रायपुर, राज्य ब्यूरो। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बाद अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) ने भी कांग्रेस से हाथ झटक दिया है। कांग्रेस हाइकमान ने गठबंधन के लिए जो ऑफर दिया, उसे गोंगपा सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम ने ठुकरा दिया। गोंगपा 11 सीटों की मांग कर रही थी, जबकि कांग्रेस घोषित तौर पर दो और अघोषित तौर पर तीन यानी कुल पांच सीट देने के लिए तैयार थी। इस कारण गोंगपा सुप्रीमो मरकाम ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से अंतिम दौर की वार्ता से पहले ही न कर दिया।

सम्माजनक सीट नहीं दे रही थी कांग्रेस- गोंगपा

कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उईके ने कांग्रेस छोड़ा तो कांग्रेस और गोंगपा के बीच गठबंधन की चर्चा तेज हो गई। इसका एकमात्र कारण यह था कि उईके दोनों राजनीतिक दलों के गठबंधन में रोड़ा बने हुए थे। उईके पाली-तानाखार सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और गोंगपा सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम की पहली प्राथमिकता में पाली-तानाखार सीट ही थी। उईके के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस हाइकमान ने मरकाम को दिल्ली बुलाया था। मरकाम रविवार को दिल्ली पहुंच गए। उन्हें कांग्रेस का ऑफर मिला कि गठबंधन के लिए पांच सीट ही मिल सकती है। उस पर मंथन करने के बाद राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। गोंगपा के महासचिव लाल बहादुर कोर्राम ने बताया कि मरकाम ने दिल्ली में ही दूसरे आदिवासी संगठनों से चर्चा की। उसके बाद यह तय किया कि कांग्रेस सम्मानजनक सीटें नहीं दे रही है। इस कारण राहुल से मिलने का औचित्य ही नहीं समझा।

14 सीटों पर तीसरे नम्बर पर गोंगपा

2013 के विधानसभा चुनाव में गोंगपा 14 सीट भरतपुर सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज, अंबिकापुर, पाली-तानाखार, मरवाही, कोटा, सक्ती, लैलुंगा, पंडरिया और डोंगरगढ़ में तीसरे नम्बर पर थी। लेकिन, इसमें से सात सीटें ही ऐसी हैं, जहां मतदान प्रतिशत ठीक ठाक था। पाली-तानाखार में 26.69, भरतपुर सोनहत में 15.82, बैकुंठपुर 15.52, भटगांव 5.18, कोटा 5.41 और सक्ती में 9.68 फीसद मतदान प्राप्त हुआ था।

Edited By: Ravindra Pratap Sing