अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान को बड़ी राहत, SC ने कड़ी नसीहत के साथ दी अंतरिम जमानत
भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कथित आपत्तिजनक पोस्ट के सिलसिले में प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

पीटीआई, नई दिल्ली। भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' पर टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कथित आपत्तिजनक पोस्ट के सिलसिले में प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने महमूदाबाद को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि आपको सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान के सोशल मीडिया पोस्ट पर शब्दों के चयन पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल दूसरों को अपमानित करने और उन्हें असहज करने के लिए किया गया। हालांकि सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन अभी ऐसी टिप्पणी क्यों की गई?
हर कोई बोलने और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार के बारे में बात कर रहा है। यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है...मानो देश पिछले 75 वर्षों से अधिकारों का वितरण कर रहा हो। प्रोफेसर अली की कुछ बातें हालांकि राष्ट्र के लिए अपमानजनक नहीं थीं, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी राय देनी शुरू की, उनके शब्द दोहरे अर्थ वाले और सांप्रदायिक हो गए। - सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच पर रोक लगाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ मामले की जांच के लिए आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन करें। साथ ही अदालत ने महमूदाबाद को भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर कोई और ऑनलाइन पोस्ट लिखने से मना किया है।
अली खान ने गिरफ्तारी को बताया था गलत
ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी के मामले में गिरफ्तारी होने के बाद सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद राहत के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अली खान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उनकी ओर से मामले पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई गई थी जिस पर कोर्ट ने केस सुनवाई के लिए जल्द ही सूचीबद्ध करने का भरोसा दिलाया था।
अली खान ने अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सोमवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई और आगस्टिन जार्ज मसीह की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र किया। सिब्बल ने कहा था कि उन्हें देशभक्ति वाले बयान के लिए गिरफ्तार किया गया है।
SC directs Ashoka University prof Mahmudabad, arrested in connection with his alleged offensive posts, to be released on interim bail
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2025
बता दें कि इससे पहले, मंगलवार को प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की दो दिन की रिमांड खत्म होने पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आजाद सिंह की कोर्ट ने सात दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था।
खरगे ने गिरफ्तारी को बताया था दुर्भाग्यपूर्ण
उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। सोशल मीडिया पर उन्हें समर्थन मिल रहा है। 1,100 से अधिक लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर उनकी रिहाई की मांग की है। यही याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई है। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर से भाजपा के पूर्व सांसद रितेश पांडेय ने भी प्रोफेसर की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने कार्रवाई को बताया था सही
हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने नई दिल्ली में कहा था कि मैं अपने देश की किसी बेटी को झुकने नहीं दूंगी। अपने पद पर रहते हुए न कल झुकने दिया, न आज झुकने दूंगी और न ही आगे नहीं झुकने दूंगी। प्रोफेसर अली खान का नाम लेकर कहा था कि जो भी व्यक्ति इस तरह से देश की बेटियों के नाम पर गद्दारी करेगा, उनके खिलाफ मेरा काम चलता रहेगा।
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