जागरण संपादकीय: कांग्रेस की संकीर्णता
ध्यान रहे इसके बावजूद मुस्लिम लीग अलगाववादी एजेंडे पर चलती रही और देश के विभाजन का कारण बनी। आखिर कांग्रेस आज भी मुस्लिम लीग की आपत्तियों को महत्व क्यों दे रही है?
HighLights
कर्नाटक सरकार ने वंदे मातरम् के केवल दो पद गाने का आदेश दिया।
यह फैसला राष्ट्रीय गीत का अनादर और विरोधाभासी बताया गया।
कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति और संकीर्णता का आरोप।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का यह आदेश विचित्र और विरोधाभासी ही है कि राजकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो ही पद गाए जाएंगे। यह आदेश इसलिए हैरान करता है, क्योंकि इसी में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल आदि की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह पद गाए जाएंगे। आखिर कर्नाटक सरकार अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूर्ण गायन से क्यों हिचक रही है?
लगता है ऐसा फैसला केवल इसलिए किया गया ताकि कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से गांधी परिवार को संतुष्ट किया जा सके और साथ ही कर्नाटक में किसी राजनीतिक नुकसान से भी बचा जा सके, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि दो नावों की सवारी कभी हितकारी नहीं होती। यह फैसला इसलिए गांधी परिवार के दबाव का नतीजा दिखता है, क्योंकि इसी 15 अगस्त को कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम् का पूर्ण गायन हुआ था।
वंदे मातरम् को अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग तरीके से गाने का फैसला राष्ट्रीय गीत का अनादर ही है। आखिर जब वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर एक कानून बना दिया गया है, तब फिर उसकी अवहेलना करने का क्या औचित्य? इससे बड़ी विंडबना और कोई नहीं कि संविधान की शपथ लेने वाली कोई सरकार ही संसद से पारित किसी कानून की अनदेखी करे। यदि सरकारें ही ऐसा करेंगी तो फिर इससे कानून की अवहेलना की प्रवृत्ति को बल ही मिलेगा।
कर्नाटक सरकार का फैसला उन तत्वों को बल प्रदान करने वाला है, जो किसी न किसी बहाने राष्ट्रीय प्रतीकों को सम्मान देने से इन्कार करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्रता संघर्ष का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस वोट बैंक की सस्ती राजनीति के चलते राष्ट्रीय गीत को पूर्ण सम्मान देने के लिए तैयार नहीं। कांग्रेस वंदे मातरम् के दो ही पद गाने पर इसलिए अड़ी है, क्योंकि देश विभाजन के लिए जिम्मेदार मुस्लिम लीग की आपत्ति के बाद 1937 में इस गीत के इतने ही पद गाने का फैसला किया गया था।
ध्यान रहे इसके बावजूद मुस्लिम लीग अलगाववादी एजेंडे पर चलती रही और देश के विभाजन का कारण बनी। आखिर कांग्रेस आज भी मुस्लिम लीग की आपत्तियों को महत्व क्यों दे रही है? कांग्रेस को इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस ने वंदे मातरम् का पूर्ण गायन करना पसंद किया। हैरानी यह रही कि कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई। ऐसा कर उसने अपनी संकुचित मानसिकता का ही परिचय दिया। वह यह देखने को भी तैयार नहीं कि नेशनल कांफ्रेंस ने उसे यह नसीहत देने में देर नहीं की थी कि राष्ट्रीय गीत का गायन किस तरह हो, इसे तय करने का अधिकार उसे नहीं है।











