राहुल गांधी ने एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए यह कहा कि लॉकडाउन से कोई नतीजा नहीं निकला, लेकिन लगता है कि उन्हेंं अपनी ही कही बात बहुत जल्द भूलने की आदत है। वह न केवल यह भूल गए कि कुछ समय पहले उन्होंने लॉकडाउन के बारे में क्या कहा था, बल्कि यह भी कि कांग्रेस शासित राज्य सरकारें लॉकडाउन बढ़ाने के मामले में किस तरह केंद्र सरकार के फैसले की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं समझ रही थीं? यह हैरानी की बात है कि वह लॉकडाउन को तब असफल करार दे रहे हैं जब देश-दुनिया के तमाम विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारत को इसका खासा लाभ मिला है।

यदि लॉकडाउन नहीं लागू किया जाता तो देश में अप्रैल माह में ही लाखों लोग कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके होते। यह अजीब है कि जब लॉकडाउन लागू किया गया तब तो कांग्रेस ने उसका समर्थन किया, लेकिन अब राहुल कह रहे हैं कि उसके चारों चरण फेल हो चुके हैं। वह सरकार से आगे की रणनीति भी जानना चाह रहे हैं। क्या यह बेहतर नहीं होता कि वह खुद इस बारे में सरकार को कुछ सुझाव देते?

राहुल कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन वह इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि लॉकडाउन ने केवल कोरोना के संक्रमण की रफ्तार को ही नहीं रोका, बल्कि लोगों को जागरूक करने के साथ ही सरकारों को महामारी से निपटने के लिए आवश्यक उपाय करने का अवसर भी उपलब्ध कराया। दुर्भाग्य से सभी राज्य सरकारें इस अवसर का लाभ नहीं उठा सकीं। ऐसे राज्यों में महाराष्ट्र की चर्चा सबसे अधिक इसलिए हो रही है, क्योंकि वहां कोरोना के मरीज तेजी से बढ़ते चले जा रहे हैं। चूंकि महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं इसलिए राज्य सरकार की रीति-नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार कांग्रेस के सहयोग-समर्थन से चल रही है, लेकिन राहुल यह कहकर उससे पल्ला झाड़ रहे हैं कि वहां वह निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं। आखिर इसका क्या मतलब? जो सरकार कांग्रेस की भागीदारी से चल रही और जिसमें कांग्रेसी नेता मंत्री भी हैं उससे राहुल इस तरह से दूरी कैसे बना सकते हैं? यह तो जिम्मेदारी से पीछे हटना हुआ। यदि महाराष्ट्र सरकार में कांग्रेस की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही तो फिर उसे समर्थन देते रहने का क्या मतलब? क्या कांग्रेस वहां की सरकार में केवल सत्ता सुख भोगने के लिए साझीदार है? क्या राहुल यह कहना चाह रहे हैं कि साझा सरकारों को समर्थन देने वाले हर तरह की जिम्मेदारी से मुक्त होते हैं?

Posted By: Bhupendra Singh

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