यमुना का जलस्तर बढ़ने पर दिल्ली में अब 24 घंटे निगरानी, हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ने से बाढ़ की आशंका
हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। खतरे को देखते हुए सरकार अलर्ट है। पुराने लोहा पुल के पास जलस्तर 203 मीटर से अधिक दर्ज किया गया। हथिनी कुंड से पानी छोड़े जाने से और वृद्धि की आशंका है। बाढ़ नियंत्रण केंद्र और वायरलेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। निचले इलाकों से लोगों को हटाने की तैयारी है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्लीः हिमाचल प्रदेश में हो रही वर्षा से दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह तक पुराना लोहापुल के पास जलस्तर 203 मीटर से अधिक था।
उसके बाद कुछ कमी आई है, लेकिन इसमें वृद्धि की संभावना बनी हुुई है क्योंकि हरियाणा स्थित हथनी कुंड से 23000 क्यूसेक तक पानी छोड़ा जा रहा है। दिल्ली सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पूरी कर ली है।
बनाए गए 15 वायरलेस स्टेशन
शास्त्री नगर में 24 घंटे काम करने वाला केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण केंद्र के साथ ही 15 वायरलेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इससे यमुना का जलस्तर और जलजमाव वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जाएगी।
लोहापुल पर जलस्तर 204.5 मीटर पहुंचने या हथनी कुंड से एक लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर चेतावनी जारी की जाती है। फिर यमुना के निचले हिस्से से लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जाता है।
दिल्ली के कई क्षेत्रों में थी बाढ़ की स्थिति
205.33 मीटर का स्तर खतरे का निशान है। जुलाई, 2023 में यमुना का जलस्तर 208.6 मीटर तक पहुंच गई थी। उस समय आईटीओ बैराज के पांच गेट नहीं खुलने से यमुना का पानी सड़कों तक पहुंच गया था।
आईटीओ सहित दिल्ली के कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसे ध्यान में रखकर इस बार तैयारी की गई है। बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं, जिससे कि यमुना के बहाव में बाधा उत्पन्न न हो। इसके साथ ही अन्य आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
बाढ़ नियंत्रण केंद्र की शुरुआत की गई
बाढ़ नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनी हुई एपेक्स कमेटी की पिछले माह बैठक हुई थी जिसमें नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, बाढ़ एवं सिंचाई नियंत्रण विभाग और लोक निर्माण विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किया गया था।
मंत्री प्रवेश वर्मा, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया है, प्रत्येक सेक्टर कमेटी में 3-4 जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं।
ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन और समन्वय के लिए उत्तरदायी होंगे। 15 जून केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण केंद्र की शुरुआत की गई है।
दिल्ली सरकार द्वारा की गई तैयारी
- राहत और बचाव कार्यों के लिए 14 स्थानों पर नाव के साथ राहत टीम की तैनाती।
- सभी विभागों को मानसून के दौरान अपनी टीम को अलर्ट पर रखने का निर्देश।
- जलभराव के सभी चिन्हित स्थानों पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
- खादर इलाकें में बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था।
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