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    Air Pollution: दिल्ली-NCR ही नहीं, देश के इन 11 शहरों में साल भर प्रदूषण का स्तर रहता है ज्यादा; पढ़ें डिटेल्स

    रेस्पिरर लिविंग साइंसेस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर ही नहीं भारत के 11 शहरों में पीएम10 का स्तर पूरे साल सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा। चेन्नई बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में भी वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में विफल रही। रिपोर्ट में दिल्ली पटना और लखनऊ सबसे अधिक प्रभावित शहर हैं जहाँ प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक है।

    By sanjeev Gupta Edited By: Sonu Suman Updated: Mon, 21 Apr 2025 06:58 PM (IST)
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    देश के 11 शहरों में साल भर मानकों से अधिक रहा पीएम 10 का स्तर।

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, वायु प्रदूषण देश के अन्य हिस्सों में भी बड़ी समस्या बन गया है। आलम यह है कि प्रदूषण अब सिर्फ सर्दियों में परेशान नहीं करता बल्कि इसका स्तर साल भर तय मानकों से ऊपर बना रहता है। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद, जिन्हें आमतौर पर बेहतर वायु गुणवत्ता वाला माना जाता है, वे भी राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में विफल साबित हो रहे हैं।

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    रेस्पिरर लिविंग साइंसेस की रिपोर्ट बताती है कि 11 प्रमुख भारतीय शहरों में पूरे साल पीएम 10 का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक रहा। एटलस एक्यू के चार वर्ष के विश्लेषण से सामने आया है कि दिल्ली, पटना और लखनऊ सबसे अधिक प्रभावित शहरों की सूची में शीर्ष पर हैं, जहां पीएम 10 का वार्षिक स्तर 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक रहा, जबकि चेन्नई और बेंगलुरु ने 11 में से सबसे कम स्तर दर्ज किया। फिर भी यह राष्ट्रीय सुरक्षा सीमा से अधिक है।

    राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन

    रेस्पिरर लिविंग साइंसेस द्वारा अपने एटलस एक्यू प्लेटफॉर्म से प्राप्त रीयल-टाइम डेटा के आधार पर किए गए चार साल के वायु गुणवत्ता विश्लेषण से पता चलता है कि देश के सभी 11 प्रमुख महानगरीय शहरों ने 2021 से 2024 के बीच लगातार पीएम 10 प्रदूषण के लिए राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन किया। शहर-स्तरीय कार्य योजनाओं के बावजूद हर शहर में पीएम 10 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की अनुमेय सीमा से काफी ऊपर बना रहा।

    रिपोर्ट में दिखाया गया है कि उत्तर भारत के शहर, विशेष रूप से दिल्ली, पटना, लखनऊ और चंडीगढ़, सबसे अधिक वार्षिक पीएम 10 स्तरों के साथ सामने आए, जहां कुछ स्थानों पर यह 250 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी अधिक पहुंच गया।

    आनंद विहार स्टेशन पर पीएम 10 के स्तर में सुधार

    उदाहरण के लिए, दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन पर 2024 में पीएम 10 स्तर 313.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। हालांकि यह पूर्ववर्ती वर्षों की तुलना में थोड़ा सुधार दर्शाता है। पटना के समनपुरा क्षेत्र में यह स्तर 237.7 तक पहुंच गया, जबकि लखनऊ के लालबाग में अध्ययन अवधि के दौरान लगातार 160 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया।

    शहरी भारत उच्च स्तर के धूल प्रदूषण के चक्र में फंसा

    रेस्पिरर लिविंग साइंसेस के संस्थापक और सीईओ रोनाक सुटारिया के अनुसार, एटलस एक्यू के चार साल के आंकड़े बताते हैं कि शहरी भारत उच्च स्तर के कण प्रदूषण के खतरनाक चक्र में फंसा हुआ है। कहीं भी इसके लगातार कम होने के प्रमाण बहुत कम हैं। यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है, जिसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर कठोर और लागू किए जा सकने वाले समाधान आवश्यक हैं।

    दक्षिण और तटीय शहर में वायु गुणवत्ता बेहतर

    यहां तक कि दक्षिण और तटीय शहर, जैसे चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद, जिन्हें आमतौर पर बेहतर वायु गुणवत्ता वाला माना जाता है, वे भी राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में विफल रहे। हालांकि कोलकाता, मुंबई और हैदराबाद जैसे कुछ शहरों ने कुछ स्थानों पर मामूली सुधार दिखाया, लेकिन कोई भी शहर लगातार चार वर्षों तक मानकों पर खरा नहीं उतरा।

    पीएम 10 स्तरों में वृद्धि के प्रमुख कारणों में वाहन उत्सर्जन, अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां, कचरा जलाना, औद्योगिक संचालन, और विशेष रूप से उत्तर भारत में पराली जलाने और तापमान उलट जैसी मौसमी स्थितियां शामिल हैं।

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