महिलाओं को अधिकार व कानूनी प्रक्रिया की दी जानकारी
पालम वुमेन एसोसिएशन की तरफ से पालम में बुधवार को महिलाओं को कानूनी प्रक्रिया से अवगत किया गया। साथ ही उन्हें उनके अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया गया। इस अवसर पर संस्था की साउथ-वेस्ट दिल्ली वुमेन एसोसिएशन की अध्यक्ष जानकी राजा राम, पालम थाने के एसएचओ जो¨गदर जून व इंस्पेक्टर मीना यादव बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। कार्यक्रम में क्षेत्र की काफी महिलाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया और अपनी परेशानियों को साझा किया। इस दौरान लघु नाटिका व तस्वीरों के माध्यम से उदाहरण के साथ महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली : पालम वूमेन एसोसिएशन की तरफ से पालम में बुधवार को महिलाओं को कानूनी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। साथ ही उन्हें उनके अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया गया। इस अवसर पर संस्था की साउथ-वेस्ट दिल्ली वूमेन एसोसिएशन की अध्यक्ष जानकी राजा राम, पालम थाने के एसएचओ जो¨गदर जून व इंस्पेक्टर मीना यादव बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया और अपनी परेशानियों को साझा किया। इस दौरान लघु नाटिका व तस्वीरों के माध्यम से उदाहरण के साथ महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान स्पीकर शुभ्रा मेहंदीरत्ता ने महिलाओं को बताया कि किसी भी दुष्कर्म मामले में लड़की के माता-पिता को चाहिए कि वे किसी से बातचीत किए बगैर थाने जाएं। पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म पीड़िता के लिए अलग से वन स्टेप सेंटर बना हुआ है, जहां महिला पुलिसकर्मी व काउंसलर ही उपस्थित रहते हैं, जो पीड़िता से मामले की जानकारी लेते हैं। हालांकि अभी अधिकतर थाने में वन स्टेप सेंटर की सुविधा शुरू नहीं हुई है, लेकिन वहां भी इस सुविधा को जल्द शुरू किया जाएगा। शुभ्रा ने बताया कि पीड़िता को कभी हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि जब हम अपने कदमों को पीछे खींचते हैं तो आरोपितों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। विशेषकर, 164 के बयान के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष संकोच कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि वहां दिया गया बयान ही केस को मजबूत बनाता है। इसके अलावा पीड़िता से एक ही तरह का सवाल पूछने से हमें बचना चाहिए।
वहीं संस्था की जिला अध्यक्ष मैकडेलिन मैरिन ने प्रॉपर्टी व पारिवारिक विवादों के तहत महिला को उठाए जाने वाले कदम व उनके अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पति के मरने के बाद उसकी संपत्ति पर पत्नी का अधिकार होता है और कोई भी संतान जबरन उस संपत्ति को हासिल नहीं कर सकता है। यदि वह ऐसा प्रयास करता है तो उसे संपत्ति से बेदखल करने का मां का पूरा अधिकार है। कोई भी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए दिल्ली लीगल सर्विस में संपर्क करना चाहिए। वहां से सरकारी वकील की सुविधा उपलब्ध होती है। ऐसे में खर्चे की ¨चता भी नहीं रहती है। इस अवसर पर डॉ. सुनीता, अंकिता, सुशीला, सपना व वंदना समेत कई महिलाएं उपस्थित थीं।
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