फरीदाबाद [अनिल बेताब]। माता-पिता की कॅरियर संबंधी सलाह की अनदेखी कई बार औलाद पर भारी पड़ जाती है। जीवन की दिशा ही बदल जाती है। अंधेरा छा जाता है, तो रोशनी के लिए फिर माता-पिता का मार्गदर्शन ही काम आता है। यह किसी कहानी के संवाद नहीं, एक परिवार की हकीकत है।

करीब 26 वर्षीय पढ़ी-लिखी युवती पर कभी जुनून सवार था मुंबई जाकर अभिनेत्री बनने का। ग्रेजुएशन करने के बाद माता-पिता के सामने अपनी बात रखी, उन्होंने मना कर दिया। बेटी को मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करने की सलाह दी गई। मगर बेटी पर अभिनेत्री बनने की धुन सवार थी। आखिरकार माता-पिता झुक गए और मुंबई आ गए। 

समझौता करना ही पड़ेगा
माता-पिता ने थोड़े दिन मुंबई में बिताए और फिर फरीदाबाद लौट आए। फिर शुरू हुआ फिल्मों में काम पाने के लिए युवती का सफर। फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय निजी कंपनियों के कोऑर्डिनेटर के माध्यम से युवती को छोटे-मोटे रोल मिलने लगे। कोऑर्डिनेटर युवती को समझाने लगे कि रेगुलर काम करना है, तो समझौता करना ही पड़ेगा। युवती का यौन शोषण किया जाने लगा। ऊंची पहुंच होने के कारण यौन शोषण करने वालों के खिलाफ युवती आवाज बुलंद नहीं कर पाई।

एचआइवी की पुष्टि हुई
एक दिन युवती को बुखार हुआ, दस्त भी होने लगे। युवती ने मुंबई में ही इलाज लेना शुरू किया, मगर कई दिन बाद भी आराम नहीं मिला। डॉक्टर की सलाह पर कुछ टेस्ट कराए गए तो युवती को एचआइवी की पुष्टि हुई। आंखों के आगे अंधेरा छा गया, आत्महत्या करने का विचार आया। एक मित्र ने हिम्मत बंधाई तो युवती घर लौट आईं। मां को आपबीती सुनाई। मां के साथ सरकारी अस्पताल पहुंची। यहां दोबारा से कराई गई जांच में भी एचआइवी की पुष्टि हुई।

जीवन के रंग कुछ और ही होते
सरकारी अस्पताल से इलाज शुरू किया गया। काउंसलर और माता-पिता की सलाह पर युवती अब मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रही हैं। युवती को इस बात का मलाल है कि अगर वह पहले माता-पिता की बात मान लेती, तो जीवन के रंग कुछ और ही होते।

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