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खटीमा की पैदाइश, बंगाल से पढ़ाई... आर्मीमैन की बेटी नेहा बोरा की दिलचस्प है थिएटर to सियासी शुरुआत

Published: Fri, 16 Oct 2026 07:17 PM (GMT+05:30)

दिल्ली में छात्र आंदोलनों में सक्रिय नेहा बोरा को हाल ही में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान हिरासत में ...और पढ़ें

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं नेहा बोरा। फोटो: आर्काइव

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं नेहा बोरा। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में हिरासत में ली गईं नेहा बोरा।

  2. AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष, JNU में पीएचडी शोधार्थी हैं।

  3. CAA, शिक्षा सुधारों और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सक्रिय।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में छात्र आंदोलनों और राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच एक नाम लगातार सुर्खियों में है 'नेहा बोरा'।

वो कभी प्रदर्शनकारियों के बीच पुलिस से बहस करते हुए, तो कभी अपने भाषणों के जरिए सरकार और संस्थानों पर सवाल उठाते हुए दिखाई देती हैं।

16 अक्टूबर को दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने के लिए जाते समय उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी हिरासत में लिया गया था।

लेकिन नेहा बोरा आखिर हैं कौन? उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है, थिएटर से उनका क्या संबंध है और वह छात्र राजनीति में कैसे आईं? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं।

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उत्तराखंड के खटीमा से दिल्ली तक का सफर

नेहा बोरा की उम्र 29 वर्ष है और उनका जन्म उत्तराखंड के खटीमा में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत थे, जिसके कारण बचपन में उन्हें अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ा।

उन्होंने दसवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई पश्चिम बंगाल में की। इसी दौरान साहित्य और राजनीतिक विचारों में उनकी रुचि विकसित हुई।

चारू मजूमदार, पाब्लो नेरुदा और अरुंधति रॉय जैसे लेखकों एवं विचारकों के प्रभाव का उल्लेख उनकी वैचारिक यात्रा के संदर्भ में किया जाता है।

उनकी शिक्षा का सफर आगे दिल्ली पहुंचा। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की।

इसके बाद डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से प्रदर्शन अध्ययन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। फिर JNU के कला एवं सौंदर्यशास्त्र विभाग में थिएटर और प्रदर्शन अध्ययन में पीएचडी के लिए दाखिला लिया। आज वह अकादमिक शोध के साथ-साथ छात्र राजनीति में भी सक्रिय हैं।

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थिएटर से शुरू हुआ सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव

नेहा बोरा की पहचान केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है। वह दिल्ली के नुक्कड़ नाटक समूह ‘संगवारी’ से भी जुड़ी रही हैं। रंगमंच उनके लिए सामाजिक मुद्दों को समझने और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का माध्यम रहा है।

उनकी राजनीतिक सक्रियता को समझने के लिए वर्ष 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों का भी उल्लेख जरूरी है।

इन प्रदर्शनों के दौरान देशभर में छात्रों और युवाओं ने नागरिकता, संविधान तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। इसी दौर में नेहा बोरा की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी और वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ीं।

AISA का संबंध भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से है। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वह इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

23 दिन की भूख हड़ताल से राष्ट्रीय पहचान

नेहा बोरा को व्यापक पहचान दिलाने वाले आंदोलनों में जंतर-मंतर पर हुई भूख हड़ताल प्रमुख है। उन्होंने छात्र नेताओं मनीष कुमार और आमीन अमितोज के साथ शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया।

इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई लोगों का समर्थन मिला। तीनों छात्र नेताओं ने 23 दिनों तक भूख हड़ताल जारी रखी। 20 जुलाई को सांसदों, कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक हस्तियों की अपील के बाद इसे समाप्त किया गया।

इस आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति, प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्रीकरण और छात्रों की समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए। इस प्रदर्शन ने नेहा बोरा को छात्र अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में एक प्रमुख चेहरा बना दिया।

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झारखंड में भी प्रदर्शन, फेंकी गई थी स्याही

नेहा बोरा की सक्रियता दिल्ली तक सीमित नहीं रही। वह झारखंड में भी छात्र आंदोलनों में शामिल हुईं। 7 अगस्त को राज्य विधानसभा के पास एक प्रदर्शन के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई थी।

उन्होंने इस तरह की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा था कि ऐसे हमलों से युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

उनके भाषणों और राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर विवाद भी हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणियों के संबंध में पुलिस शिकायतों की खबरें भी सामने आई हैं।

इस तरह उनकी राजनीतिक सक्रियता को समर्थन के साथ-साथ आलोचना का भी सामना करना पड़ा है।

SIR विवाद में क्यों उतरीं सड़कों पर?

नेहा बोरा की मौजूदा चर्चा का बड़ा कारण मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहा विरोध है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के पीछे मृत मतदाताओं, स्थान बदलने और अन्य कारणों का हवाला दिया गया है। इसलिए प्रदर्शनकारियों के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

इस मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों के दौरान नेहा बोरा कई बार पुलिस हिरासत में ली गईं। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया है और जंतर-मंतर जैसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

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16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च से पहले हिरासत

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को उनके झंडेवालान स्थित आवास से हिरासत में लिया गया, जबकि नेहा बोरा को मध्य दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया।

इस प्रदर्शन का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे सवालों से था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान अफरा-तफरी भी देखने को मिली।

इस घटना ने नेहा बोरा को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। उनके समर्थक उन्हें युवा पीढ़ी की मुखर आवाज मानते हैं, जबकि उनके राजनीतिक विचारों और विरोध के तरीकों को लेकर आलोचना भी होती रही है।

अकादमिक शोध और सक्रिय राजनीति, दोनों में पहचान

नेहा बोरा की यात्रा की खास बात यह है कि वह थिएटर और प्रदर्शन अध्ययन में शोध करने वाली छात्रा होने के साथ-साथ एक सक्रिय छात्र संगठन का नेतृत्व भी कर रही हैं।

समाजशास्त्र की पढ़ाई, रंगमंच से जुड़ाव और छात्र आंदोलनों में भागीदारी ने उनकी सार्वजनिक पहचान को आकार दिया है।

 

उनके राजनीतिक सफर में शिक्षा, छात्र अधिकार, परीक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक विरोध और वामपंथी छात्र राजनीति जैसे कई पहलू शामिल हैं।

कुल मिलाकर, नेहा बोरा आज छात्र राजनीति के उन चेहरों में शामिल हैं, जिनकी गतिविधियों पर देशभर में नजर रखी जा रही है।

थिएटर से शुरू हुआ उनका सार्वजनिक जुड़ाव अब राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों तक पहुंच चुका है। आने वाले समय में उनकी राजनीतिक सक्रियता किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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