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    Delhi Riots: दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद के अधिवक्ता कोरोना संक्रमित, हाईकोर्ट ने 27 जुलाई तक सुनवाई की स्थगित

    By Pradeep ChauhanEdited By:
    Updated: Mon, 04 Jul 2022 06:12 PM (IST)

    न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ सुनवाई सुनवाई स्थगित करते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद ही अदालत इससे जुड़ी अन्य याचिका पर सुनवाई करेगी।

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    पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान की जमानत याचिका पर भी सुनवाई 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

    नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगा मामले में साजिश से संबंधित यूएपीए मामले में गिरफ्तार आरोपित उमर खालिद की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ सुनवाई सुनवाई स्थगित करते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद ही अदालत इससे जुड़ी अन्य याचिका पर सुनवाई करेगी।

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    सोमवार को पीठ ने सुनवाई तब स्थगित कर दी जब उन्हें सूचित किया गया कि उमर खालिद की तरफ से पेश होने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस कोरोना संक्रमित हो गए हैं। पीठ ने इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में वर्ष- 2019 में चले आंदोलन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोपित जेएनयू छात्र शरजील इमाम और दिल्ली दंगा मामले में साजिश रचने की आरोपित जामिया मिलिया इस्लामिया पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान की जमानत याचिका पर भी सुनवाई 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

    उधर, दिल्ली भाजपा नेता व अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर पर विचार करने से दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को इन्कार कर दिया। भारतीय विमानों पर लिखे गए विक्टोरियन टेरिटरी और वायसराय टेरिटरी (ब्रिटिश राज की विरासत) काल साइन कोड को बदलने की मांग वाली याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर लेकर उचित निर्णय लेने का मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा व न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया।

    पीठ ने कहा कि यह अदालत का काम नहीं है। यह सरकार और कानून बनाने वाले का काम है। ऐसे में याची सरकार से संपर्क करे। पीठ ने केंद्र सरकार को याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर लेकर उचित समयसीमा के अंदर कानून के तहत विचार करने का निर्देश दिया। अश्विनी ने कहा था कि यह कोड विक्टोरियन टेरिटरी और वायसराय टेरिटरी (ब्रिटिश राज की विरासत) से संबंधित है और संविधान के विभिन्न अनुच्छेद का उल्लंघन है।