नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। हिंदुस्तान के इतिहास पर गौर फरमाएं तो एक-दो महिलाएं ही हैं, जिन्होंने अपने कामों के जरिये नाम कमाया। इन्हीं में से एक थी रजिया सुल्तान। दिल्ली की सल्तनत पर काबिज होने वाली रजिया सुल्तान को भारत की पहली महिला शासक के तौर पर जाना जाता है।

सिर्फ 4 साल तक दिल्ली की गद्दी पर बैठ बना गई इतिहास

शमशुद्दीन इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान ने दिल्ली की गद्दी पर बैठकर 1236 से 1240 तक सिर्फ 4 साल तक ही राज किया, लेकिन वह इतिहास रच गई। वह देश की महिला शासक थीं। कहा जा सकता है कि वह इत्तेफाक से दिल्ली की गद्दी पर बैठीं, लेकिन रजिया सुल्तान में कई खूबियां थीं, जो उन्हें इसके काबिल साबित करता था। दिल्ली की सल्तनत से हटते ही उसी साल यानी 14 अक्टूबर, 1240 में ही हरियाणा के कैथल में बहराम शाह से युद्ध करते हुए रजिया सुल्तान वीरगति को प्राप्त हो गई थी।

अपने ही सलाहकार को दे बैठीं दिल

दिल्ली की सल्तनत पर राज करने वालीं एकमात्र महिला शासक रजिया सुल्तान रजिया को अपने सलाहकार जमात-उद-दिन-याकूत से इश्क हो गया। याकूत भी रजिया को चाहता था। दरअसल, रजिया और याकूत दोनों का इश्क मुसलमान शासकों पसंद नहीं आया। कहा जाता है कि याकूत तुर्क नहीं था, इसलिए मुसलमानों को भी पसंद नहीं आया। उधर, रजिया ने युद्ध के घोड़ों की जिम्मेदारी देते हुए याकूत को घुड़शाला का अधिकारी नियुक्त कर दिया था। इसको लेकर राज्यपालों, उच्च अधिकारियों और मुस्लिम राजवंश के सूबेदारों का काफी गुस्सा था। वह नहीं चाहते थे कि रजिया सुल्तान और याकूत का निकाह हो। 

सरेआम हुई थी रजिया की मां और भाई की हत्या

1236 से 1240 तक दिल्ली की सल्तनत पर राज करने वालीं रजिया सुल्तान पहली मुस्लिम और तुर्की के इतिहास में पहली महिला शासक थीं। पिता शम्सुद्दीन इल्तुतमिश की 12 अप्रैल, 1236 में मृत्यु हो गई। इसके बाद रजिया सुल्तान को दिल्ली का सुल्तान बनाया गया। इसके पीछे एक सच्ची कहानी है। हुआ यूं कि पिता शम्सुद्दीन इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद मुसलिम समाज को रजिया सुल्तान का गद्दी पर बैठना मंजूर नहीं था। ऐसे में चालाकी दिखाते हुए रजिया के छोटे भाई रक्नुद्दीन फिरोज शाह को दिल्ली की सल्तनत पर बैठाया गया, लेकिन रजिया के भाई रक्नुद्दीन सिर्फ 6 महीने ही सत्ता में रहे। वजह मौज-मस्ती की प्रवृित्त का होने की वजह से रक्नुद्दीन के खिलाफ जन विद्रोह हो गया। इसके कारण 9 नवंबर, 1236 को रक्नुद्दीन  के साथ उसकी मा शाह तुर्कान की हत्या कर दी गई। 

हरियाणा के कैथल में बहन सजिया के साथ मारी गईं रजिया

भाई की मृत्यु के बाद मुस्लिमों को रजिया सुल्तान को दिल्ली की सत्ता सौंपनी पड़ी। सत्ता संभालने के बाद रजिया सुल्तान ने रुढ़ि को छोड़कर पुरुष सैनिकों की तरह कोट और पगड़ी पहनने लगीं। इसके साथ ही वह युद्ध में भी बिना हिजाब (नकाब) शामिल होती थीं। खैर, भाई ने बगावत की तो 14 अक्टूबर 1240 को रजिया व उसकी बहन सजिया को हरियाणा के पास कैथल में मार डाला गया। दोनों बहनों की कब्र पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास है।

कई मुसलिम रीति रिवाजों को नहीं मानती थीं रजिया

रजिया  सुल्तान को इसलिए भी याद किया जाता है कि उन्होंने पर्दा प्रथा का न केवल विरोध किया, बल्कि खुद भी  त्याग दिया। रजिया सुल्तान सैनिकों की तरह ही कोट व पगड़ी पहन कर अपने दरबार में रहती थीं। यही वजह थी कि मुसलमान सरदार रजिया से खार खाते थे। कहा जाता है कि लाम वंश की सल्तनत में रजिया सुल्तान भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की भी पहली महिला शासक थीं। 

रजिया करती थीं अपने पिता से बेहद प्यार

रजिया सुल्तान अपने पिता से बहुत मोहब्बत करने के साथ लगाव भी रखती थीं। रजिया दिल्ली की सल्तनत को महफूज देखना चाहती थीं, इसलिए पिता से किया हुआ वादा पूरा करने के लिए रजिया सुल्तान ने अल्तुनिया से निकाह कर लिया। रजिया ने अल्तुनिया से निकाह तो किया लेकिन अपने पहले इश्क याकूत को नहीं भुला पाई और उसे मरते दम तक चाहती रहीं। वहीं, रजिया के भाई मैजुद्दीन बेहराम शाह ने मौका मिलते ही सल्तनत हथिया ली। अपनी सल्तनत की वापस पाने लिए रजिया और उसके पति अल्तुनिया ने बेहराम शाह से युद्ध किया। युद्ध में हार हुई तो रजिया अपनी बहन सजिया के साथ कैथल पहुंच गईं। यहां पर यानी कैथल में भी रजिया और उसके पति का सामना जाट राजाओं से हुआ। इस युद्ध में रजिया और उसके पति से उनके ही सैनिकों ने दूरी बना ली। इसके बाद जाट राजाओं ने अल्तुनिया के बाद रजिया सुल्तान को भी मार दिया। यह भी कहा जाता है कि रजिया ने अपनी इज्जत बचाने के लिए याकूत को याद करते हुए खुद को तलवार मार ली थी  और जान दे दी।

Edited By: Jp Yadav