नई दिल्ली (प्रेट्र)। नई दिल्ली के कनॉट प्लेस के साथ जम्मू-कश्मीर से पकड़े गए नौ लोगों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। पहले एजेंसी का आरोप था कि पुराने नोटों की शक्ल में जो 36 करोड़ रुपये इन लोगों के पास से बरामद किए गए, वह आतंकी फंडिंग के लिए ले जाए जा रहे थे। अब एजेंसी का कहना है कि इन लोगों का आतंकी गतिविधियों से लेना-देना नहीं है। एनआइए कोर्ट ने सभी को जमानत पर रिहा कर दिया है।

हालांकि कोर्ट इन सभी पर दूसरे आरोपों के तहत कार्रवाई करने का मन बना रही है। अदालत का विचार है कि स्पेसीफाइड बैंक नोट्स एक्ट 2017 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इसके सेक्शन पांच के तहत किसी भी व्यक्ति को बंद की करेंसी को रखने व तब्दील करने से रोका गया है।

अगर कोई इस आरोप में पकड़ा जाता है, तो सेक्शन सात के तहत उस पर दस हजार रुपये या फिर जो रकम पकड़ी गई उसका पांच गुना जुर्माना लगाया जा सकता है।

एनआइए ने कनाट प्लेस से सात लोगों को पकड़ा था। इनमें दिल्ली का प्रदीप, भगवान सिंह, विनोद श्रीधर शेट्टी, मुंबई का दीपक अमरोहा का एजाजुल हसन, नागपुर का जसविंदर सिंह, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का उमर मुश्तार डार, श्रीनगर का शाहनवाज मीर व अनंतनाग का माजिद युसूफ सोफी शामिल हैं।

एनआइए का कहना है कि इन लोगों का कहना है कि 36.34 करोड़ रुपये के पुराने नोट ये लोग तब्दील करने के लिए ले जा रहे थे। हालांकि ये लोग यह स्पष्ट नहीं कर सके कि नोटों को किस तरह से ये तब्दील करने वाले थे। लेकिन एजेंसी का कहना है कि इनका अपराध उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता, लिहाजा इन पर किसी और एक्ट के तहत कार्रवाई हो।

Posted By: JP Yadav

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