नई दिल्ली (जेएनएन)। देशभर में 1 अप्रैल 2017 से वाहनों के लिए भारत स्टेज इमिशन स्टैंडर्ड (बीएस)-4 लागू किए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद से एनवायरमेंट पोल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी (ईपीसीए) ने सख्त रुख अपना लिया है।

ईपीसीए ने इस संबंध में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों को साफ कर दिया है कि 1 अप्रैल 2017 से बीएस-4 मानक से इतर कोई भी वाहन पंजीकृत नहीं किया जाएगा। वहीं, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें इस मोर्चे पर उन वाहनों के स्तर पर राहत दी जाए जोकि 31 मार्च 2017 तक तैयार हो जाएंगे।

ईपीसीए के एक सदस्य ने बताया कि इस विषय में बुधवार को हुई बैठक में सीधे तौर पर इस बात पर जोर था कि बीएस-4 मानक को अप्रैल 2017 से और बीएस-6 मानक को अप्रैल 2019 से लागू करना है। इसके लिए ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अपनी तैयारी कर लें।

बैठक में सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स के प्रतिनिधियों की ओर से कहा गया कि वह अप्रैल 2017 से बीएस-4 मानक के आधार पर ही गाड़ियां बनाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले 31 मार्च 2017 तक बीएस-3 मानक के आधार पर बनी गाड़ियों को भी अप्रैल, 2017 के बाद पंजीकरण की राहत दी जाए।

इन प्रतिनिधियों का तर्क था कि यदि ऐसा नहीं होगा तो उन्हें भारी नुकसान होगा। इस पर ईपीसीए के अध्यक्ष भूरेलाल व अन्य सदस्यों का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश में स्पष्ट है कि 1 अप्रैल 2017 के बाद से कोई भी गाड़ी तभी पंजीकृत होगी, जब वह बीएस-4 मानक के तहत बनी होगी।

ऐसे में यदि कंपनियों को अपने नुकसान का डर सता रहा है तो वह पहले से ही बीएस-3 मानक वाली गाड़ियों का निर्माण बंद कर नए मानक का पालन करते हुए निर्माण कार्य शुरू कर दें। इससे पुराना स्टॉक अगले चार से पांच माह में मार्केट में खत्म किया जा सकता है।

यहां बता दें कि बीएस-4 मानक वाली गाड़ियों के लिए पेट्रोल उपलब्ध कराने के विषय में पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से साफ कर दिया गया है कि वे 1 अप्रैल 2017 से देशभर में सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।

दोपहिया वाहनों की कीमतों पर पड़ेगा असर

देशभर में दिल्ली सहित करीब 91 शहरों में बीएस-4 मानक के अनुरूप कारों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन ट्रक व दोपहिया वाहन इससे अछूते हैं। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर दोपहिया वाहनों की कीमत व इनके निर्माताओं पड़ेगा।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह तकनीक पहले से बेहतर है, इसलिए इसका कुछ महंगा होना लाजमी है। यही कारण है कि इंडस्ट्री के लोग नहीं चाहते हैं कि इसे अभी से निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

प्रदूषण में 80 फीसद तक होगी कमी

प्रदूषण को कम करने के स्तर पर देखें तो बीएस-3 के मुकाबले बीएस-4 मानक वाले वाहन के उपयोग से प्रदूषण में करीब 80 फीसद की कमी होती है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के रिसर्च एसोसिएट पोलाश मुखर्जी कहते हैं कि बीएस-3 और बीएस-4 मानक वाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण, जैसे सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पर्टिकुलेट मैटर में भारी अंतर रहता है।

उदाहरण के तौर पर बीएस -3 मानक के अनुरूप तैयार वाहन के मुकाबले बीएस-4 मानक के वाहन प्रति किलोमीटर 80 फीसद तक कम प्रदूषण पैदा करते हैं। एक अनुमान के अनुसार यदि एक बीएस-3 वाहन 350 पार्ट प्रति मिलियन (पीपीएम) तैयार करता है तो बीएस-4 में यह कम होकर 50 पीपीएम रह जाएगा।

क्या होता है बीएस-4 स्टैंडर्ड
भारत सरकार द्वारा बनाई गई एक संस्था Bharat stage emission standards, संक्षिप्त में बीएस कहा जाता है। ये संस्था वाहनों को प्रदूषण पैदा करने के अनुसार रैंक देती है, जो क्रमश: बीएस-2, बीएस-3, बीएस-4 और बीएस-5 होते हैं। जो वाहन सबसे कम प्रदुषण पैदा करता है उसका रैंक उतना ज्यादा होता है।

Posted By: JP Yadav

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