देश में जाति जनगणना पर आया संघ का बयान, कहा- राजनीतिक हथियार के तौर पर न हो इस्तेमाल
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि जाति जनगणना में कोई समस्या नहीं है सरकार को भी योजनाओं के लिए आंकड़ों की जरूरत होती है। संघ ने कहा कि जनगणना का जाति के कल्याण के लिए इस्तेमाल हो न कि राजनीति हतियार के तौर पर इस्तेमाल हो। आरएसएस ने कहा कि यह समाज व देश की एकता-संप्रभुता के लिए अति संवेदनशील मामला है।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जाति जनगणना को लेकर मोदी सरकार के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की घेराबंदी में जुटे विपक्षी दलों से मुद्दा छिनते हुए आरएसएस ने स्पष्ट किया कि उसे इसमें कोई समस्या नहीं है। सरकार को भी योजनाओं के लिए आंकड़ों की जरूरत होती है। किसी विशेष समुदाय या जातियों के कल्याण के लिए विशेष ध्यान देने के लिए आवश्यक हो तो यह होना चाहिए।
लेकिन, इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते विपक्षी दलों को चेताते हुए कहा है कि यह समाज व देश की एकता-संप्रभुता के लिए अति संवेदनशील मामला है। ऐसे में इसका इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए या राजनीतिक हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।
विपक्ष नेता राहुल गांधी ने की है मांग
संघ का यह स्पष्ट संदेश ऐसे समय में आया है, जब जाति जनगणना की मांग में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सौंदर्य प्रतियोगिताओं तक में आरक्षण की मांग रखी है। साथ ही सरकार और संघ पर इसका विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं।
सरकार को आंकड़ों की होती है जरूरत
केरल के पलक्कड़ में आयोजित संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के अंतिम दिन पत्रकार वार्ता में एक सवाल के जवाब में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि सभी योजनाओं में किसी खास समुदाय या जाति पर विशेष ध्यान देने के लिए सरकार को आंकड़ों की आवश्यकता होती है। यह पहले से अच्छी तरह से प्रयोग में होता रहा है।
नहीं बनाना चाहिए राजनीतिक हथियार
आगे भी इसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन जनगणना का इस्तेमाल उस विशेष समुदाय या जाति के कल्याण के लिए ही होना चाहिए। न कि उसे राजनीतिक हथियार या चुनावी मुद्दा बनाया जाना चाहिए। क्योंकि, यह जाति व जाति-संबंध हिंदू समाज के लिए बहुत संवेदनशील होने के साथ हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।
संघ का शताब्दी वर्ष
आगे उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में सामाजिक परिवर्तन के लिए तय पंच परिवर्तन में देश में जाति की खाई को पाटने के लिए सामाजिक समरसता व सामाजिक सद्भाव बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रम तय किए गए हैं। उसमें समाज व धर्म के प्रबुद्ध लोगों को साथ लाने की तैयारी है।
संघ की तीन दिवसीय समन्वय बैठक में भाजपा, विहिप व विद्यार्थी परिषद के साथ ही संघ प्रेरित कुल 32 संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधि जुटे थे, जिनके बीच समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे संगठनों ने अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की तथा आगे का लक्ष्य तय किया। साथ ही संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में तय किए पंच परिवर्तन -सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय स्वत्व और नागरिक कर्तव्य को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया।
बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से बातचीत का आग्रह
संघ ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश सरकार के साथ बातचीत करने का आग्रह किया है। समन्वय बैठक के दौरान विभिन्न संगठनों ने बांग्लादेश की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। सुनील आंबेकर ने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है।
बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के बारे में हर कोई चिंतित है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों ने अपने प्रतिनिधियों और बयानों के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह बांग्लादेश सरकार के साथ मिलकर काम करें ताकि वहां हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बंगाल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म व हत्या पर हुई विस्तार से चर्चा
समन्वयक बैठक में बंगाल में महिला चिकित्सक के साथ हुए दुष्कर्म व हत्या के पर विस्तार से चर्चा हुई है। सुनील आंबेकर ने कहा कि यह एक बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और हर कोई इससे चिंतित है। देश में अन्य स्थानों में बढ़ रही इस तरह की घटनाओं के मद्देनजर सरकार की भूमिका, आधिकारिक तंत्र, कानून, दंडात्मक कार्रवाई और प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। उसमें फास्ट ट्रैक प्रक्रिया, सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, पारिवारिक संस्कार, इंटरनेट व ओटीटी माध्यमों से परोसी जा रही अश्लीलता समेत अन्य मामलों में काम करना तय किया गया।
संघ-भाजपा में सबकुछ ठीक
संघ और भाजपा में मतभेदों के सवाल पर सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ और भाजपा में सबकुछ ठीक है। तीन दिवसीय समन्वय बैठक में सभी आनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि आए। संघ के 100 वर्षों में समन्वय, संवाद व सहयोग की सुव्यवस्थित व्यवस्था है। राष्ट्र प्रथम हमारा सामूहिक लक्ष्य है। कुछ मामले थे तो वह भी हल कर लिए गए है। यह पारिवारिक मामला है।
वक्फ संशोधन विधेयक और मतांतरण भी चर्चा
बैठक में वक्फ संशोधन विधेयक व तमिलनाडु जैसे राज्यों में मतांतरण पर भी चर्चा हुई।
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