Padma Awards 2025: कौन हैं भरत गुप्त? जिन्हें पद्म श्री पुरस्कार से किया जाएगा सम्मानित
पद्म श्री पुरस्कार 2025 से सम्मानित होने वाले भरत गुप्त भारतीय कला जगत का एक जाना-माना नाम हैं। नाट्यशास्त्र और शास्त्रीय ग्रीक रंगमंच के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ के रूप में पहचाने जाने वाले भरत गुप्त ने कला के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। उनके लेखन ने प्राचीन ग्रीक नाटक को पश्चिमी रंगमंच की उत्पत्ति के रूप में देखने की धारणा को बदल दिया है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के उपाध्यक्ष भरत गुप्त को इस वर्ष पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इसकी घोषणा की गई।
यह पुरस्कार उन्हें भारतीय कला क्षेत्र में थिएटर सिद्धांतकार, सितार, सुरबहार वादक, संगीत, सांस्कृतिक विश्लेषक को विशेष पहचान देने के लिए दिया जाएगा।
उनके लेखन ने प्राचीन ग्रीक नाटक को पश्चिमी रंगमंच की उत्पत्ति के रूप में देखने की धारणा को बदला है। वहीं, कला के क्षेत्र में ही विशेष योगदान देने वाले बैरी गाडफ्रे जान भी है। उन्हें भी पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
कहां के रहने वाले हैं भरत गुप्त?
यूपी मुरादाबाद के रहने वाले भरत गुप्त अभी दिल्ली में निवास करते है। वह कला के क्षेत्र में प्रसिद्ध नाट्यशास्त्र और शास्त्रीय ग्रीक रंगमंच पर एक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। कला क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है।
कई देशों के विश्वविद्यालयों में दे चुके हैं व्याख्यान
भरत गुप्त ने न केवल धर्मशास्त्रों सहित भारतीय शास्त्रीय संस्कृत ग्रंथों पर विस्तार से प्रकाश डाला है बल्कि आधुनिक पाठ्यक्रम में कला को शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। वह भारत और विदेशों में अब तक 35 से ज़्यादा सालों से उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ग्रीस के विश्वविद्यालयों में भारतीय संगीत और रंगमंच सिद्धांत पर व्यापक रूप से व्याख्यान दे चुके हैं। वहां इन विषयों पर पढ़ा चुके हैं।
वे ग्रीस में विजिटिंग प्रोफेसर थे और नाटक के लिए ओनासिस पुरस्कार की जूरी के सदस्य रहे हैं। भरत गुप्त वर्तमान में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ट्रस्टी व कार्यकारी सदस्य हैं।
वह भारत में कला के कई अन्य प्रमुख केंद्रों और अकादमियों में अध्यापन और व्याख्यान देते रहे हैं। इससे पहले वह दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे।
राष्ट्रीय सम्मान
फरवरी 2023 में भरत गुप्त को संगीतशास्त्र में उनके योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।
कला के जरिए समाज में बदलाव
भरत गुप्त का कहना है कि कला में वह जादू है, जो हर मन को छू सकता है और लोगों को एक साथ ला सकता है। पद्म पुरस्कार प्राप्त करना उनके लिए न केवल गर्व का विषय है, बल्कि यह उनके कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी देगा।
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