पूर्व सीएम आतिशी और AAP विधायकों को विधानसभा का नोटिस, ये है पूरा मामला
दिल्ली विधानसभा ने आतिशी सहित आप विधायकों को सामान्य प्रयोजन समिति की बैठक की जानकारी सार्वजनिक करने पर नोटिस भेजा है। भाजपा ने विशेषाधिकार हनन की शिकायत की थी। आप ने सावित्रीबाई फुले का चित्र लगाने का प्रस्ताव रखा था जिसका भाजपा ने विरोध किया जबकि विधानसभा ने लिखित प्रस्ताव से इनकार किया। विधायकों को 30 मई तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा ने हाल ही में हुई सामान्य प्रयोजन समिति की बैठक में हुए विचार-विमर्श काे कथित तौर पर सार्वजनिक कर देने करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य विधायकों को नोटिस जारी किया है।
बृहस्पतिवार को जारी किए गए नोटिस भाजपा सदस्यों द्वारा अवमानना और विशेषाधिकार हनन की शिकायत के बाद आए हैं। बता दें कि बैठक के बाद विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि आप ने दावा किया था कि सामान्य प्रयोजन समिति की बैठक में शामिल उनके दाे विधायकों ने दिल्ली विधानसभा परिसर में माता सावित्रीबाई फूले का चित्र लगाए जाने का प्रस्ताव रखा था।
आप विधायकों ने आरोप लगाया था कि भाजपा सदस्यों ने प्रस्ताव पारित नहीं होने दिया। उधर विधानसभा के अधिकारियों ने कहा कि कोई लिखित प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया था, केवल मौखिक रूप से यह मुद्दा उठाया गया था।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को 22 मई को संबोधित एक शिकायत में उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, भाजपा के मुख्य सचेतक अभय वर्मा और पार्टी नेताओं राज कुमार भाटिया और तिलक राम गुप्ता ने आरोप लगाया कि आप सदस्यों ने सामान्य प्रयोजन समिति (जीपीसी) की बैठक में विचार-विमर्श के दौरान एक सुझाव दिया कि सावित्रीबाई फूले का चित्र भी स्थापित किया जा सकता है।
शिकायत में कहा गया है कि आप के सदस्यों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और एक प्रेस वार्ता में घोषणा की कि सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने उनके प्रस्ताव का विरोध किया था और माता सावित्रीबाई फूले का चित्र लगाने की अनुमति नहीं दी थी।
शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय ने विपक्ष की नेता आतिशी और आप विधायकों कुलदीप कुमार, वीर सिंह धिंगान और चौधरी जुबैर को नोटिस जारी कर 30 मई तक या उससे पहले शिकायत की विषय-वस्तु पर अपनी लिखित टिप्पणी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
भाजपा विधायकों ने शिकायत में दावा किया है कि समिति के विचार-विमर्श काे सार्वजनिक करने पर आप के विधायकों पर विशेषाधिकार हनन का गंभीर मुद्दा बनता है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार जब तक रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत नहीं की जाती या अध्यक्ष इसकी अनुमति नहीं देते, तब तक विचार-विमर्श काे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
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