नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। द्वारका सेक्टर-8 का इलाका ध्वनि प्रदूषण से कराह रहा है। डीपीसीसी (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति) के एंबिएंट नाइज मानीटरिंग स्टेशन के आंकड़ों के अनुसार द्वारका सेक्टर-8 में मानक से अधिक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया जा रहा है। यह स्थिति नियमित रूप से देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों की मानें तो इसके कई कारण हो सकते है, जिसमें सबसे प्रमुख कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आइजीआइ) एयरपोर्ट को माना जा सकता है। असल में सेक्टर-8 स्थित बागडोला गांव आइजीआइ एयरपोर्ट से सटा हुआ है और यहां से रोजाना करीब 600 से अधिक विमान गुजरते है। इसके कारण ध्वनि प्रदूषण स्वाभाविक है। इसके अलावा सड़कों पर वाहनों का दबाव, विकास कार्य, पेड़ों की कटाई व उनका ट्रांसप्लांटेशन, शाहबाद मोहम्मदपुर गांव से गुजरने वाली रेलवे लाइन, बागडोला बस डिपो को भी ध्वनि प्रदूषण का कारण माना जा सकता है।

हर घंटे होती है मानीटरिंग

राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान में डीपीसीसी का एंबिएंट नाइज मानीटरिंग स्टेशन बना हुआ है। यहां से हर घंटे ध्वनि प्रदूषण पर निगरानी रखी जाती है। आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में बीते एक हफ्ते में कई बार 68.6 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया है। रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक ही क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण मानक के अंतर्गत दर्ज किया जा रहा है। जबकि सुबह पांच बजे से रात 12 बजे के बीच में ध्वनि प्रदूषण गंभीर स्थिति में दर्ज किया जा रहा है।

क्या क्या है ध्वनि प्रदूषण को नापने का पैमाना

सामान्यतया 25 डेसीबल तक की ध्वनि को खामोशी, 26 से 65 डेसीबल तक की ध्वनि को शांत, 66 डेसीबल से ऊपर शोर और 75-80 डेसीबल से ऊपर अत्यधिक शोर कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 45 डेसीबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि मानव जीवन के लिए हानिकारक है।

नजफगढ़ में भी है स्टेशन

वर्ष 2017 में डीपीसीसी ने 26 स्थानों पर एंबिएंट नाइज मानीटरिंग स्टेशन को स्थापित किया था। दक्षिण-पश्चिम जिले की बात करें तो यहां द्वारका सेक्टर-8 के अलावा नजफगढ़ में खैरा डाबर स्थित चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक चरक संस्थान में यह स्टेशन बना गया था। चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक चरक संस्थान में बने स्टेशन से मिले आंकड़ों की मानें तो यहां ध्वनि प्रदूषण सहनीय स्थिति में है। रविवार को यहां रात 12 बजे से शाम चार बजे के बीच 47 से 54.9 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया है। अगर बीते एक हफ्ते में सोमवार से शनिवार के बीच में प्रदूषण स्तर की बात करें तो वहां 59.6 डेसीबल तक दर्ज किया गया है। स्थानीय लोगों की मानें तो खैरा डाबर में बने इस स्टेशन से नजफगढ़ में ध्वनि प्रदूषण की असल स्थिति का पता लगाना संभव नहीं है। डीपीसीसी को चाहिए कि वह नजफगढ़ के व्यस्त इलाकों में स्टेशन स्थापित करें, ताकि ध्वनि प्रदूषण की असल स्थिति सामने आए।

स्थिति असहनीय

वायु के साथ ध्वनि प्रदूषण की स्थिति असहनीय है। प्रशासन यह सुनिश्चित करें कि ध्वनि प्रदूषण को राेकने के लिए बने कानून का पालन हो। इसके अलावा बड़े पत्ते वाले पेड़ों को अधिक से अधिक से लगाएं जाएं। इसके साथ ही इस के तरह के स्टेशन के द्वारका के विभिन्न हिस्सों में लगे ताकि आंकड़ों के अनुरूप सुधार की दिशा में प्रयास हों।

डा. सुमित, पर्यावरणविद

सख्ती से काम करने की जरूरत

ध्वनि प्रदूषण पर विराम लगाने के लिए सरकार को अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करने खासा जरूरत है। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण के कारणों की पहचान कर उनके खिलाफ भी सख्ती से काम करना होगा।

दीवान सिंह, पर्यावरणविद

ध्वनि प्रदूषण से होती है कई परेशानियां

ध्वनि प्रदूषण के कारण चिड़चिड़ापन एवं आक्रामकता के अतिरिक्त उच्च रक्तचाप, तनाव, श्रवण शक्ति का ह्रास, नींद में व्यवधान और उत्पादकता में कमी जैसी समस्या हो सकती है।

डा. संदीप दहिया, चिकित्सक

Edited By: Prateek Kumar

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