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    पीछे के दरवाजे से राजधानी में बिजली महंगी करने की तैयारी, डीईआरसी पर डिस्काॅम को लाभ पहुंचाने का आरोप

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 09:25 PM (IST)

    दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों को पीपीएसी वसूलने का अधिकार देने का विरोध हो रहा है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा। डीईआरसी में चेयरमैन का पद खाली होने से भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि डिस्काम को मनमानी करने की छूट दी जा रही है और उपभोक्ताओं को राहत देने की बजाय बिजली कंपनियों का पक्ष लिया जा रहा है।

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    बिजली कंपनियों को पीपीएसी निर्धारित करने के अधिकार देने का विरोध।

    संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काॅम) को बिजली खरीद समायोजन शुल्क (पीपीएसी) वसूलने का अधिकार दिए जाने की तैयारी है। इसके लिए दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसका विरोध शुरू हो गया है।

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    रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कदम से डिस्काॅम की मनमानी बढ़ेगी। पहले से ही उपभोक्ताओं से कई तरह के अधिभार वसूले जा रहे हैं। विनियामक संपत्ति वसूलने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से भी उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ने वाला है।

    डीईआरसी में चेयरमैन पद खाली होने की स्थिति में उपभोक्ताओं पर असर डालने वाले नोटिफिकेशन पर भी प्रश्न उठाया जा रहा है। डीईआरसी चेयरमैन का पद पिछले लगभग दो माह से रिक्त है। अभी तक दो स्थायी सदस्यों की भी नियुक्ति नहीं हुई है।

    इस समय दो अस्थायी सदस्य के सहारे आयोग चल रहा है। वहीं, पिछले चार वर्षों से आयोग टैरिफ घोषित नहीं कर सका है। नियम अनुसार वित्त वर्ष शुरू होने से पहले बिजली टैरिफ की घोषणा होनी चाहिए। लेकिन, दिल्ली में वर्ष 2021-22 के बाद टैरिफ की घोषणा नहीं हुई है।

    पीपीएसी के माध्यम से बिजली महंगी की जा रही है। इसे लेकर विवाद भी होता रहा है। पिछले वर्ष पीपीएसी बढ़ने पर भाजपा ने तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। भाजपा के सत्ता में आने के बाद भी डिस्काॅम को पीपीएसी वसूलने की अनुमति दी जा रही है।

    ईंधन की लागत बढ़ने पर बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काॅम) को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। बिजली खरीद व उपभोक्ताओं को निर्धारित दर बिजली आपूर्ति में होने वाले घाटे की भरपाई के लिए डिस्काम पीपीएसी वसूलती है।

    डिस्काॅम के आवेदन पर डीईआरसी एक तिमाही के लिए पीपीएसी का निर्धारण करता है। अब डिस्काॅम को प्रत्येक माह 10 प्रतिशत तक अपने स्तर पर पीपीएसी निर्धारित कर उपभोक्ताओं से वसूलने का अधिकार मिल जाएगा। इसमें ट्रांसमिशन शुल्क भी शामिल किया गया है।

    डीईआरसी के इस प्रस्ताव पर उपभोक्ता व अन्य हित धारक 24 सितंबर तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, लेकिन इसके पहले ही विरोध शुरू हो गया है।

    डिस्काॅम के खातों की जांच कराने की मांग

    आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों कहना है कि पिछले कई वर्षों से डिस्काॅम के खातों की जांच कराने की मांग की जा रही है, उस पर ध्यान नहीं दिया गया। दिल्ली सरकार और डीईआरसी की लापरवाही से डिस्काॅम को सुप्रीम कोर्ट से विनियामक संपत्ति वसूलने की अनुमति मिल गई है।

    उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है 27000 करोड़ का बोझ

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली में तीनों निजी बिजली वितरण कंपनियां बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस राजधानी यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) को कुल 27200.37 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का भुगतान अधिकतम चार वर्ष में सभी बकाया का भुगतान हो जाना चाहिए।

    इससे दिल्ली में बिजली महंगी हो सकती है, क्योंकि विनियामक संपत्ति उपभोक्ताओं से वसूला जाता है। इस समय उपभोक्ताओं से बिजली बिल पर आठ प्रतिशत नियामक अधिभार वसूला जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने पर इसमें और वृद्धि होगी। उपभोक्ताओं को बिजली बिल पर स्थायी शुल्क, पेंशन अधिभार भी देना पड़ता है।

    दिल्ली में बिजली उपभोक्ता

    • बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली)  - 30.5 लाख
    • बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (पूर्वी व मध्य दिल्ली) - 20 लाख
    • टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (उत्तरी दिल्ली) - 19 लाख
    • नई दिल्ली नगर पालिका परिषद - 54 हजार

    घरेलू उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली

    • पेंशन अधिभारः बिजली बिल पर 3.70 प्रतिशत
    • विनियामक संपत्ति अधिभारः बिजली बिल पर 8 प्रतिशत
    • स्थायी शुल्कः प्रति किलोवाट 20 रुपये से लेकर 250 रुपये तक

    उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा स्थायी शुल्क

    घरेलू उपभोक्ता की श्रेणी और स्थायी शुल्क (प्रति किलोवाट प्रति माह)

    • 2 किलोवाट तक -  20 रुपये
    • 2 किलोवाट से अधिक व 5 किलोवाट से कम तक - 50 रुपये
    • 5 किलोवाट से 15 किलोवाट से कम तक - 100 रुपये
    • 15 किलोवाट से 25 किलोवाट से कम तक - 200 रुपये
    • 25 किलोवाट से अधिक - 250रुपये

    उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा पीपीएएसी

    बीआरपीएल - 6.19 प्रतिशत

    बीवाईपीएल - 6.19 प्रतिशत

    टीपीडीडीएल - 7.36 प्रतिशत

    डीईआरसी टैरिफ तय करने की अपनी जिम्मेदारी से भागने साथ ही डिस्काॅम को मनमानी करने का छूट दे रहा है। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन नियम का उल्लंघन है, क्योंकि पीपीएसी में सिर्फ कोयले व गैस संयंत्रों को शामिल किया जा सकता है। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में ट्रांसमिशन की लागत को शामिल किया गया है।

    -सौरभ गांधी (यूनाइटेड रेजिडेंट ऑफ दिल्ली के महासचिव)

    मुजरिम भी आप, थानेदार भी आप और जज भी आप जैसा यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है। इससे डिस्काम पर कोई अंकुश नहीं रहेगा। डीईआरसी सिर्फ डिस्काॅम को लाभ पहुंचा रहा है। डिस्काॅम के खातों की जांच को लेकर न तो डीईआरसी और न सरकार कोई आदेश दे रही है।

    -संजय गुप्ता (माडल टाउन रेजिडेंट्स सोसायटी के अध्यक्ष)

    डीईआरसी चेयरमैन के बिना चल रहा है। दो अन्य सदस्य भी अस्थायी हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं पर बोझ डालने वाला यह निर्णय अनुचित है। डिस्काॅम के खातों की जांच होनी चाहिए।

    -अशोक भसीन (नार्थ दिल्ली रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के अध्यक्ष)

    डीईआरसी के इस कदम से डिस्काॅम की मनमानी बढ़ेगी। उपभोक्ताओं पर विनियामक संपत्ति का बोझ पड़ने वाला है। ऐसे में पीपीएसी लगाना अनुचित है। इसे वापस लिया जाना चाहिए।

    - वीएस वोहरा (ईस्ट दिल्ली आरडब्ल्यूए ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष)

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