सीमापुरी जैसे हादसे का खतरा, दिल्ली में नाले के किनारे बसे 40 साल पुराने 700 मकान बेहद जर्जर
पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर स्थित कृष्णा कॉलोनी में सीमापुरी जैसी इमारत ढहने का खतरा मंडरा रहा है, जहां 40 ...और पढ़ें
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HighLights
उत्तम नगर की 40 साल पुरानी कृष्णा कॉलोनी पर खतरा।
सीमापुरी हादसे के बाद जर्जर मकानों की सुरक्षा चिंता बढ़ी।
स्थानीय लोग पुनर्वास और स्थायी आवास की मांग कर रहे हैं।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली के सीमापुरी में 30 साल पुरानी अवैध बहुमंजिला इमारत ढहने से दो बच्चों और एक गर्भवती की मौत की घटना ने दिल्ली की अनधिकृत बस्तियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
उत्तम नगर के हस्तसाल स्थित करीब 40 साल पुरानी कालोनी में भी ऐसी ही अनहोनी का खतरा मंडरा रहा है। करीब डेढ़ से दो किलोमीटर तक पंखारोड नाले के मुहाने पर बसी इस बस्ती में करीब 700 झुग्गी और पक्के मकान हैं।
जानकारी के अनुसार, कई मकान बिना पिलर के बेहद छोटे भूखंडों पर दो से तीन मंजिल तक बनाए गए हैं। नाले के लगातार कटाव से इनके कमजोर होने का खतरा बना हुआ है।
लोहे की सीढ़ियां लगाई गईं
कभी सरकारी जमीन पर झुग्गियों के रूप में बसी इस बस्ती को कुछ समय टी-कैंप कृष्णा कॉलोनी के नाम दिया गया है। घनी आबादी के कारण कई मकानों में आने-जाने के लिए मुख्य मार्ग की तरफ से लोहे की सीढ़ियां लगाई गई हैं, जबकि पीछे दो से तीन फुट चौड़ी गलियां का ही रास्ता है।

वहीं, मुख्य मार्ग पर लोगों ने मीट, वाहन मरम्मत और परचून समेत कई दुकानें भी खोल रखी हैं। कॉलोनी के कई मकानों में शौचालय की सुविधा नहीं है।
पेयजल की आपूर्ति टैंकरों से
लोगों को डूसिब और एमसीडी के सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करना पड़ता है। कुछ पुराने शौचालयों पर ताले लगे हैं। पेयजल की आपूर्ति टैंकरों से होती है, जबकि कई घरों में बिजली के मीटर लगे हैं और बीएसईएस की ओर से नियमित बिजली बिल भेजे जाते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाले के किनारे सुरक्षा दीवार नहीं होने से बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। वहीं, मकानों के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की बिजली की तारें भी चिंता का कारण हैं।
लोगों का कहना है कि तारें कई स्थानों पर इतनी नीचे हैं कि अनहोनी की आशंका बनी रहती है। सीमापुरी की घटना के बाद कालोनी के लोग अब पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
स्थायी समाधान नहीं हुआ
स्थानीय लोगों का कहना है कि वह कई दशक से यहां रह रहे हैं। उनका दावा है कि जमीन डूसिब की है और उन्हें मतदान का अधिकार भी प्राप्त है। लोगों ने कहा कि कई सरकारों ने पुनर्वास और मकान देने का भरोसा दिया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।
नाले के किनारे रहने से हर समय डर लगा रहता है। सरकार सर्वे कराकर जर्जर मकानों को सुरक्षित करे और हमें स्थायी मकान उपलब्ध कराए। - शकुंतला देवी, स्थानीय निवासी
यहां रास्ते बहुत संकरे और मकान बेहद छोटे हैं। नाले का कटाव और नीचे लटकती बिजली तारें बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती हैं। - कविता, निवासीयह भी पढ़ें- सीमापुरी भवन ढहने से गर्भवती की मौत, मलबे से लगाई थी बचाने की गुहार
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