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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड में पुलिस ने किया एक और राज का खुलासा, पढ़िए उस रात का एक और सच

By Vinay Kumar TiwariEdited By:
Published: Sun, 30 May 2021 07:17 PM (GMT+05:30)

सागर धनखड़ हत्याकांड में शामिल सभी बदमाश हथियारों से लैस थे। उनके पास पिस्टल रिवाल्वर व तमंचा जैसे छोटे हथियार ...और पढ़ें

सात कारों से आए थे 20 से अधिक बदमाश, सभी के हाथ में हथियार।
सात कारों से आए थे 20 से अधिक बदमाश, सभी के हाथ में हथियार।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सागर धनखड़ हत्याकांड में शामिल सभी बदमाश हथियारों से लैस थे। उनके पास पिस्टल, रिवाल्वर व तमंचा जैसे छोटे हथियार थे। घटना के बाद पुलिस ने सुशील समेत 9 आरोपितों को अब तक गिरफ्तार तो कर लिया है, लेकिन हथियार बरामद नहीं कर पाई है।

पुलिस का कहना है कि जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया उससे माना जा रहा कि सुशील ने अजय सहरावत के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम दिया। सात कारों में 20 से अधिक बदमाश थे जिन्होंने सागर, सोनू महाल, भक्तु, अमित, रविन्द्र व विकास की छत्रसाल स्टेडियम के बाहर पार्किंग एरिया में 4 मई की देर रात एक बजे बुरी तरह पिटाई की थी। हरियाणा के असौदा व दिल्ली के नीरज बवाना गिरोह के उक्त बदमाश शाम के समय पहले सुशील के बापरौला गांव स्थित घर पर आए थे। वहां उन्होंने सुशील के साथ रणनीति बनाई।

रात में सभी ने किसी रेस्तरां में खाना खाया व शराब पी। उसके बाद सभी पहले शालीमार बाग आये। वहां से सोनू व सागर के दोस्त रविन्द्र व विकास को उठाया और कार में बैठा लिया। फिर मॉडल टाउन तीन में जाकर सागर, सोनू व अन्य को कार में डाल स्टेडियम लेकर आ गए थे। उसके बाद पार्किंग एरिया में सागर, सोनू व अन्य को लाठी डंडे व रॉड से बुरी तरह पिटाई की गई। जमीन पर गिरा कर जानवरों की तरह उनकी पिटाई की गई।

बताया जाता है कि सभी के हाथों में लाठी डंडे थे ही उनके पास कमर में हथियार भी थे। वे लोग पूरी तैयारी में आए थे ताकि हर तरह के हालात का सामना कर सकें। वीडियो देख कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते है। सागर , सोनू आदि लहू लुहान होकर जमीन पर कराह रहे थे। बदमाशों के साथ सशील भी डंडा लेकर उनकी बुरी तरह से पिटाई कर रहा था। कई के हाथ में पिस्टल भी थी। सुशील व उसके साथी बदमाशों ने बहशीपन की सभी हदें पार कर दी थी।