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भारत बनेगा एशिया का सेमीकंडक्टर हब! पांच साल में वैश्विक चिप सप्लाई चेन में मजबूत होगी पकड़

Published: Sun, 20 Sep 2026 11:58 PM (IST)

सेमीकान इंडिया 2026 ने भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। विशेषज्ञों ...और पढ़ें

यशोभूमि में तीन दिवसीय सेमीकान इंडिया के दौरान दुनिया के कई देशों से जुटे प्रतिनिधियों से एक दूसरे के सामने पेश की अपनी तकनीक व उत्पाद। जागरण

यशोभूमि में तीन दिवसीय सेमीकान इंडिया के दौरान दुनिया के कई देशों से जुटे प्रतिनिधियों से एक दूसरे के सामने पेश की अपनी तकनीक व उत्पाद। जागरण

HighLights

  1. भारत चिप डिजाइनिंग में विश्व का 20% कार्यबल रखता है।

  2. फैब्रिकेशन और असेंबली में नए प्लांट्स का निर्माण अंतिम चरण में।

  3. अगले 5 वर्षों में भारत बनेगा एशिया का प्रमुख सेमीकंडक्टर हब।

गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका स्थित यशोभूमि में संपन्न हुए सेमीकान इंडिया 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक तकनीकी और औद्योगिक मानचित्र पर भारत अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।

तीन दिवसीय सम्मेलन में जापान, जर्मनी, ताइवान और चेक गणराज्य जैसे दिग्गजों के स्टालों पर हुई चर्चाओं का सार यही रहा कि भले ही भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसकी गति और नीतिगत दिशा अभूतपूर्व है।

ताइवान, चीन, वियतनाम, मलेशिया, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी स्थापित ताकतों से मुकाबले के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि यही रफ्तार बनी रही तो अगले पांच वर्षों में भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की मुख्यधारा में अपनी जगह पक्की कर लेगा।

हम अभी कहां हैं

वर्तमान में, भारत चिप डिजाइनिंग में पहले से ही मजबूत है और दुनिया का 20 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर डिजाइन कार्यबल भारत के पास है। लगभग हर प्रमुख फैबलेस कंपनी का डिजाइन सेंटर यहां सक्रिय है।

अब भारत डिजाइनिंग से आगे बढ़कर फैब्रिकेशन और असेंबली/पैकेजिंग में उतर चुका है। गुजरात के धोलेरा व सानंद, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में प्लांट्स का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

जापानी प्रतिनिधिमंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत में चिप डिजाइन का अनुभव विश्वस्तरीय है। फैब्रिकेशन और असेंबली में प्रवेश करते समय असली चुनौती शुद्धता और सटीकता बनाए रखने की होगी।

हमने आवश्यक उपकरणों और अति-शुद्ध तकनीकों में सहयोग बढ़ाया है। यदि यह गति बनी रही, तो अगले पांच वर्षों में भारत एशिया का प्रमुख सेमीकंडक्टर हब बन जाएगा।

दुनिया को भारत की जरूरत क्यों है

ताइवान जलडमरूमध्य में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला संकट ने यह सबक दिया है कि उत्पादन को एक ही स्थान पर केंद्रित रखना जोखिम भरा है। इसलिए, दुनिया एक सुरक्षित व भरोसेमंद साझेदार की तलाश में है। भारत अपनी स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था, विशाल घरेलू इलेक्ट्रानिक्स बाजार और युवा कार्यबल के कारण सबसे मुफीद विकल्प है।

चेक गणराज्य के प्रतिनिधि ने बताया कि सेमीकंडक्टर केवल एक प्लांट लगाने का नाम नहीं, बल्कि एक जटिल इकोसिस्टम है। यूरोप भारत को रसायनों, विशेष उपकरणों और लाजिस्टिक्स के लिए एक दीर्घकालिक भागीदार के रूप में देख रहा है। भारत का युवा कार्यबल और पारदर्शी नीतियां हमारी सबसे बड़ी उम्मीद हैं।

इकोसिस्टम का कायाकल्प, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और रोजगार

सेमीकंडक्टर उद्योग अपने साथ एक विशाल आर्थिक इकोसिस्टम विकसित करता है। फैब प्लांट्स के आसपास अत्याधुनिक औद्योगिक कारिडोर, अनुसंधान केंद्र और हाई-टेक टाउनशिप बनने से रियल एस्टेट में दीर्घकालिक उछाल आ रहा है।

अति-संवेदनशील रसायनों, गैसों और सिलिकान वेफर्स के सुरक्षित परिवहन के लिए ''कोल्ड-चेन लाजिस्टिक्स'' का नया बाजार तैयार हो रहा है, जिससे लाखों उच्च-वेतन वाले प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो रहे हैं।

पर्यावरण, पानी और बिजली की चुनौती

चिप विनिर्माण की प्रक्रिया जितनी सूक्ष्म है, संसाधनों की खपत उतनी ही विशाल। एक फैब को रोजाना लाखों गैलन पानी चाहिए। कई लीटर पानी को फिल्टर करके एक लीटर अति-शुद्ध पानी बनता है।

क्लीनरूम के लिए निर्बाध बिजली और हवा का बहु-स्तरीय फिल्टरेशन जरूरी है, क्योंकि एक माइक्रोसेकंड का पावर-कट भी करोड़ों के सिलिकान वेफर बर्बाद कर देता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, ई-वेस्ट रूल्स और हजार्डस वेस्ट रूल्स का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया है।

पुणे की एक सेमीकंडक्टर कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि शुरुआत में पानी, बिजली और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर आशंकाएं थीं। लेकिन सरकारी नियमों ने हमें पहले दिन से ग्रीन टेक और 80 प्रतिशत वाटर-रीसाइक्लिंग का स्पष्ट रोडमैप दिया।

नए पार्कों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज और सोलर ग्रिड अनिवार्य हैं। हम केवल चिप्स नहीं बना रहे, बल्कि एक जिम्मेदार उद्योग तैयार कर रहे हैं।

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