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    'गहरी जड़ें जमा चुकी यह सामाजिक बुराई, लेकिन...', HC ने दहेज कानून के दुरुपयोग पर की सख्त टिप्पणी

    Delhi High Court दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज कानून (Dowry laws) के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि उत्पीड़न के वास्तविक मामले मौजूद नहीं हैं। अदालत ने कहा कि दहेज की मांग एक गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक बुराई है और इसके कारण कई पीड़ितों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। पढ़ें कोर्ट ने और क्या कुछ कहा?

    By Vineet Tripathi Edited By: Monu Kumar Jha Updated: Fri, 14 Feb 2025 06:55 PM (IST)
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    गहरी जड़े जमा चुकी दहेज जैसी सामाजिक बुराई से अनभिज्ञ नहीं अदालत: हाईकोर्ट। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दहेज कानून के दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता-1860 की धारा -498ए के दुरुपयोग का मतलब यह नहीं है कि उत्पीड़न के वास्तविक मामले मौजूद नहीं हैं।

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    न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि यह अदालत दहेज के लालच की गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक बुराई की जमीनी हकीकत से अनभिज्ञ नहीं है। इसके कारण कई पीड़ितों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है।

    'कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग'

    पति के विरुद्ध हुई दहेज उत्पीड़न की प्राथमिकी को रद करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां देरी से पति के खिलाफ अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं, उसमें कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

    पीठ ने कहा कि अदालतों ने कई मामलों में वैवाहिक मुकदमें में पति और उसके परिवार को फंसाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर ध्यान दिया है। अदालत ने कहा कि यह जानकर दुख होता है कि अब इसका दुरुपयोग पति और उसके परिवार के सदस्यों को परेशान करने और लाभ उठाने के लिए एक हथियार के रूप में भी किया जा रहा है।

    'ऐसे मामले अब बढ़ा-चढ़ाकर कर बताए जाते हैं'

    ऐसे मामले अब वास्तविक घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर और गलत तरीके से पेश करके अधिवक्ता की सलाह पर तत्काल दायर किए जाते हैं। पत्नी की शिकायत पर पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दहेज की मांग और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी की गई थी।

    अदालत ने कहा कि पति द्वारा क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग करने वाली याचिका दायर करने के वर्षों से अधिक समय बाद 2017 में प्राथमिकी की गई थी।

    कुलदीप सिंह सेंगर के भाई की अंतरिम जमानत 11 मार्च तक बढ़ी

    वहीं पर एक दूसरे मामले में उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हत्या के मामले में पूर्व विधायक नेता कुलदीप सेंगर के भाई जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 11 मार्च तक बढ़ा दी।

    न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने जयदीप सेंगर को चिकित्सा आधार पर राहत दी। अदालत ने नोट किया कि जयदीप मुंह कैंसर से पीड़ित है और उसका इलाज चल रहा है। जयदीप की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें पहले दी गई अंतरिम जमानत 18 फरवरी को समाप्त हो रही है।

    अधिवक्ता ने हिरासत में मौत मामले में जयदीप सेंगर को सुनाई गई 10 साल की सजा को निलंबित करने की भी मांग की। इस पर पीठ ने सीबीआइ को नोटिस जारी कर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर 11 मार्च को सुनवाई होगी। कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया।

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