दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लॉन्च हो रही दो नई योजनाएं, हाइजीन प्रोग्राम और हर्बल गार्डन इनिशिएटिव का ये है उद्देश्य
शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सत्र 2025-26 के लिए स्कूल हाइजीन प्रोग्राम और हर्बल गार्डन पहल को मंजूरी दी है। जागरण पहल द्वारा संचालित हाइजीन प्रोग्राम का उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वहीं हर्बल गार्डन पहल के तहत औषधीय पौधों के महत्व को समझाया जाएगा। दोनों ही कार्यक्रम निशुल्क रहेंगे।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए स्कूल हाइजीन प्रोग्राम को सरकारी स्कूलों में शुरू करने की अनुमति दे दी है।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व स्वयं सेवी संस्था जागरण पहल द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली बच्चों में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि वे बेहतर स्वास्थ्य के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
इस योजना के लिए स्कूलों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और न ही शिक्षा निदेशालय कोई आर्थिक सहायता देगा।
निदेशालय ने किया स्पष्ट प्रभावित न हो शैक्षणिक कार्य
निदेशालय ने संस्था को स्पष्ट किया कि इस दौरान स्कूल का शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं हो और छात्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। किसी भी प्रकार का प्रचार, विज्ञापन, लोगो या ब्रांडिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
केवल उन्हीं प्रशिक्षकों को स्कूलों में अनुमति दी जाएगी, जिनकी योग्यता से प्रधानाचार्य संतुष्ट हों।
संस्था उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली के उप शिक्षा निदेशकों से समन्वय कर संबंधित स्कूलों का आवंटन प्राप्त करेंगे।
सरकारी स्कूलों में अब हर्बल गार्डन की पहल
शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए स्कूलों में एक नई हरित पहल को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत नारी जागृति की ओर एक गैर-सरकारी संस्था को सरकारी स्कूलों में स्कूल हर्बल गार्डन को बढ़ावा देने की अनुमति दी गई है।
इसके तहत पर्यावरणीय जागरूकता के साथ-साथ औषधीय पौधों के महत्व को समझाने पर जोर दिया गया है। यह पहल पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।
ना तो छात्रों से कोई शुल्क लिया जाएगा और ना ही शिक्षा निदेशालय द्वारा कोई वित्तीय सहायता दी जाएगी। कार्यक्रम शिक्षकों की निगरानी में ही संचालित होंगे।
नारी जागृति की ओर संस्था को पश्चिम ए दिल्ली के तहत आने वाले 10 सरकारी स्कूलों में यह कार्यक्रम संचालित करने की अनुमति दी गई है।
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