नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। देश के विभिन्न भागों में समुदाय विशेष द्वारा हिंदुओं के खिलाफ भीड़ हिंसा को अंजाम दिए जाने को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चिंता जताई है। विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और कथित धर्म निरपेक्ष बुद्धिजीवियों के चुप्पी साधे रहने पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही कहा कि सरकारें भी इस मुद्दे पर बात नहीं करती हैं। ऑनलाइन पत्रकार वार्ता में आलोक कुमार ने ऐसी घटनाओं का सिलसिलेवार जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देश के अनेक भागों में ¨हदुओं के खिलाफ भीड़ हिंसा और अन्य प्रकार की हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। इससे स्पष्ट है कि एक धर्म विशेष समाज उस क्षेत्र में असहिष्णु हो जाता है, जहां उनकी संख्या ज्यादा है।

उन्होंने असम में सब्जी विक्रेता सनातन डेका की कार सवार पांच लोगों की हत्या के साथ ही बिहार के बेगूसराय जिले के नूरपुर में एक धर्म विशेष के तीन गुंडों द्वारा पिस्तौल के दम पर घर में घुसकर दलित महिला के साथ दुष्कर्म और उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म के असफल प्रयास का जिक्र किया। इसमें एक अपराधी द्वारा अभी भी पीडि़तों को धमकाने का आरोप है। इस मामले में वहां की थाना पुलिस भी गुंडों का साथ दे रही है।

आलोक कुमार ने कहा कि किशनगंज में 15 वर्षीय दलित लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या, बेगूसराय अनुमंडल में सरैया गांव में रामायण पढ़ने वाले युवकों से मारपीट, नालंदा मे व्यवसाइयों द्वारा ओम ध्वज लगाने सहित कई बड़ी घटनाएं हुई हैं। इससे पता चलता है कि कहीं न कहीं इन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रशासन का सहयोग मिल रहा है। इसी तरह उन्होंने पश्चिम बंगाल, झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब व दिल्ली में हिंदुओं पर होने वाले हमले या साजिश का जिक्र किया।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि सिविल सोसायटी कहलाने वाली संस्थाएं, मानवाधिकारों के नाम पर चल रहे टोले किसी आतंकवादी के मारे जाने पर ही जागते हैं। दुर्भाग्य से मरने वाला यदि अल्पसंख्यक समुदाय से हो तो ये लोग आसमान सिर पर उठा लेते हैं। यही नहीं कुछ कथित मीडिया संस्थान भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भारत को बदनाम करने पर तुल जाती हैं। वहीं, जब अन्याय से पीड़ित व्यक्ति हिंदू हो तो ये लोग गहरी नींद में सो जाते हैं।

Posted By: JP Yadav

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