नई दिल्‍ली, अंशु सिंह। हाल ही में राजधानी दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में आयोजित स्टोरीटेलिंग फेस्टिवल ‘कथाकार’ में देश-विदेश के कथाकारों ने अपनी अद्भुत कहानियां सुनाकर श्रोताओं को अभिभूत कर दिया। भारत में स्टोरीटेलिंग की सदियों पुरानी परंपरा रही है। अच्छी बात यह है कि इन दिनों नई पीढ़ी भी इसमें गहरी रुचि दिखा रही है। हिंदी, अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में युवा स्टोरीटेलिंग यानी किस्सागोई कर रहे हैं। वैश्विक महामारी के दौरान तो आनलाइन स्टोरीटेलिंग भी खूब लोकप्रिय हुई। अगर आपके पास भी भाषा का ज्ञान, किस्से-कहानियों का खजाना और कहानी सुनाने की कला है, तो बतौर स्टोरीटेलर आप बच्चों व बड़ों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हुए रोमांचक करियर बना सकते हैं।

गौरी भार्गव बच्चों को किताबों से जोड़ना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने चेन्नई में ही एक छोटी-सी लाइब्रेरी शुरू की। एक दिन लगा कि पेशेवर तरीके से स्टोरी टेलिंग करनी चाहिए। उन्होंने कथालय से बाकायदा शार्ट टर्म कोर्स किया और स्कूलों में स्टोरी टेलिंग सेशंस लेने लगीं। वे फेसबुक पर भी लाइव स्टोरी सेशन लेती हैं। गौरी की मानें, तो किस्सागोई ने उन्हें नई पहचान दी है।

कौन होते हैं स्टोरी टेलर: Storytellers In India स्टोरी टेलर वह होते हैं, जो किसी समूह के बीच कहानियां सुनाते हैं। ये उनकी मौलिक कहानी से लेकर लोक कथाएं, पंचतंत्र या अन्य पुस्तकों से ली गई कहानियां, महान पुरुषों की प्रेरणादायक कहानियां कुछ भी हो सकती हैं। इन स्टोरी टेलर्स के कहानी सुनाने का अंदाज भी खास होता है। इससे वे श्रोताओं के साथ एक गहरा संबंध स्थापित कर पाते हैं। सामान्य नैरेशन के साथ-साथ स्टोरी टेलर्स प्राप्स आदि का प्रयोग भी करते हैं। समूह के अलावा इन दिनों इंटरनेट मीडिया, पाडकास्ट की मदद से भी कहानियां सुना रहे हैं स्टोरी टेलर्स। स्टोरी टेलर श्रीविद्या के अनुसार, यह एक प्राचीन कला है, पर कहानियां निरंतर बदल रही हैं और समय एवं काल के अनुसार, उन्हें कहने का तरीका भी बदल रहा है।

योग्यता व बुनियादी कौशल: स्टोरी टेलर बनने के लिए वैसे तो किसी वोकेशनल या प्रोफेशनल ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कुछ निजी संस्थान हैं जो स्टोरी टेलिंग का प्रशिक्षण देते हैं। इसके अलावा, कोर्सेरा, यूडेमी, ईडीएक्स जैसे आनलाइन प्लेटफार्म से भी सर्टिफिकेट कोर्स किया जा सकता है। एक अच्छा स्टोरी टेलर बनने के लिए आपको निरंतर पढ़ना और लिखना होता है, तभी आप अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर नये प्रयोग कर पाते हैं। इसके लिए आपकी भाषाशैली के अलावा ‘कहानी कहने की कला’ भी सशक्त होनी चाहिए। आपके अंदर अपने दर्शकों/श्रोताओं को बांधे रखने की कला का होना भी जरूरी है। जो जितना खुले दिमाग से, बिना किसी संकोच के, भावनात्मक रूप से जुड़कर कहानियां सुनाता है, वह उतनी जल्दी श्रोताओं के दिलों में स्थान बना पाता है। इसके अलावा, जिन युवाओं के पास प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल, वायस माड्यूलेशन, अभिनय, परफार्मिंग आर्ट्स की जानकारी होती है, वे इस क्षेत्र में बेहतर कर पाते हैं। क्योंकि इससे उनके लिए कहानी के दृश्य की कल्पना करना और क्रिएट करना आसान होता है। वे श्रोताओं से ‘आई कांटैक्ट’ स्थापित कर पाते हैं, जिससे उनमें कहानी को लेकर गहरी उत्सुकता पैदा हो पाती है।

