नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा शहर में पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ में जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव को गोली मारने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मामले में एनएचआरसी ने यूपी सरकार को पीड़ित जिम ट्रेनर को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

मंगलवार को एनएचआरसी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिम ट्रेनर को मुआवजा देने के आदेश की जानकारी मीडिया को दी है। मामले में एनएचआरसी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को छह सप्ताह के भीतर केस की प्रगति रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही उन्हें जिम ट्रेनर को मुआजवा देने का साक्ष्य भी आयोग में प्रस्तुत करना होगा।

फर्जी मुठभेड़ की ये वारदात तीन फरवरी 2018 की रात सेक्टर-122 में हुई थी। नोएडा के पर्थला खंजरपुर गांव निवासी जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव (25) को 3 फरवरी को प्रशिक्षु दरोगा विजय दर्शन ने गोली मारी थी। दरोगा विजय दर्शन के साथ मौके पर और भी पुलिसकर्मी मौजूद थे। 5 फरवरी को मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया कवरेज के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया था। जितेंद्र पर्थला गांव में ही जिम चलाता था।

जितेंद्र 3 फरवरी 2018 की रात अपनी चचेरी बहन मोना का लगन लेकर गाजियाबाद से अपने गांव स्कॉर्पियो से लौट रहा था। इनके साथ स्कॉर्पियो में जितेन्द्र के बड़े भाई धर्मेन्द्र, दोस्त गौतम सरदार, सुनील, तरूण व हरे राम भी मौजूद थे। भाई को घर छोड़ने के बाद जितेंद्र दोस्तों को छोड़ने के लिए सेक्टर-122 गया था।

इसी दौरान लाल रंग की ब्रीजा गाड़ी में सवार प्रशिक्षु दरोगा विजय दर्शन व पंकज सिंह और सिपाही संजय व नरेन्द्र ने इनकी चेकिंग शुरू कर दी थी। आरोप है कि इसी दौरान दरोगा विजय दर्शन ने जितेंद्र को गोली मार दी थी। आरोप है कि दरोगा ने प्रमोशम पाने के लिए उसे गोली मारी थी। वारदात के बाद अधिकारियों के आदेश पर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर लिया गया था। आरोपी दरोगा विजय दर्शन मामले में जेल में बंद है।

अब भी बिस्तर पर पड़ा है जितेंद्र

दरोगा विजय दर्शन की गोली से घायल हुआ जिम ट्रेनर जितेंद्र आठ महीने बाद भी बिस्तर पर पड़ा हुआ है। गोली उसकी गर्दन से होते हुए रीढ़ की हड्डी में जाकर लग गई थी। इस वजह से वह चलने फिरने की स्थिति में नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार जितेंद्र के दोबारा सही से चलने की उम्मीद काफी कम है। हालांकि उसे व्यायाम और फिजियोथैरेपी कराई जा रही है।

बहन की शादी में नहीं हो पाया था शामिल

जितेंद्र को जिस दिन गोली लगी थी, उसके दो दिन बाद ही उसकी बहन की शादी थी। जितेंद्र की हालत उस वक्त काफी गंभीर थी। बहन की जिस वक्त शादी हो रही थी, वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। जितेंद्र के साथ उसके परिवार के कुछ और सदस्य शादी में शामिल नहीं हो सके थे।

Posted By: Amit Singh

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