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    इस होनहार युवा क्रिकेटर की रफ्तार से थर्राए दुनिया के बल्‍लेबाज, जानें कौन है ये शख्‍स

    By Amit MishraEdited By:
    Updated: Thu, 08 Feb 2018 09:46 AM (IST)

    मां कविता मावी बताती हैं कि हाथ जलने के बाद ऐसा लगा कि वह क्रिकेट नहीं खेल पाएगा, लेकिन भगवान के आशीर्वाद से सब ठीक हो गया।

    इस होनहार युवा क्रिकेटर की रफ्तार से थर्राए दुनिया के बल्‍लेबाज, जानें कौन है ये शख्‍स

    नोएडा [जेएनएन]। अंडर-19 विश्वकप के फाइनल मुकाबले को भारत ने 08 विकेट से शानदार जीत हासिल की है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। भारतीय गेंदबाजो के दमदार प्रदर्शन के चलते ऑस्ट्रेलिया की टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी और 47.2 ओवर में ही 216 रन बनाकर आउट हो गई। 217 रन की चुनौती का पीछा करते हुए भारत ने 38.5 ओवर में सिर्फ 02 विकेट खोकर ही लक्ष्य को पार कर लिया।

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    'नोएडा एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर 

    अंडर-19 विश्वकप में 146 किमी की रफ्तार से गेंदबाजी करके मशहूर हुए क्रिकेटर शिवम मावी नोएडा के रहने वाले हैं। शिवम पर देशभर के क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें ट‌िकी हुईं थीं। उन्होंने क‌िसी को न‌िराश नहीं क‌िया और फाइनल मैच एक व‌िकेट लेकर अहम भूम‌िका न‌िभाई। पाकिस्तान के साथ हुए सेमीफाइनल मैच में मावी ने शानदार गेदबाजी की थी। रफ्तार की वजह से शिवम मावी को 'नोएडा एक्सप्रेस' भी कहा जाने लगा है।

    8 साल की उम्र से शुरू की ट्रेनिंग 

    नोएडा के सेक्टर-71 के रहने वाले शिवम ने पढ़ाई सिटी पब्लिक स्कूल से की है। वर्तमान में वह एल फलाह विश्वविद्यालय से बीबीए कर रहे हैं। शिवम ने 8 साल की उम्र से कोच फूलचंद्र से क्रिकेट ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। कोच फूलचंद्र के मुताबिक चोट के बाद भी शिव रोज नियत समय पर प्रैक्टिस मैदान पर पहुंच जाते थे। वह एक जगह बैठकर अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखते रहते थे और प्रैक्टिस सेशन खत्म होने पर ही घर जाते थे।

    कई बार लगी चोट 

    2 साल पहले एक ग्राउंड पर हुए हादसे में शिवम को काफी चोट आई थी। इस वजह से वह एक साल तक क्रिकेट नहीं खेल पाए। मावी एक बार करंट लगने से भी जल गए थे। बावजूद इसके गेंदबाजी नहीं छोड़ी। मां कविता मावी बताती हैं कि हाथ जलने के बाद ऐसा लगा कि वह क्रिकेट नहीं खेल पाएगा, लेकिन भगवान के आशीर्वाद से सब ठीक हो गया।

    क्रिकेट से है लगाव 

    शिवम के पिता पंकज मावी ने बताया कि वह बहुत ही जुझारू है। स्कूल खत्म होने के बाद सीधे क्रिकेट के मैदान पर प्रैक्टिस टाइम से पहले ही पहुंच जाता था। शिवम शांत स्वभाव का है और वह काफी कम लोगों से बात करता है, लेकिन खेल के प्रति समर्पित है। सरल स्वभाव व कड़ी मेहनत के बल पर ही शिवम ने यह मुकाम हासिल किया है। 

    ऐसे हुई शुरुआत 

    शिवम को सबसे पहले अंडर-14 में दिल्ली की टीम से खेलने का मौका मिला। यहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। बावजूद इसके दिल्ली अंडर-16 टीम में मावी का चयन नहीं किया गया। ऐसे में प्रशिक्षक फूलचंद्र शर्मा की राय के बाद वह उत्तर प्रदेश से खेलने लगे। फिर अंडर-19 में उत्तर प्रदेश के लिए कई टूर्नामेंट खेले। इसके बाद शिवम ने इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। चैलेंजर ट्रॉफी में नौ विकेट लेने पर उनका चयन अंडर-19 विश्वकप क्रिकेट के लिए किया गया।

    डेल स्टेन को आदर्श मानते हैं मावी 

    साल 2017 में शिवम मावी का चयन 2018 में होने वाले आईसीसी अंडर-19 विश्वकप के लिए भारतीय अंडर-19 टीम में हुआ। शिवम दाहिने हाथ से बल्लेबाजी और गेंदबाजी करते हैं और ऑलराउंडर खिलाड़ी की भूमिका निभाते हैं। लीग मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 विकेट लेकर तहलका मचाने वाले शिवम उम्मीदों पर खरे उतरे हैं। मावी ने क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ 2 विकेट लेकर टीम इंडिया के जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आईपीएल 2018 की नीलामी में तेज गेंदबाज शिवम मावी पर 3 करोड़ रुपये की बोली लगी है। मावी को 3 करोड़ रुपये में केकेआर ने खरीदा। शिवम मावी साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन को अपना आदर्श मानते हैं। 

    किसान परिवार से हैं मावी 

    मूलरूप से मेरठ (सीना) निवासी शिवम किसान परिवार से हैं। उनके माता-पिता 14 साल पहले रोजगार की तलाश में नोएडा आ गए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति उस वक्त बेहद कमजोर थी। वह अपने साथियों की किट से क्रिकेट खेला करते थे। उनके हुनर को देखकर बाद में परिवार ने भी शिवम का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया। उनका परिवार सेक्टर-71 में दो कमरे के छोटे से फ्लैट में रहता है। 

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