नई दिल्ली, जेएनएन। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस निगरानी में रह रहे आम्रपाली समूह के मुखिया सहित तीनों निदेशकों की दिवाली पर घर जाने और परिवार से मिलने की मांग ठुकराते हुए तल्ख टिप्पणी में कहा कि उन्हें हजारों फ्लैट खरीदारों की चिंता है। वे उन लोगों की दिवाली के बारे में सोच रहे हैं। तुम लोगों की तो रोज होली दिवाली होती रहती है।

मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की भी इजाजत नहीं

ये सख्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने आम्रपाली समूह की वकील गीत लूथरा की दिवाली पर तीनों निदेशकों को घर जाने और परिवार से मिलने की इजाजत दिये जाने की मांग ठुकराते हुए की। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज फारेंसिक आडिटर्स को देने और उन दस्तावेजों का मिलान कर फारेंसिक आडिटर्स के संतुष्ट हो जाने तक कंपनी के मुखिया और निदेशक अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार को पुलिस निगरानी में रहने और घर के बजाए नोएडा के एक होटल में रखने का आदेश दिया था। इस बीच उन्हें न तो घर जाने की इजाजत है और न ही किसी से मिलने की। यहां तक कि दस्तावेज सौंपने का काम खत्म होने के बाद उन्हें मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की भी इजाजत नहीं है।

आम्रपाली फॉरेंसिक ऑडिटः खरीदारों से हमेशा ज्यादा पैसा लिया, कस्टडी में रहेंगे निदेशक

बुधवार को मामले पर सुनवाई के दौरान फारेंसिक आडिटर्स ने कोर्ट को बताया कि अभी तक उन्होंने जितनी जांच की है उससे पता चलता है कि आम्रपाली की कंपनियों ने बड़े पैमाने पर अन्य कंपनियों में पैसा डाइवर्ट किया है। फारेंसिक आडिटर्स ने कहा कि रोज नई कंपनियां सामने आ रही हैं करीब सवा दो सौ कंपनियों में ट्रांसेक्शन हुआ है।

विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) का भी उल्लंघन हुआ है क्योंकि मारिशस की बहु राष्ट्रीय कंपनी से भी संव्यवहार हुआ है। फारेंसिक आडिटर्स की ओर से यह जानकारी मिलने के बाद कोर्ट ने आम्रपाली कंपनी के दोनों स्टैटुअरी आडीटर्स और चीफ फाइनेंस आफीसर (सीएफओ) चंद्र बावधा को आदेश दिया कि वे तीन दिन के भीतर उन सभी कंपनियों का ब्योरा दें जिनमें किसी भी तरह का सीधा या परोक्ष संव्यवहार हुआ है या उस कंपनी से कोई संबंध रहा है। इसके अलावा आम्रपाली की कंपनियों में कहां से पैसा आया और कहां गया इस सबका भी ब्योरा दो।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि आम्रपाली कंपनी के निदेशकों और उनके रिश्तेदारों को जो भी सुविधाएं मिली हैं उनका भी ब्योरा दो। कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब फारेंसिक आडिटर्स ने कोर्ट को बताया कि कंपनी के सीएफओ को आम्रपाली की ओर से 45 लाख की बीएमडब्लू कार मिली हुई थी इसके अलावा उसने 2 करोड़ का आयकर दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ब्योरा गलत दिया तो अवमानना के अलावा शपथ पर कोर्ट में झूठ बोलने की कार्यवाही के लिए तैयार रहो।

फारेंसिक आडिटर्स से जब कोर्ट को बताया कि आम्रपाली ने उन्हें कंपनी के 117 कंप्यूटर दिये हैं उनमें से 36 खराब हैं और काफी में पासवर्ड लगा है। इस पर कोर्ट ने आम्रपाली को आदेश दिया है कि वह फारेंसिक आडिटर्स को कंप्यूटर्स के पासवर्ड बताएं साथ ही यह भी बताएं कि किस कंप्यूटर में किस कंपनी का ब्योरा है। कोर्ट ने आम्रपाली को 12 नवंबर तक यह सब ब्योरा देने को कहा है। कोर्ट मामले में 13 नवंबर को फिर सुनवाई करेगा।

 

Posted By: Amit Mishra