Delhi Sainik Schools: दिल्ली में खुल सकते हैं नए सैनिक स्कूल, शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को भेजा निर्देश
केंद्र सरकार ने देशभर में 100 नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय सेवा भावना को बढ़ावा देना है। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों से आवेदन मांगे हैं। ये स्कूल पीपीपी मॉडल पर आधारित होंगे और छठी कक्षा से शुरू होकर छात्रों को अनुशासित नागरिक बनाने तथा रक्षा सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व के लिए तैयार करेंगे। दिल्ली में अभी तक केंद्र सरकार का कोई सैनिक स्कूल नहीं है, इसलिए नए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं ताकि छात्रों को बेहतर करियर के अवसर मिल सकें।

फाइल फोटो
रीतिका मिश्रा, जागरण, नई दिल्ली। राजधानी में जल्द ही नए सैनिक स्कूल खोले जा सकते हैं। दरअसल, केंद्र सरकार ने देशभर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय सेवा भावना को बढ़ावा देने के लिए 100 नए सैनिक स्कूल खोलने की योजना शुरू की है।
इसी को लेकर शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों से सैनिक स्कूल खोलने के लिए आवेदन करने को कहा है। ये स्कूल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित होंगे, जिसमें राज्य सरकार, स्वयं सहायता समूह (एनजीओ) या निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय के अधिकारी के मुताबिक ये सैनिक स्कूल छठवीं से शुरू किए जाएंगे, जो कि विद्यार्थियों को अनुशासित नागरिक और रक्षा सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व के लिए तैयार करेंगे। स्कूलों में भारतीय संस्कृति और देशभक्ति से प्रेरित वैकल्पिक पाठ्यक्रम भी होगा।
इच्छुक एनजीओ, निजी स्कूल और राज्य सरकारें https://sainikschoolsociety.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। दिल्ली में अभी तक केंद्र सरकार की ओर से एक भी सैनिक स्कूल नहीं है। हालांकि, वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी ने झरौदां कलां में एक आर्म्ड फोर्स प्रिपरेटरी स्कूल जरूर स्थापित किया था। लेकिन इसमें नौवीं और 11वीं में ही दाखिला होता है।
अब तक देशभर में 86 नए सैनिक स्कूलों को मंजूरी दी जा चुकी है, लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं, जिनमें न तो आवेदन आए और न ही किसी संस्थान को उपयुक्त पाया गया। इनमें दिल्ली का नाम भी शामिल है। इसी के तहत केंद्र सरकार ने दिल्ली समेत अन्य राज्यों से नए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
इन स्कूलों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और उन्हें सशस्त्र बलों में शामिल होने सहित बेहतर करियर के अवसर देना है। निदेशालय के एक अधिकारी के मुताबिक इन स्कूलों के कैडेट विकसित भारत के ब्रांड एंबेसडर होंगे।
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