नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। पिछले तकरीबन एक सप्ताह से रुक-रुक जारी बारिश ने दिल्ली-एनसीआर का मौसम सुहाना कर दिया है। ऐसे में लोगों का अंदाज और एहसास शायराना हो जाना स्वाभाविक है। आइये हम यहां पर बताते हैं कि बारिश और मौसम से जुड़ी शायरी के बारे में, जिन्हें पढ़कर आप भी अपने दोस्तों और करीबियों के बीच शेयर करना चाहेंगे। दरअसल, हर भावुक हृदय में एक शायर छिपा होता है, जो विशेष परिस्थितियों में कुछ कहना चाहता है। अगर आप भी रोमांटिक शायरी के शौकीन हैं और अपने करीबी को शायरी के जरिये कुछ उम्दा कहना चाहते हैं तो पढ़िये पूरी स्टोरी। बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है इससे मौसम सुहावना हो गया है।

1.

मौसम है आशिकाना

ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूंढ़ लाना

ये रात ये खामोशी, ये ख्व़ाब से नजारे

जुगनू हैं या जमीं पर उतरे हुए हैं तारें

बेख़ाब मेरी आंखें, मदहोश है जमाना

कमाल अमरोही का लिखा यह गीत उन चुनिंदा शायरी में शुमार है, जिसे लोग आज भी पढ़ना और सुनाना पसंद करते हैं। पूरा गीत बरसात के मौसम की बानगी पेश करता है।

2. 

शायद कोई ख्वाहिश रोती रहती है,

मेरे अंदर बारिश होती रहती है।

मशहूर शायर अहमद फराज की यह शायरी रोमांटिक शायरी में तो शुमार नहीं होती है, लेकिन बारिश के दौरान लोग इसका जिक्र कर भावुक हो जाते हैं।

 

3.

याद आई वो पहली बारिश,

जब तुझे एक नजर देखा था।

नासिर काजमी की एक मशहूर गजल का यह शेर लोग याद कर गुनगुनाते भी हैं।

4.

उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं,

भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई।

फराज अहमद की तरह जमाल एहसानी की यह शायरी रोमांटिक वक्त में खूब पसंद की जाती है।

5. 

ऐ बारिश जरा थम के बरस,

जब वो आ जाये तो जम के बरस।

पहले न बरस के वो आ न सके,

फिर इतना बरस के वो जा न सके।

ये रोमांटिंक पंक्तियां किस शायर की हैं, यह तो नहीं पता, लेकिन लोग इसे खूब पसंद करते हैं। बारिश के मौसम में जब भी रोमांटिंक होते हैं, ये पंक्तियां जुबां से निकल ही जाती हैं। 

6.

बारिश में यूं तेरा बूंदों की तरह आना,

कुछ पल बाद फिर बादलों में खो जाना।

अचानक उठता है तूफान सा सीनें में मेरे,

बादलों में बिजली की तरह चमक जाना।

7. 

आज हलकी हलकी बारिश है,

आज सर्द हवा का रक्स भी है।

आज फूल भी निखरे निखरे हैं,

आज उन मैं तुम्हारा अक्स भी है।

8.

सुना है बहुत बारिश है तुम्हारे शहर में, ज्यादा भीगना मत।

अगर धूल गई सारी ग़लतफहमियां, तो फिर बहुत याद आएंगे हम।

9.

उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं,

भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई।

-जमाल एहसानी

10.

धूप ने गुजारिश की,

एक बूंद बारिश की।

-मोहम्मद अल्वी

11.

तमाम रात नहाया था शहर बारिश में,

वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे।

-जमाल एहसानी

12.

अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है,

जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की।

13.

बरसात के आते ही तौबा न रही बाकी

बादल जो नजर आए बदली मेरी नीयत भी।

-हसरत मोहानी

14.

टूट पड़ती थीं घटाएं जिन की आंखें देख कर,

वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए।

-सज्जाद बाकर रिजवी

15.

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था,

इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था

-कतील शिफाई

 

 

Edited By: Jp Yadav