Delhi Water Level: दिल्ली में कैसे सुधरेगा भूजल स्तर, छह अमृत सरोवरों पर अब तक काम शुरू नहीं
दिल्ली में अमृत सरोवर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 47 करोड़ रुपये का फंड दिया था। इनसे दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अमृत सरोवर बनाने के लिए स्थानों की पहचान हुई। इसमें से सिर्फ तीन अमृत सरोवर पर काम पूरा हो पाया है। बाकि रोशनआरा झील का कार्य दिसंबर में पूरा होना था लेकिन अब इसकी डेडलाइन भी बढ़ाकर फरवरी 2024 कर दिया है।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में भूजल स्तर में गिरावट हो रही है। ऐसे में धरती की प्यास बुझाने के लिए अमृत सरोवर बहुत ही सहायक सिद्ध हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली नगर निगम द्वारा प्रस्तावित 21 अमृत सरोवर में से छह पर तो अभी तक काम ही नहीं शुरू हो पाया है।
जबकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में यह अमृत सरोवर तय समय-सीमा में पूरे भी हो चुके हैं। दिल्ली में अमृत सरोवर की जिन परियोजनाओं को अक्टूबर से दिसंबर में पूरा होना था अभी पूरा होने का इंतजार ही कर रही है। इसी तरह कई अमृत सरोवर की डेडलाइन भी दो से तीन माह आगे बढ़ा दी गई है।
डेडलाइन भी बढ़ाकर की गई फरवरी 2024
दिल्ली में अमृत सरोवर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 47 करोड़ रुपये का फंड दिया था। इनसे दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अमृत सरोवर बनाने के लिए स्थानों की पहचान हुई। इसमें से सिर्फ तीन अमृत सरोवर पर काम पूरा हो पाया है। बाकि रोशनआरा झील का कार्य दिसंबर में पूरा होना था, लेकिन अब इसकी डेडलाइन भी बढ़ाकर फरवरी 2024 कर दिया है।
इसी प्रकार अक्टूबर 2023 में नजफगढ़ क्षेत्र के बगडोला में कार्य पूरा हो जाना चाहिए था, जिसका अभी भी दो प्रतिशत कार्य बाकि है। हरीजन बस्ती के पास स्थित अमृत सरोवर का कार्य नवंबर में पूरा हो जाना चाहिए था, अभी इसका कार्य 70 प्रतिशत ही हुआ है। गोकुल गार्डन द्वारका सेक्टर सात का कार्य भी नवंबर में पूरा हो जाना चाहिए था, अभी तक पांच प्रतिशत कार्य शेष हैं।
नाम अमृत सरोवर हालात विष सरोवर जैसी
दिल्ली में वैसे तो भूजल स्तर सुधारने के लिए अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं, लेकिन जो अमृत सरोवर बनकर तैयार हैं, उनकी स्थिति देखकर अमृत सरोवर कहना ठीक नहीं होगा। आया नगर में जो अमृत सरोवर करीब दो करोड़़ की लागत से सितंबर में बनकर तैयार हुआ, उसमें गंदगी और कीचड़ इतनी जम गई है कि मच्छर पैदा हो रहे हैं।
इसी प्रकार की स्थिति पूर्वी दिल्ली के शाहदरा दक्षिणी जोन में गाजीपुर गांव की सब्जी मंडी के पीछे 3.5 एकड़ में 1.17 करोड़ की लागत से बने तालाब की स्थिति है।
तालाब का पानी सूख चुका है। फेंसिंग और हरियाली भी गायब हो चुकी है। वहीं, हाइवे अपार्टमेंट के पास 1.53 एकड़ हिस्से में 11 लाख की लागत से अमृत सरोवर विकसित किया जाना था, जिसकी स्थिति बदहाल हो चुकी है।
स्थायी समिति न होने की वजह से लटक गया काम
पूर्वी दिल्ली जिले के शाहदरा उत्तरी जोन में 14 एकड़ में वेलकम झील विकसित की जानी थी। पिछले वर्ष पार्क में 1.80 एकड़ हिस्से में 1.30 करोड़ की लागत से वेलकम झील बनाई गई थी। उस समय वहां पानी भी था और लोगों को बोटिंग का सपना भी दिखाया गया था।
दूसरे फेज में 10.07 करोड़ की लागत से झील को विकसित किया जाना था। लेकिन वर्तमान में झील में पानी की एक भी बूंद नहीं है और वहां झाड़ियां उग गई हैं। निगम अधिकारियों का का कहना है कि चूंकि परियोजना लागत दस करोड़ की है ऐसे स्थायी समिति की बिना मंजूरी के इस परियोजना की निविदा को जारी नहीं किया जा सकता है।
जब तक स्थायी समिति का गठन नहीं होगा तब तक इस पर काम आगे बढ़ाना संभव नहीं है। इसी प्रकार माडल टाउन स्थित नैनी झील का प्रस्ताव है। निगम ने यहां दस करोड़ की राशि से पहले इसे संवारने की योजना तैयार की थी, लेकिन उस परियोजना को वापस ले लिया।
अब नए सिरे से परियोजना बनाई जा रही है। इस परियोजना की राशि भी पांच करोड़ से ज्यादा हुई तो फिर स्थायी समिति की बिना मंजूरी के इस पर कार्य शुरू नहीं हो पाएगा।
इन अमृत सरोवर पर शुरू नहीं हो पाया है काम
- पोचनपुर गांव
- अंबरहाट सेक्टर 19
- गाजीपुर गांव
- ताहिरपुर गांव
- वेलकम झील
- नैनी झील
अमृत सरोवरों का कार्य करा रहे हैं और इसकी निगरानी भी हो रही है। कुछ जगह पर तकनीकी कारणों से कार्य शुरू नहीं हो पाया है। कुछ स्थानों पर काम पूरा होना था, लेकिन प्रदूषण के कारण निर्माण पर लगी रोक से कार्य पूरा नहीं हो पाया। अंतिम चरण में कार्य हैं जिन्हें जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश हैं।
-अमित कुमार, निदेशक, प्रेस एवं सूचना निदेशालय, एमसीडी
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