LPG संकट के बीच क्या PNG उपभोक्ताओं को भी करनी चाहिए चिंता? पढ़ें इनसाइड रिपोर्ट
ईरान-इजरायल-अमेरिकी जंग के कारण भारत में एलपीजी संकट गहरा गया है, जिससे घरेलू और वाणिज्यिक गैस की किल्लत बढ़ गई ...और पढ़ें

LPG संकट के बीच पीएनजी उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स )
HighLights
एलपीजी संकट से घरेलू और वाणिज्यिक गैस की किल्लत।
पीएनजी कनेक्शन की मांग में तेजी से वृद्धि हुई।
घरेलू पीएनजी आपूर्ति निर्बाध रहेगी, विशेषज्ञ का आश्वासन।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान-इजरायल और अमेरिकी जंग ने भारत में लोगों के सामने कई मुसीबतें खड़ी कर दी है। देश भर में घरेलू और कमर्शियल गैस की किल्लत ने आम जनजीवन के साथ-साथ औद्योगिक रफ्तार पर जबरदस्त ब्रेक लगा दी है।
एलपीजी संकट मिड मार्च में शुरू हुआ। मार्च बीता और अप्रैल आ गया, लेकिन लोग अभी भी सुबह से शाम तक सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लग रहे हैं। कमर्शियल गैस की किल्लत से खाने-पीने के सामान महंगे हो गए। कुछ रेस्तरओं के मेन्यू बदल गए तो कुछ बंद हो गए। स्ट्रीट फूड के ऑप्शन भी बेहद कम हो गए हैं।
एलपीजी किल्लत के बीच पीएनजी गैस कनेक्शन लेने वालों के रिकॉर्ड आवेदन आ रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि एलपीजी के टैंकरों को होमोर्स के रास्ते देश में पहुंचने में परेशानी आ रही है तो क्या रसोई में पीएनजी का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता की बात है; क्या रसोई गैस की मारा-मारी के बीच देश में लगातार बढ़ता पीएनजी नेटवर्क निश्चिंत होकर बैठ सकता है? इसकी मांग कहां-कहां से है और इसके स्टोरेज की क्या व्यवस्था है? आइए इन सवालों के जवाब ढूढ़ते हैं...
पीएनजी क्या है?
आसान भाषा में समझिए- पीएनजी यानी वो गैस जो पाइप लाइन के जरिये सीधे घरों, होटलों और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाई जाती है।
PNG कैसे बनती है?
- प्राकृतिक गैस भूमिगत गैस भंडारों या तेल-गैस क्षेत्रों से निकाली जाती है।
- फिर इसे प्रोसेसिंग प्लांट में साफ (processing) किया जाता है ताकि पानी, सल्फर या अन्य अशुद्धियां हटाई जा सकें।
- इसके बाद गैस को राष्ट्रीय गैस पाइपलाइन नेटवर्क में भेज दिया जाता है।
- शहरों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (City Gas Distribution-CGD) नेटवर्क के जरिए यह गैस घरों और उद्योगों तक पहुंचती है।
पीएनजी की मांग कहां है?
पीएनजी की सबसे ज्यादा मांग उर्वरक संयंत्रों, उद्योगों और गैस से चलने वाले बिजली संयंत्रों से आती है।
फिर शहरी गैस नेटवर्क जहां से पाइप के जरिये गैस घरों तक पहुंचती है।
गाड़ियों में भरने के लिए सीएनजी के तौर पर आपूर्ति होती है।
क्या पीएनजी और सीएनजी एक ही गैस है?
हां, सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) दोनों प्राकृतिक गैस हैं। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि पीएनजी पाइपलाइन से घरों तक पहुंचती है और सीएनजी को कंप्रेस कर वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
हर दिन कितने पीएनजी कनेक्शन हो रहे?
एलपीजी किल्लत के बीच शहरों में रसोई घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी की डिमांड तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार लोगों को सिलिंडर आने वाली गैस की जगह पाइप से आने वाली गैस को इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
नतीजतन भारत में मौजूदा वक्त में 1.7 करोड़ से ज्यादा पीएनजी कनेक्शन हैं और ये आंकड़ा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी ओर भारत में सीएनजी गाड़ियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इतना ही नहीं, सीएनजी भारत में अब पेट्रोल के बाद दूसरा ऑटो फ्यूल बन गया है।

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) में पीएनजी मार्केटिंग व कॉरपोरेट कम्युनिकेशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अमनदीप सिंह बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में मार्च में 65,000 से ज्यादा घरेलू पीएनजी रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि फरवरी में यह संख्या 25,000 थी। यानी कि फरवरी की तुलना में 160 प्रतिशत ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए। दिल्ली-एनसीआर में जहां पहले 600–700 कनेक्शन प्रतिदिन होते थे, वहीं अप्रैल में यह संख्या बढ़कर 2000 तक पहुंच गई।
क्या PNG उपभोक्ताओं को चिंता होनी चाहिए?
अमनदीप सिंह का कहना है कि घरेलू पीएनजी सप्लाई उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह बिना किसी बाधा के जारी रहेगी। इसलिए PNG उपभोक्ताओं को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
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