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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Karuna Shukla: सर्वश्रेष्ठ विधायक का अवार्ड, रमन सिंह से बगावत... ऐसा रहा 'अटल' की भतीजी का सियासी सफर

By Jagran NewsEdited By: Achyut Kumar
Published: Tue, 29 Aug 2023 01:08 PM (IST)

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला छत्तीसगढ़ की राजधानी का चर्चित चेहरा थीं। उन्होंने बलौदाबाजार को एक ...और पढ़ें

CG Election 2023: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला का सियासी सफर
CG Election 2023: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला का सियासी सफर

HighLights

  1. करुणा शुक्ला ने 32 साल बीजेपी में रहने के बाद की थी बगावत
  2. कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में 2018 में सत्ता में वापसी करने में की मदद
  3. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी थीं करुणा शुक्ला

रायपुर, जागरण डिजिटल डेस्क। Chhattisgarh Assembly Election 2023: छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह राज्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला (Karuna Shukla) की कर्मभूमि रही है। करुणा यहीं से विधायक बनी थीं। हालांकि, अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। 26 जुलाई 2021 की देर रात उनका निधन हो गया।

करुणा शुक्ला ने भाजपा क्यों छोड़ा?

करुणा शुक्ला ने भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से लेकर कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। हालांकि, बाद में रमन सिंह से मतभेद होने के बाद करुणा ने पार्टी छोड़ दी थी। रमन सिंह मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

कांग्रेस को दिलाई सत्ता में वापसी

करुणा शुक्ला के द्वारा कार्यकर्ताओं को बूथ मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाने के बाद कांग्रेस ने 2018 में छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापसी की और भूपेश पटेल मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस की कोशिश इस बार सत्ता बरकरार रखने की है।

करुणा शुक्ला का जीवन परिचय

करुणा शुक्ला पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के बड़े भाई अवध बिहारी वाजपेयी की बेटी थीं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक अगस्त 1950 को हुआ था। उनकी पढ़ाई भोपाल में हुई। भोपाल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

पहली बार कब विधायक बनीं करुणा?

करुणा 1993 में पहली बार विधायक चुनी गईं। उन्होंने बलौदाबाजार विधानसभा सीट पर मनिहार साहू को हराकर जीत दर्ज की। वे 1998 तक विधायक रहीं। इस दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का अवार्ड भी मिला।

पहली बार सांसद कब बनीं?

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी को 1998 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गणेश शंकर बाजपेयी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने जांजगीर-चांपा सीट से चरणदास महंत (वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष) को हराकर जीत दर्ज की।

करुणा के पति का क्या नाम है?

करुणा के पति का नाम डॉ माधव प्रसाद शुक्ल है। उन्होंने लंबे समय तक शासकीय चिकित्सक के रूप में बलौदाबाजार और कसडोल में अपनी सेवाएं दीं।

करुणा शुक्ला ने विधायक के रूप में क्या काम किया?

करुणा शुक्ला ने विधायक रहने के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र बलौदाबाजार में राज्य परिवहन का डिपो बनवाया था। उनके कार्यकाल में कई नई सड़कें बनाई गईं। इतना ही नहीं, बलौदाबाजार में सिंचाई विभाग में मुख्य कार्यपालन यंत्री का अलग से कार्यालय भी खोला गया।

करुणा शुक्ला कब कांग्रेस में शामिल हुईं?

करुणा शुक्ला 1982 से भाजपा में थीं। हालांकि, उन्होंने 2014 में भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। करुणा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में राजनांदगांव सीट से रमन सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इससे पहले, करुणा 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी चरणदास महंत से हार गईं थीं। उस समय केवल करुणा ही एक मात्र भाजपा उम्मीदवार थीं, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बाकी, सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी।