नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। अगले दस दिनों में प्याज की कीमतों में कमी आ सकती है। इसकी वजह यह है कि दस दिनों में राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में प्याज की नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी। मौजूदा समय में केवल राजस्थान से ही प्याज की आवक हो रही है। मांग के अनुरूप आवक कम होने से इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। बृहस्पतिवार को आजादपुर मंडी में बमुश्किल 200 टन प्याज भी नहीं पहुंच सका। इस कारण से प्याज की थोक कीमत में कोई गिरावट नहीं आई। मंडी में प्याज थोक में प्रति किलो न्यूनतम 30 रुपये तो अधिकतम 60 रुपये प्रतिकिलो तक बिका। इसका असर खुदरा बाजारों में भी दिखा, जहां प्याज 70 से लेकर 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिकते देखा गया। हालांकि छोटे प्याज की कीमतें कम रहीं।

आजादपुर मंडी के प्याज के आढ़तियों ने बताया कि नवंबर के पहले हफ्ते में ही प्याज का थोक मूल्य 60 से 80 के बीच हो गया था। इस कारण खुदरा बाजार में प्याज का दाम 100 रुपये प्रतिकिलो को भी पार कर गया था। बीच में आवक थोड़ी बढ़ी तो थोक कीमत नीचे उतर कर 50 रुपये तक हो गई थी। लेकिन महाराष्ट्र, कनार्टक आदि राज्यों में हुई बारिश के कारण आवक में कमी आ गई और मौजूदा समय में केवल राजस्थान से ही प्याज आ रहा है। ऐसे में मांग के अनुपात में आवक कम होने से कीमतों में तेजी बनी हुई है।

आजादपुर स्थित चौधरी हीरा सिंह सब्जी मंडी में प्याज के आढ़ती मोहम्मद रफीक ने बताया कि अब अन्य राज्यों में प्याज की नई फसल तैयार हो गई है। आगामी दस दिनों में मंडी में इसकी आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। इसके बाद ग्राहकों को राहत मिलने लगेगी। ग्राहकों को प्याज की कीमतों में गिरावट होने का बेसब्री से इंतजार है। आढ़ती मोहम्मद रफीक ने बताया कि प्याज की बारिश के कारण महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में प्याज की फसल खराब होने से अभी मांग के अनुरूप डेढ़ गुना कम आवक हो रही है।

इमरान हुसैन ने केंद्रीय मंत्री पासवान को लिखा पत्र

दिल्ली में बिक रहे महंगे प्याज को लेकर भी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है। प्याज के मुद्दे पर केजरीवाल सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में महंगे प्याज को लेकर इमरान हुसैन ने पासवान से पूछा है कि आखिर 60 रुपये किलो वाली प्याज सरकार खरीदे तो खरीदे कैसे? उन्होंने यह भी कहा कि नैफेड केंद्रीय भंडार के माध्यम से दिल्ली सरकार को प्याज मुहैया करा रहा है। अभी तक नैफेड प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (पीएसएफ) के तहत 15 रुपये 60 पैसे प्रतिकिलो की दर से दिल्ली सरकार को प्याज सप्लाई कर रहा था, जिसे दिल्ली सरकार 23 रुपये 90 पैसे की खुदरा दर पर दिल्ली की जनता को मुहैया करा रही थी। दिल्ली सरकार ने मोबाइल गाड़ियों के अलावा दिल्ली स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन (डीएससीएससी) और खाद्य और आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों को भी प्याज के वितरण के काम में लगाया है। इसके बावजूद एक समीक्षा बैठक में नैफेड ने बताया कि पीएसएफ के तहत मुहैया कराये जा रहे प्याज की सप्लाई रोक दी गई है। ऐसा केंद्र सरकार के कहने पर किया गया है।

नैफेड ने यह भी बताया कि वो दिल्ली सरकार को अलवर की मंडी से प्याज मुहैया करवा सकता है और इसके बाद मिस्न से आयात किए जाने वाले प्याज की खेप से भी दिल्ली में प्याज की आपूर्ति की जाएगी। हालांकि इस प्याज को मौजूदा खरीद रेट पर दिया जाएगा और इस पर ढुलाई लागत भी देनी होगी। प्याज यहां पहुंचने के पांच दिनों के बाद दिल्ली में 60 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध होगा। इमरान हुसैन ने कहा कि ये बहुत ऊंची दर है और अगर इस दर पर प्याज की आपूर्ति की गई तो ये दिल्ली की जनता की पहुंच के बाहर होगा। इसलिए इस मुद्दे की तुरंत समीक्षा कर भारत सरकार द्वारा पीएसएफ को फिर से लागू करने की जरूरत है। साथ ही नैफेड को भी प्याज फिर से 15 रुपये 60 पैसे प्रति किलो की दर से सप्लाई करने के निर्देश दिए जाएं ताकि दिल्ली की जनता इसे 23 रुपये 90 पैसे की दर पर आराम से खरीद सके।

Posted By: JP Yadav

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