DUSU Election 2023: जंग जीतने के लिए छात्र संगठनों ने तैयार की पर्दे के पीछे की रणनीति, दिलचस्प हो रही लड़ाई
DUSU Election दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में एक हफ्ता भी नहीं बचा है। सभी छात्र संगठनों ने अपनी शक्ति झोंक दी है। प्रत्याशी भी तय हो चुके हैं। छात्र संगठन प्रत्याशियों के साथ कालेजों में प्रचार कर रहे हैं। दूसरी ओर इन संगठनों की देशभर की इकाइयां चुनाव में सक्रिय हो गई हैं। राजनीतिक पार्टियों के नेता भी अपने-अपने स्तर पर जनसमर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।

नई दिल्ली, उदय जगताप। DUSU Election: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में एक हफ्ता भी नहीं बचा है। सभी छात्र संगठनों ने अपनी शक्ति झोंक दी है। प्रत्याशी भी तय हो चुके हैं। छात्र संगठन प्रत्याशियों के साथ कालेजों में प्रचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, इन संगठनों की देशभर की इकाइयां चुनाव में सक्रिय हो गई हैं। राजनीतिक पार्टियों के नेता भी अपने-अपने स्तर पर जनसमर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
22 सितंबर को डूसू चुनाव के लिए मतदान होना है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की सभी इकाइयां कालेजों में प्रचार में जुटी हुई हैं। एबीवीपी के डूसू के पूर्व पदाधिकारी पहले ही प्रचार की कमान हाथ में लेकर कालेजों में जाकर छात्रों से संवाद कर रहे हैं। प्रत्याशी भी चार हिस्सों में बंटकर अलग-अलग कालेजों में जा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एबीवीपी के कार्यकर्ता चुनाव में काफी सक्रिय हैं। जाट और गुर्जर जातियों के छात्रों से संवाद की जिम्मेदारी इनको सौंपी गई है।
एबीवीपी के एक पदाधिकारी ने कहा, ''संगठन के पास दिल्ली में काफी सक्रिय कार्यकर्ता हैं। कालेजों में लंबे वक्त तक चले सदस्यता अभियान चलाए गए हैं। इससे संगठन से काफी छात्र जुड़े हैं। इसका फायदा प्रचार में देखने को मिल रहा है। हालांकि, एबीवीपी के अलावा भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी डूसू चुनाव में सक्रिय है। वे चुनाव से चार दिन पहले प्रचार की कमान हाथों में लेंगे। उनका पूरा फोकस डीयू और कालेजों के आसपास बने पीजी और प्राइवेट छात्रावासों पर है। यहां जाकर वे छात्रों से संपर्क करेंगे और अभाविप के लिए मतदान करने की अपील करेंगे। छात्रों के मेस और भोजनालय पर भी संगठन का फोकस है।''
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NSUI ने भी कसी कमर
दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) के प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर प्रचार कर रहे हैं। संगठन की दूसरे प्रदेशों की इकाइयां भी विश्वविद्यालय और कालेजों में सक्रिय हैं। एनएसयूआइ की बिहार इकाई के पदाधिकारी पूर्वांचल के छात्रों से संपर्क कर रहे हैं। पश्चिमी, पूर्वी और बाहरी दिल्ली के कालेजों में पूर्वांचल के छात्रों की तादाद अधिक है। इन पर फोकस कर रहे हैं।
तेलंगाना, उड़ीसा, केरल, उत्तर प्रदेश इकाई के पदाधिकारी भी अपने प्रदेश के छात्रों से संपर्क कर रहे हैं। एनएसयूआइ के पदाधिकारी ने कहा, श्रीराम कालेज आफ कामर्स में बड़ी संख्या में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के छात्र हैं। इनसे संगठन संवाद स्थापित कर रहा है।
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वहीं, दिल्ली कांग्रेस कमेटी की ओर से भी समन्वय समिति का गठन किया गया है। इसमें पांच सदस्य रखे गए हैं। दिल्ली कांग्रेस के पदाधिकारियों को कालेजों के छात्रों से संपर्क करने को कहा गया है। एनएसयूआइ के मीडिया संयोजक अक्षय लाकड़ा ने कहा, अध्यक्ष और सचिव उम्मीदवार विधि संकाय से आते हैं। यहां छात्रों की संख्या अधिक है।
पांच हजार से अधिक विधि संकाय के छात्र मतदान करते हैं। ऐसे में उनका झुकाव उनके संकाय के प्रत्याशी की तरफ रहना लाजमी है। इस समीकरण का विशेष ख्याल रखा गया है। इसका फायदा चुनाव में संगठन को मिलेगा।
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