'दूध निकाला और सड़क पर छोड़ दिया', दिल्ली की सड़कों पर बेसहारा घूम रहीं गायें; हादसों के साए में राहगीर
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में सड़कों पर आवारा पशुओं की समस्या बढ़ गई है। इसकी वजह से यातायात समस्या तो ...और पढ़ें
-1793099511224_m.webp)
दिल्ली में बीच सड़क पर बैठी गाय, जागरण आर्काइव।
HighLights
पश्चिमी दिल्ली में आवारा पशुओं से यातायात और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
दूध निकालने के बाद पशुपालक गायों को सड़कों पर छोड़ देते हैं।
अवैध डेयरियां और लापरवाही से सड़क सुरक्षा पर खतरा।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। याद है, जब प्रदेश की मुख्यमंत्री के काफिले के सामने अचानक गायों का झुंड आ गया था और सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए थे। उस घटना के बाद बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी हालात वही है।
सड़क पर रफ्तार भरते वाहन और बीच में बेखौफ घूमते पशु वाहन चालकों व राहगीरों के लिए खतरा हैं। लेकिन इसके लिए ये पशु नहीं बल्कि वे पशुपालक दोषी हैं, जो इनसे केवल दूध निकालने भर का मतलब रखते हैं।
पशुपालकों की बढ़ रही लापरवाही
अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे, चौड़ी सड़कों और आधुनिक रिहायशी सोसायटियों से सजी द्वारका उपनगरी इन दिनों इसी अजीब किस्म की त्रासदी से जूझ रही है। यहां की हरियाली और ट्रैफिक की रफ्तार पर स्वार्थी पशुपालकों का अनधिकृत कब्जा हो चुका है।
वहीं, बगल के घनी आबादी वाले उत्तम नगर में हालात और भी भयावह हैं, जहां अवैध डेरियों का कचरा और मवेशी पूरी व्यवस्था को धता बता रहे हैं।
सड़क और पार्कों में लगे पौधों पर भी खतरा
द्वारका में समस्या केवल ट्रैफिक जाम तक सीमित नहीं है। पशुपालक दूध निकालने के बाद अपनी गायों और मवेशियों को खुले में चरने के लिए छोड़ देते हैं। ये पशु बिना चारदीवारी वाले पार्कों और सड़क किनारे लगे खूबसूरत पौधों को मिनटों में चट कर जाते हैं।
विडंबना यह है कि स्थानीय निवासियों के कर से जिस हरियाली को सींचा जाता है, उसे कुछ लोगों का निजी स्वार्थ बलि चढ़ा रहा है।
हादसों का कारण बन रहे पशु
सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक आ जाने वाली इन भारी-भरकम गायों से टकराकर आए दिन दोपहिया वाहन चालक अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सीएम के काफिले वाली घटना के बाद भी प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
अवैध डेरियों से बढ़ रही समस्या
द्वारका से चंद दूरी पर बसे उत्तम नगर की कहानी थोड़ी अलग लेकिन उतनी ही दर्दनाक है। यहां आवासीय गलियों के भीतर धड़ल्ले से चल रही अवैध डेरियों के मालिक अपनी जवाबदेही से पूरी तरह मुंह मोड़ चुके हैं। सुबह-शाम दूध निकालते ही गायों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है।
प्लास्टिक की थैलियां खा रहे मवेशी
ये बेजुबान पशु सड़कों के किनारे लगे कूड़े के ढेरों पर मुंह मारने को मजबूर हैं। प्लास्टिक की थैलियां खाने से जहां मवेशियों की जान पर बन आई है, वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा फैलाई गंदगी से इलाकों में बीमारियां फैलने का डर बन गया है। तंग गलियों में जमा मवेशियों के कारण घंटों गाड़ियां रेंगती हैं और पैदल चलने वालों के लिए सड़क पर कदम रखना भी किसी जंग जीतने जैसा हो जाता है।
कागजी कार्रवाई या ठोस एक्शन
लोगों का कहना है कि जब तक खुले में मवेशी और गायें छोड़ने वाले पशुपालकों पर भारी वित्तीय जुर्माना नहीं लगाया जाएगा और अवैध डेरियों को शहर से बाहर सील करके स्थानांतरित नहीं किया जाएगा, तब तक दिल्ली की इन सड़कों को सुरक्षित और साफ़-सुथरा कहना बेमानी है।
यह समस्या पूरी दिल्ली की समस्या है। इस समस्या का निराकरण हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल जहां समस्या गंभीर है, वहां पशु चिकित्सा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।हरीश ओबेराय, चेयरमैन, पश्चिमी जोन, दिल्ली नगर निगम
