25 सीटों पर पूर्वांचली करते हैं भाग्य का फैसला, इन दिग्गजों नेताओं का भविष्य दांव पर; राजनीतिक दलों में संग्राम
दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही उनकी राजनीतिक अहमियत भी बढ़ी है। 25 से अधिक सीटों पर इनका वोट निर्णायक है। सभी पार्टियां पुरबिया मतदाताओं को लुभाने में जुटी हैं। भाजपा ने केजरीवाल के बयान को मुद्दा बनाया है। आप बचाव की मुद्रा में है। कांग्रेस दोनों पर हमलावर है। आने वाले दिनों में इसे लेकर राजनीति और तेज होने की उम्मीद है।
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में पूर्वांचल के लोगों की संख्या बढ़ने के साथ ही इनकी राजनीतिक अहमियत भी बढ़ी है। दिल्ली के 25 से अधिक सीटों पर उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड से संबंधित मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। यही कारण है कि सभी पार्टियों की नजर पुरबिया मतदाताओं पर रहती है। इस बार के चुनाव में भी इसकी झलक दिख रही है।
पिछले माह से ही मतदाता सूची में इनके नाम जोड़ने व काटने को लेकर भाजपा व आम आदमी पार्टी के बीच खूब जुबानी जंग हो रही है। भाजपा को मालूम है कि दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए पुरबिया मतदाताओं का साथ जरूरी है, इसलिए अरविंद केजरीवाल के बयान को लपक लिया। उसने इसे उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों के अपमान से जोड़कर इसे चुनावी मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है।
प्रवेश वर्मा की चुनाव आयोग से शिकायत
केजरीवाल बृहस्पतिवार को नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी प्रवेश वर्मा की शिकायत करने गए थे। वहां मीडिया के सामने बयान दिया कि भाजपा वाले उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों को लाकर फर्जी वोट बनवा रहे हैं। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाने में बिल्कुल देर नहीं की।
पूर्वांचलियों को साधने के लिए बयानबाजी
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ ही अन्य भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने केजरीवाल और आप पर पूर्वांचलियों से नफरत करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। उनके पुराने बयान को भी उछाला जा रहा है। मीडिया के सामने बयानबाजी से लेकर सड़क पर प्रदर्शन व इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पार्टी इसे लेकर आप को घेरने में लग गई है।
बीजेपी पर ओछी राजनीति का आरोप
वहीं, केजरीवाल व अन्य आप नेता बचाव की मुद्रा में हैं। वह भाजपा पर तथ्यों को तोड़कर पेश करने और ओछी राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस दोनों पार्टियों को पूर्वांचल के लोगों की समस्याएं दूर नहीं करने का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में इसे लेकर राजनीति और तेज होने की उम्मीद है।
पिछले कुछ दिनों से पूर्वांचलियों को लेकर हो रही राजनीति से चुनाव में इनकी अहमियत का पता लगता है। रोजी रोटी की तलाश में दिल्ली पहुंचने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड के लोग अब यहां के राजनीतिक समीकरण को बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पूर्वांचली वोट पाने में बीजेपी सफल
यहां के 70 में से 17 विधानसभा क्षेत्रों में इन राज्यों से संबंधित मतदाताओं की संख्या 30 से 55 प्रतिशत तक है। कई अन्य सीटों पर इनकी अच्छी संख्या है। लोकसभा चुनाव में भाजपा इनका समर्थन लेने में सफल रहती है। वर्ष 2014, 2019 के बाद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन क्षेत्रों में भाजपा को अच्छी बढ़त मिली थी, जहां पूर्वांचल के लोगों की संख्या अधिक है। विधानसभा चुनावों में यह स्थिति बदल जाती है।
छठ के आयोजन को लेकर राजनीति
वर्ष 2015 और वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों में इनमें से अधिकांश सीटों पर आप की जीत हुई थी। इस विधानसभा चुनाव में इन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए पार्टियों में होड़ लगी हुई है। छठ के समय से इसे लेकर राजनीति शुरू हो गई थी। छठ घाट को लेकर आप व भाजपा के बीच खूब बयानबाजी के साथ ही धरना प्रदर्शन भी हुआ था।
इन नेताओं की साख दांव पर
पूर्वांचल से संबंधित गोपाल राय, सोमनाथ भारती, विनय मिश्रा, वंदना सिंह, अखिलेश पति त्रिपाठी सहित कई विधायक हैं। इस बार अवध ओझा को भी पार्टी ने टिकट दिया है। गोपाल राय को मंत्री बनाने के साथ संजय सिंह को राज्यसभा भेजा गया है। संजय सिंह का कहना है कि सबसे अधिक पूर्वांचली नेताओं को उनकी पार्टी टिकट देती है। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश व बिहार के हैं। उनकी समस्याएं दूर करने के लिए आप सरकार ने काम किया है।
पीएम मोदी और सीएम योगी पर दारोमदार
भाजपा को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता के साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम से पूर्वांचल के लोगों का समर्थन उसे मिलेगा। कानून व्यवस्था सुधारने के लिए अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई व हिंदुत्ववादी छवि से उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार और उत्तराखंड के लोग भी योगी के प्रशंसक हैं। मोदी एक चुनावी रैली कर चुके हैं। आने वाले दिनों में उनकी और रैली आयोजित होने के साथ ही योगी को भी चुनाव प्रचार में उतारा जाएगा।
दिल्ली में मनोज तिवारी भाजपा के पूर्वांचली चेहरा हैं। इनके सहारे भाजपा पूर्वांचलियों को अपने साथ जोड़ने में लगी हुई है। उत्तर प्रदेश व बिहार के लोकप्रिया नेता भी यहां के चुनाव प्रचार में शामिल होंगे। कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड के नेताओं को प्रचार में उतार रही है।
विधानसभा | पूर्वांचली मतदाता (प्रतिशत) |
संगम विहार | 50 |
लक्ष्मी नगर | 54 |
किराड़ी | 54 |
द्वारका | 53 |
उत्तम नगर | 52 |
बदरपुर | 50 |
बुराड़ी | 50 |
बादली | 46 |
नांगलोई | 43 |
विकासपुरी | 43 |
मटियाला | 40 |
पटपड़गंज | 40 |
करावल नगर | 31 |
पालम | 31 |
देवली | 31 |
राजेंद्र नगर | 27 |
सीमापुरी | 26 |
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