिया जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने 15 साल में वाकई दिल्ली का विकास किया था। कांग्रेस के उम्मीदवार घर-घर जाकर दिल्ली वासियों को दिल्ली के उसी विकास की याद दिला रहे हैं।

आपके स्टार प्रचारक तो चुनाव मैदान में कहीं दिखाई दे रहे?

मैंने कहा न कि कांग्रेस अभी घर-घर जनसंपर्क कर रही है, हमें हवा-हवाई प्रचार की जरूरत ही नहीं है। केजरीवाल और अमित शाह घर-घर जाकर प्रचार करने की स्थिति में हैं ही नहीं। जाएंगे तो लोगों की शिकायतों और सवालों में घिर जाएंगे। इसीलिए वे रोड शो जैसा प्रपंच रच रहे हैं। हमारे स्टार प्रचारक दूसरे चरण के प्रचार में आएंगे। इसकी सारी रूपरेखा बना ली गई है। जल्द ही उनकी जनसभाओं का शेड्यूल भी सामने आ जाएगा।

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस आप के साथ मिलकर लड़ रही है। इसी वजह से कांग्रेस प्रचार में रुचि नहीं ले रही है?

परदे के पीछे से आप और भाजपा मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। हरियाणा में जिस जेजेपी ने आप के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, वही जेजेपी अब दिल्ली चुनाव में भाजपा की मदद कर रही है। वैसे भी यही दोनों पार्टियां हकीकत में एक-दूसरे की बी टीम हैं।

शाहीन बाग बड़ा चुनावी मुददा बन गया है? आपका इस पर क्या कहना है?

हिंदुस्तान की यह रवायत है कि यहां का हर व्यक्ति भारतीय है। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। हम सभी एक साथ रहे हैं और कांग्रेस के झंडे तले ही हमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। कांग्रेस का साफ तौर पर मानना है कि 1947 के बाद जो लोग भारत में रह गए हैं, वे सभी हंिदूुस्तानी हैं। उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

पार्टी के कमजोर पड़ने की वजह गुटबाजी तो नहीं?

मुझे तो कहीं कोई गुटबाजी नजर नहीं आ रही और न ही मैंने नेताओं में कोई खास मतभेद देखा है। जब कोई गुटबाजी है ही नहीं तो वह पार्टी की कमजोरी की वजह कैसे हो सकती है! वैसे भी कांग्रेस कमजोर नहीं है। चुनाव में हार-जीत तो लगी ही रहती है।

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Posted By: Mangal Yadav

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