नई दिल्ली, जेएनएन। One Year of Burari Death Case: ठीक एक साल पहले 30 जून, 2018 की रात को दिल्ली के बुराड़ी इलाके में हुई एक ही परिवार के 11 सदस्यों की आत्महत्या मामले को आज एक साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन अगले दिन यानी एक जुलाई, 2018 की सुबह का खौफ आज भी लोगों के जेहन में बरकरार है। लोग उस सुबह के लम्हे को याद कर सिहर उठते हैं, जब उन्होंने 11 लोगों का शव फांसी पर लटके देखा था। बुराड़ी के लोगों को ही क्यों, समूची दिल्ली के लिए बुराड़ी की घटना आज भी ताजा है। 

आत्माओं और मोक्ष के चक्कर में गई थीं 11 जानें
पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ था कि बुराड़ी के चूंडावत परिवार में 77 वर्षीय नारायण देवी, 50 वर्षीय भावनेश, 45 वर्षीय ललित, बहन 57 वर्षीय प्रतिभा, भावनेश की 48 वर्षीय पत्नी सविता, उनके बच्चे 25 वर्षीय निधि, 23 वर्षीय मीनू, 15 वर्षीय ध्रुव, ललित की 42 वर्षीय पत्नी टीना, उनका 15 वर्षीय बेटा शिवम और 33 वर्षीय भांजी प्रिंयका मोक्ष के चक्कर में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। इनमें से 9 सदस्यों के शव फंदे पर झूल रहे थे। वहीं, नारायणी देवी का शव अंदर कमरे में जमीन पर था। रसोई में तमाम तरह के व्यंजन बने हुए थे। घर में अगरबत्ती की महक थी। टेलीफोन के तार से 9 लोगों के हाथ पैर बंधे थे और मुंह व आंखों पर चुन्नी थी।

पढ़िए पुलिस का खुलासा
गौरतलब है कि सितंबर, 2018 में एक परिवार के 11 सदस्यों के उनके घर में मृत मिलने के मामले में मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि उन लोगों ने खुदकुशी नहीं की थी, बल्कि एक अनुष्ठान के दौरान दुर्घटनावश वे सभी मारे गए थे। दिल्ली पुलिस ने जुलाई में ही सीबीआइ को साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करने को कहा था। रिपोर्ट के अनुसार, ‘मृतकों की मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी के अध्ययन के आधार पर घटना आत्महत्या की नहीं थी बल्कि दुर्घटना थी जो एक अनुष्ठान करते समय घट गई। किसी भी सदस्य की अपनी जान लेने का इरादा नहीं था।’ मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी के दौरान सीबीआई की केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) ने घर में मिले रजिस्टरों में लिखी बातों का तथा पुलिस द्वारा दर्ज किये गये चूंडावत परिवार के सदस्यों और मित्रों के बयानों का विश्लेषण किया था।

सीएफएसएल ने परिवार के सबसे बड़े सदस्य दिनेश सिंह चूंडावत और उनकी बहन सुजाता नागपाल तथा अन्य परिजनों से भी पूछताछ की थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी में किसी व्यक्त के मेडिकल रिकार्ड का विश्लेषण करके, मित्रों और परिवार के सदस्यों से पूछताछ करके तथा मृत्यु से पहले उसकी मानसिक दशा का अध्ययन करके उस शख्स की मानसिक स्थिति पता लगाने का प्रयास किया गया था। इस केस में भी यही किया गया, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

यहां पर बता दें कि दिल्ली में अब तक की सबसे बड़ी सनसनीखेज घटना में बुराड़ी स्थित एक घर में एक जुलाई, 2018 की सुबह एक ही परिवार के 11 लोग संदिग्ध हालात में मृत पाए गए थे। मृतकों में सात महिलाएं व चार पुरुष थे, जिनमें दो नाबालिग थे। एक महिला का शव रोशनदान से तो नौ लोगों के शव छत से लगी लोहे की ग्रिल से चुन्नी व साड़ियों से लटके मिले। एक बुजुर्ग महिला का शव जमीन पर पड़ा मिला था। नौ लोगों के हाथ-पैर व मुंह बंधे हुए थे और आंखों पर रुई रखकर पट्टी बांधी गई थी।

बुराड़ी-संत नगर मेन रोड से सटे संत नगर की गली नंबर दो में बुजुर्ग महिला नारायण का मकान है। इसमें वह दो बेटों भुवनेश व ललित, उनकी पत्नियों, पोते-पोतियों व विधवा बेटी संग रहती थीं। ये लोग मूलरूप से राजस्थान के निवासी थे और 22 साल पहले यहां आकर बसे थे। बुजुर्ग महिला के तीसरे बेटे दिनेश सिविल कांटेक्टर हैं और राजस्थान के चित्ताैड़गढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग महिला के दोनों बेटों की भूतल पर एक परचून व दूसरी प्लाईवुड की दुकान है। ऊपर पहली व दूसरी मंजिल पर परिवार रहता था।

रोज सुबह ललित घर के सामने रहने वाले दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त तारा प्रसाद शर्मा के साथ मार्निग वॉक पर जाते थे। उससे पहले शर्मा ललित की दुकान से दूध लेते थे। रविवार सुबह दुकान नहीं खुली तो शर्मा दरवाजा खटखटाने गए, पर दरवाजा खुला था तो वह ऊपर चले गए। ऊपर का दरवाजा भी खुला था। आगे जाने पर उनकी रूह कांप गई। बरामदे वाले हिस्से में दस लोगों के शव लटके थे, जबकि एक महिला का शव कमरे में पड़ा था।

Burari Death Case: एक साल बाद भी 11 मौतों को अनसुलझा रहस्य ही मानते हैं कुछ लोग

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Posted By: JP Yadav

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