निजी अस्पताल में इलाज से जुड़ी पूर्व PFI अध्यक्ष अबूबकर की याचिका पर पेंच, NIA ने किया विरोध
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पीएफआई के पूर्व अध्यक्ष ई. अबूबकर की निजी अस्पताल में इलाज की मांग का विरोध किया। एनआईए ने कहा कि अबूबकर देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन से अबूबकर के स्वास्थ्य पर रिपोर्ट मांगी और सुनवाई 26 नवंबर तक स्थगित कर दी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति देने की मांग को लेकर प्रतिबंधित पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व अध्यक्ष ई अबूबकर द्वारा याचिका का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया है।
एनआईए ने याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि वह पहले से ही देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल में इलाज करा रहा है। एनआईए ने सवाल उठाया कि अबूबकर को आखिर इससे अधिक क्या सुविधा चाहिए।
एनआईए के तर्क को सुनने के बाद न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की पीठ ने आतंकवादी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार अबूबकर के स्वास्थ्य की स्थिति पर तिहाड़ जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
इलाज की अनुमति मांगी
अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन को नाेटिस जारी कर सुनवाई 26 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। अबूबकर ने याचिका दायर कर एक निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मांगी गई थी। अबूबकर का इस समय अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज चल रहा है।
अबूबकर को 2022 में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किया गया था। अबूबकर ने याचिका दायर कर तर्क दिया कि उसे एम्स में संतोषजनक इलाज नहीं मिल रहा है और कर्मचारियों का व्यवहार उसके प्रति शत्रुतापूर्ण है। इतना नहीं उसने कहा कि वह खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है।
यूएपीए ट्रिब्यूनल ने भी पुष्टि की
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी चिकित्सा आधार पर अबूबकर को जमानत देने से इन्कार कर दिया था। हाई कोर्ट ने 28 मई 2024 को अबूबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोप पत्र में लगाए गए आरोप और पेश की गई सामग्री से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि अबूबकर पूर्व में भी एक अन्य प्रतिबंधित संगठन सिमी से करीबी से जुड़ा था।
केंद्र सरकार ने पीएफआई को विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। प्रतिबंध की हाई कोर्ट द्वारा गठित किए गए यूएपीए ट्रिब्यूनल ने भी पुष्टि की थी।
यह भी पढ़ें- दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, वैवाहिक विवाद में व्यभिचार साबित करने के लिए मोबाइल लोकेशन डाटा मंगाना वैध
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।