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    Delhi News: फर्जी मुठभेड़ मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को एनएचआरसी का नोटिस, ये है पूरा मामला

    Updated: Thu, 06 Jun 2024 08:44 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का नोटिस मिला है। दरअसल 16 मई की रात दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस ने रोहिणी में गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ गिरोह के बदमाश अजय को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। भाऊ और उसके सहयोगियों ने इंटरनेट मीडिया हैंडल के जरिए मुठभेड़ को फर्जी मुठभेड़ बताया था।

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    Delhi News: फर्जी मुठभेड़ मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को एनएचआरसी का नोटिस। फाइल फोटो

    राकेश, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल (Delhi Police Special Cell) की काउंटर इंटेलिजेंस के लिए कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 16 मई की रात को 'फर्जी मुठभेड़' में मारे गए 24 वर्षीय अजय नामक व्यक्ति की मौत के मामले में स्पेशल सेल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और दस्तावेज के साथ विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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    दिल्ली पुलिस को छह सप्ताह दिया गया समय

    दिल्ली पुलिस को छह सप्ताह के अंदर आयोग को दस्तावेज सौंपने को कहा गया है। आयोग ने पुलिस उपायुक्त (बाहरी-उत्तरी) और जिला मजिस्ट्रेट (उत्तर-पश्चिम) को भी नोटिस जारी किया है, जो मामले की अपनी-अपनी जांच कर रहे हैं। यह मामला तब विवादास्पद हो गई, जब आरोप लगाया गया कि अजय को राजस्थान के माउंट आबू से स्पेशल सेल की 'काउंटर इन्वेस्टिगेशन यूनिट' (सीआईयू) के पुलिसकर्मियों ने मुठभेड़ में मार गिराने से तीन दिन पहले अगवा किया था।

    स्पेशल सेल का दावा आत्मरक्षा में चलाई गोली 

    उसके बाद उसे उत्तर-पश्चिम दिल्ली में एक सुनसान जगह पर लाया गया। वहां उसे पहले शराब पिलाई गई और फिर उसे गोली मार दी गई। हालांकि स्पेशल सेल के अधिकारी ने इस तरह के आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि मुठभेड़ वास्तविक थी और उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी।

    'फर्जी मुठभेड़' में मारे गए 24 वर्षीय अजय की फाइल फोटो

    एनएचआरसी ने मांगें ये सभी दस्तावेज

    सूत्रों ने बताया कि आयोग ने मुठभेड़ से पहले और बाद में पुलिसकर्मियों के आने-जाने के समय की सामान्य डायरी प्रविष्टि जैसे विवरण मांगे हैं। उन्होंने मुठभेड़ में कथित रूप से घायल हुए कर्मियों का चिकित्सा-कानूनी प्रमाण पत्र भी मांगा है। वाहनों का जीपीएस डाटा भी मांगा है। एक अधिकारी ने बताया कि एनएचआरसी ने घटनास्थल का साइट प्लान, मुठभेड़ के दौरान पुलिसकर्मियों और मृतक की स्थिति और पोस्टमार्टम तथा जांच रिपोर्ट मांगी है।

    पुलिस को पोस्टमार्टम की रिकॉर्डिंग जमा करनी होगी। एनएचआरसी मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट भी चाहता है। अजय के परिवार के बयानों के अलावा, पुलिस को अजय के रिश्तेदार द्वारा फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाने वाली शिकायत पर आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट भी देनी होगी। एनएचआरसी ने स्वतंत्र गवाहों के विवरण और बयान तथा जांच की स्थिति मांगी है।

    अजय हरियाणा के रोहतक के रिटोली गांव का रहने वाला था। बताया जाता है कि वह गैंगस्टर हिमांशु उर्फ ​​भाऊ रिटोलिया का पड़ोसी था। पुलिस ने दावा किया है कि वह हरियाणा में एक हत्या के अलावा पश्चिमी दिल्ली में सेकेंड हैंड कार डीलर की दुकान पर गोलीबारी की घटना में भी शामिल था। भाऊ और उसके साथियों ने इंटरनेट मीडिया हैंडल के जरिए एक बयान जारी किया था और आरोप लगाया था कि अजय की हत्या फर्जी मुठभेड़ दिखाकर की गई।

    यह मुठभेड़ रोहिणी के सेक्टर 29 में एक सुनसान जगह पर 'काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट' द्वारा की गई थी जिसमें अतिरिक्त डीसीपी मनीषी चंद्रा, एसीपी राहुल विक्रम, इंस्पेक्टर निशांत दहिया और अन्य शामिल थे। मुठभेड़ के बाद विशेष आयुक्त आर पी उपाध्याय भी मौके पर गए थे। पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा जांच की निगरानी कर रहे हैं।

    मौके पर एक होंडा सिटी कार मिली थी जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर T012UP 2024C है, जो अजय की मानी जा रही है। पुलिस की स्कॉर्पियो एसयूवी क्षतिग्रस्त पाई गई, जिसके सामने की विंडशील्ड पर गोलियों के निशान और साइड विंडो का कांच टूटा हुआ था। पुलिस को घटनास्थल पर 15 खाली कारतूस के खोल और एक 9 एमएम की पिस्टल मिली थी।

    आईपीएस की तैनाती के बाद से सेल का अस्तित्व हो रहा कमजोर

    पिछले कुछ सालों से दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सेल की उल्टी गिनती पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना के समय से शुरू हो गई, जब इन्होंने क्राइम ब्रांच की तरह सेल का भी विस्तार कर कई ब्रांच बना दिया और इस यूनिट में आईपीएस की तैनाती कर दी। शुरू से इस यूनिट में दानिप्स की तैनाती इसलिए की जाती थीं क्योंकि उन्हें लंबे समय तक इस यूनिट में रखा जाता था। उनके विशाल नेटवर्क होते थे। आईपीएस की तैनाती किए जाने से सेल अपना अस्तित्व खोते जा रही है।

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