ईंट भट्ठों में पराली जलाने को लेकर CAQM ने जारी किया ये आदेश, पढ़ें पूरा अपडेट
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया है कि वे ईंट भट्टों में ईंधन के रूप में पराली का उपयोग अनिवार्य करें। यह कदम दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है। आयोग ने 2025 से 2028 तक ईंट भट्टों में पराली के उपयोग का प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिससे प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।

फाइल फोटो
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। हर वर्ष सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर का दम घोटने वाली पराली अब पंजाब और हरियाणा के ईंट भट्टों में जलेगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ईंट-भट्ठों में ईंधन के तौर पर पराली जलाने को अनिवार्य किया जाए।
आयोग ने दोनों राज्यों से इसे लेकर मासिक रिपोर्ट भी जारी करने को कहा है। गौरतलब है कि सर्दियों शुरू होते ही दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता बिगड़ने लगती है। स्थानीय प्रदूषक तत्व तो इसमें अहम भूमिका निभाते ही हैं, पराली का धुंआ भी बड़े स्तर पर समस्या का सबब बनता है।
खासतौर पर 15 अक्टूबर से 25 नवंबर तक पराली के धुएं का असर सबसे ज्यादा रहता है। इस दौरान प्रदूषण के प्रमुख स्रोत के तौर पर भी पराली के धुएं की ही हिस्सेदारी रहती है। कुछ दिन तो ऐसे भी आ जाते हैं जब पराली के धुएं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो जाती है।
इसी के मद्देनजर पराली जलाने की प्रवृत्ति रोकने के लिए सरकारी स्तर पर तमाम उपाय किए जाते रहे हैं। हाल के सालों में इसका असर भी देखने को मिला है और पहले की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। हालांकि अभी भी इसमें बहुत सुधार की आवश्यकता है।
इसी क्रम में अब सीएक्यूएम ने पराली से बने उत्पादों को ईंधन के तौर पर ईंट भट्ठों में जलाने के निर्देश दिए हैं। सीएक्यूएम ने कहा है कि पंजाब और एनसीआर जिलों को छोड़कर बाकी हरियाणा में स्थित ईंट भट्ठों में ईंधन के तौर पर पराली का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
इस साल यानी नवंबर 2025 तक ईंट भट्ठों पर इस्तेमाल होने वाले कुल ईंधन का 20 प्रतिशत पराली व इसके उत्पाद होना चाहिए। नवंबर 2026 तक 30 प्रतिशत, 2027 के नवंबर तक 40 और 2028 के नवंबर तक यह 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
सीएक्यूएम ने पंजाब व हरियाणा सरकार को ईंट भट्ठों के लिए पराली को ईंधन के रूप में इस्तेमाल अनिवार्य बनाने वाले निर्देश भी जारी करने को कहा है। माना जा रहा है कि यदि 50 प्रतिशत पराली ईंट भट्ठों में जलने लगेगी तो पराली के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण में निश्चित तौर पर कमी आएगी।
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