नई दिल्ली, जेएनएन। लंबे समय से गुटबाजी की शिकार दिल्ली कांग्रेस शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के दरबार में पहुंची तो आधे घंटे में ही एक माह की मोहलत लेकर लौट आई। उम्मीद के मुताबिक न कोई हंगामा हुआ और न ही आरोप प्रत्यारोप का दौर चला। प्रदेश प्रभारी पीसी चाको को छोड़कर सभी ने संक्षेप में अपनी-अपनी बात रखी और एकजुट होकर काम करने का आश्वासन दिया। राहुल ने सभी की बात सुनी, फिर यह कहते हुए बैठक खत्म कर दी कि ठीक है, एक माह बाद मिलते हैं।

लोकसभा चुनाव में हुई हार की समीक्षा के लिए सुबह दस बजे राहुल के तुगलक रोड स्थित निवास पर समीक्षा बैठक हुई। इसमें दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों के प्रत्याशी- शीला दीक्षित, अजय माकन, जेपी अग्रवाल, अर¨वदर सिंह लवली, महाबल मिश्र, राजेश लिलोठिया, कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ एवं प्रदेश प्रभारी पी.सी. चाको मौजूद रहे। संभावना थी कि शीला बैठक में स्वयं द्वारा गठित पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट पेश करेंगी। वहीं चाको सहित ज्यादातर उम्मीदवार हार के कारण बताएंगे । यही नहीं शीला की ओर से समीक्षा कमेटी की अनुशंसा पर प्रदेश संगठन में बदलाव और चाको की ओर से नेतृत्व को ही बदले जाने की वकालत करने की संभावना थी। लेकिन, पहली बार सब एक ही सुर में बोलते नजर आए।

राहुल बैठक में सुबह सवा दस बजे पहुंचे। उन्होंने अपनी बात रखने के लिए कहा तो सभी एक-एक करके बोलने लगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक माकन ने कहा कि पार्टी को जमीनी स्तर पर काम करने और सड़क पर उतरने की जरूरत है। सभी को मिलकर काम करना चाहिए। राजेश लिलोठिया और अग्रवाल ने ईवीएम में गड़बड़ी का मुददा उठाया एवं मीडिया में विरोधाभासी बयान देने से भी बचने को कहा।

महाबल मिश्रा का कहना था कि राजधानी का प्रोफाइल तेजी से बदल रहा है, पार्टी की कार्यशैली भी उसी के अनुरूप होनी चाहिए। लवली और हारून ने भी एकजुट होकर विधानसभा चुनाव की तैयारी करने की बात कही। वहीं शीला ने राहुल से कहा कि उन्हें एक महीने का समय दिया जाए, वह प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक कर देंगी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक आखिर में राहुल ने चाको से पूछा कि क्या वह भी कुछ कहना चाहते हैं, तो उन्होंने इन्कार कर दिया। राहुल ने अपनी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने सभी की बात सुनी और एक माह बाद दोबारा समीक्षा करने की बात कहते हुए बैठक खत्म कर दी।

नाम न छापने के अनुरोध पर बैठक में मौजूद कई नेताओं ने बताया कि राहुल का मूड और बैठक का माहौल ऐसा था ही नहीं कि वहां ज्यादा कुछ खुलकर कहा जाए अथवा गंभीरता एवं बारीकी से हार के कारणों पर विचार किया जाए।

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Posted By: JP Yadav

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