आईएफएसओ के अलग यूनिट बनने पर साइबर अपराध सुलझाने में मिलेगी मदद, यूनिट कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है जिससे साइबर अपराधों की जांच प्रभावित हो रही है। नोडल एजेंसी होने के कारण इस यूनिट पर केंद्र व राज्य सरकार से जुड़े मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी भी है। कर्मचारियों की कमी के कारण जांच अधिकारी तेजी से मामलों की जांच नहीं कर पाते हैं।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 50 लाख से अधिक के साइबर अपराध पर त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों को जल्द पकड़ने और पीड़ितों से ठगे गए पैसे बरामद कर उन्हें वापस दिलाने के मकसद से कुछ साल पहले खोले गए इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक आपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है।
यह यूनिट नोडल एजेंसी भी है, इस यूनिट के पास केंद्र व राज्य सरकार सरकार के अलावा मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों के मामले जैसे हैकिंग, डीप फेक वीडियो, इंटरनेट मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट आदि मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी भी रहती है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी से इस यूनिट के सभी काम प्रभावित हो रहे हैं। अगर आईएफएसओ की अलग यूनिट बनती है, तो साइबर अपराध सुलझाने में काफी मदद मिलेगी।
करीब 300 पुलिसकर्मियों को आईएफएसओ को दिए गए
आईएफएसओ के एक अधिकारी का कहना है कि यह यूनिट स्पेशल सेल के अंतर्गत आती है। इसलिए स्पेशल सेल में विभिन्न रैंकों के जितने पुलिसकर्मियों के पद स्वीकृत हैं उसी में से करीब 300 पुलिसकर्मियों को आईएफएसओ को दिए गए हैं। इनमें 100 पुलिसकर्मियों की तैनाती साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के कंट्रोल रूम में हाेती है। बाकी बचे 200 कर्मी आईएफएसओ में तैनात हैं।
सेल की क्षमता भी कम हो गई
साइबर अपराध के मामले में इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर ही जांच अधिकारी होते हैं। इस यूनिट में पांच एसीपी, 20 इंस्पेक्टर व 24 सब इंस्पेक्टर हैं। 24 सब इंस्पेक्टर में भी कई रैंकर हैं जिनसे बेहतर तफ्तीश संभव नहीं है। इस यूनिट के बनाने पर स्पेशल सेल में भी कर्मचारियों की कमी पड़ गई क्योंकि 300 कर्मचारी बंट गए। इससे सेल की क्षमता भी कम हो गई।
इस यूनिट के नाम पर कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए जाएंगे
अधिकारी का कहना है साइबर अपराध के मामले साइबर सेल थाने में ही दर्ज होते हैं। आईएफएसओ को अलग स्वतंत्र यूनिट बनाने से इस यूनिट के नाम पर कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए जाएंगे, इससे क्षमता बढेगी, इसके थाने व कोर्ट भी अलग किए जाने की आवश्यकता है। इस यूनिट में हर दिन निवेश और डिजिटल अरेस्ट के नाम व अन्य तरह के 50 लाख से अधिक की ठगी के 10 केस से अधिक दर्ज होते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी के कारण जांच अधिकारी तेजी से किसी केस की जांच नहीं कर पाते हैं। जिस
हिसाब से हर दिन केस दर्ज हो रहे हैं वर्तमान क्षमता के मुताबिक कम से कम चार गुणा अधिक पुलिसकर्मियों की जरूरत है। क्षमता बढ़ाने के लिए कई बार पुलिस मुख्यालय को पत्र भेज अनुरोध किया गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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