कैसे करें शुरुआत : कथालय की संस्थापक गीता रामानुजम के अनुसार, आपका फार्मेट (डिजिटल,वीडियो या आफलाइन) क्या होगा? आप किस वर्ग (बच्चे, सीनियर सिटीजन, कारपोरेट्स आदि) को कहानी सुनाना चाहते हैं और किस भाषा में कहानी सुनाना चाहेंगे? इन सबकी पहचान करने के बाद आपको अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने में मदद मिलेगी। आज के समय में हजारों पेशेवर स्टोरी टेलर्स हैं, जो विभिन्न विषयों पर कहानियां सुना रहे हैं। इसलिए अच्छा रहेगा कि अपने प्रतिद्वंद्वी स्टोरी टेलर्स के बारे में आपके पास पूरी जानकारी हो। वे किस तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं या उनकी कथा शैली क्या है? इन सबके साथ ही आपको अपना एक नेटवर्क बनाना होगा और निरंतर नये आइडियाज पर काम करते रहना होगा। जहां तक प्रमोशन एवं ब्रांडिंग की बात है, तो उसके लिए इंटरनेट मीडिया की मदद ली जा सकती है। आप वर्ड आफ माउथ भी अपने टारगेट आडिएंस तक पहुंच सकते हैं।

संभावनाएं : स्टोरी टेलर्स किसी भी परफार्मेंस ट्रुप के साथ जुड़कर काम कर सकते हैं। वे स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों, कारपोरेट्स के लिए वर्कशाप कर सकते हैं। कई अस्पतालों में भी स्टोरी टेलर्स की सेवाएं ली जाती हैं, क्योंकि यह एक आर्ट थेरेपी भी है। इनके अलावा, आप इंस्टाग्राम, यूट्यूब के लिए कंटेंट तैयार कर सकते हैं। पाडकास्ट शुरू कर सकते हैं। इन दिनों डिजिटल मार्केटिंग के लिए भी स्टोरी टेलर्स की सेवाएं ली जा रही हैं। ऐसे में जिन्हें मार्केटिंग और ब्रांडिंग की समझ है, वे इस क्षेत्र को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

पौराणिक/लोक कथाओं से मिल रही वैश्विक पहचान: बेंगलुरु के कथालय इंटरनेशनल एकेडमी आफ स्टोरीटेलिंग की संस्थापक गीता रामानुजम ने बताया कि हम शुरुआत में स्वयंसेवी संगठनों एवं सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए कहानियों के सत्र आयोजित करते थे। फिर शिक्षकों को इस कला में प्रशिक्षित करना शुरू किया। धीरे-धीरे ‘कथालय’ ने एक एकेडमी का रूप ले लिया। आज इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। भारत के अलावा, दुबई, सिंगापुर, अमेरिका के लोग यहां से आनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स (दो स्तरीय) कर रहे हैं। पाठ्यक्रम हमने खुद तैयार किए हैं, जिसे ब्रिटेन, अमेरिका, स्वीडन के अलावा भारत सरकार ने भी मान्यता दी है। मैं मानती हूं कि हमारी पौराणिक एवं लोक कथाओं में एक वैश्विक अपील है। लेकिन यह कहानी सुनाने वाले, उनकी आवाज, भावों एवं सुर पर निर्भर करता है कि वह कितनी रोचकता से उसे सबके सामने प्रस्तुत करते हैं।

प्रमुख संस्थान :

कथालय इंटरनेशनल एकेडमी आफ स्टोरीटेलिंग, बेंगलुरु

https://www.kathalaya.org

-ट्रुथ स्कूल, दिल्ली

http://truthschool.in

द ग्रेट इंडियन स्टोरीटेलर्स, दिल्ली

https://the-great-indian-storytellers

Edited By: Sanjay Pokhriyal