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    दिल्ली से डराने वाला मौतों का आंकड़ा, एक साल में 13 घटनाओं में इतने लोगों की गई जान

    दिल्ली में जर्जर इमारतों की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं जिनमें कई लोगों की जान जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है। दिल्ली के 55 लाख भवनों में से 44 लाख भवनों में राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) के नियमों का पालन नहीं किया गया है। पिछले चार वर्षों में भवन गिरने की 1323 घटनाओं में 137 लोगों की मौत हो गई।

    By Anoop kumar singh Edited By: Kapil Kumar Updated: Fri, 29 Aug 2025 09:47 AM (IST)
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    दिल्ली में इस वर्ष अब तक भवन गिरने की 13 घटनाओं में 44 मरे। जागरण

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को पट्टेशाह दरगाह के कमरे की छत-दीवार गिरने से छह की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हुए। दिल्ली के मुस्तफाबाद में 11 अप्रैल को चार मंजिला इमारत गिरने से 11 लोग मारे गए, 13 घायल हो गए।

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    वहीं, नौ अगस्त को जैतपुर हरिनगर मंदिर के पास दीवार गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रीय राजधानी में जरा सी बरसात या आंधी में इमारत-भवनों, उनके हिस्सों का गिरना अनायास नहीं है, भवन निर्माण में जीवन सुरक्षा मानकों का पालन न करना इसका प्रमुख कारण है।

    दिल्ली के 55 लाख भवन (वर्ष 2011 की जनगणना 33 लाख घर के अनुमान पर) में से 44 लाख भवनों में राष्ट्रीय भवन संहिता (नेशनल बिल्डिंग कोड, एनबीसी) 2016 जीवन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया है। शायद यही कारण है कि इन घटनाओं से चिंतित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 20 अगस्त को दरियागंज में निर्माणाधीन भवन का छज्जा गिरने से हुई बिहार निवासी तीन श्रमिकों की मौत का स्वत: संज्ञान ले दिल्ली के मुख्य सचिव, आयुक्त नगर निगम दिल्ली और पुलिस उपायुक्त (मध्य क्षेत्र) दिल्ली को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

    दिल्ली में पिछले चार वर्षों में भवन गिरने की 1,323 की घटनाओं में 137 लोगों की मौत हो गई जबकि 873 घायल हुए। इस वर्ष अब तक भवन गिरने की 13 प्रमुख घटनाओं में कुल 44 लोग मारे गए, 119 लोग घायल हुए। इस मामले में पुरानी दिल्ली, शाहदरा सहित दिल्ली से जुड़े बाहरी इलाकों सर्वाधिक संवेदनशील माना गया हैं।

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    दिल्ली के भूकंपीय जोन-चार में होने से यह स्थिति खतरनाक हो जाती है। पुराने व नए निर्माण डक्टाइल डिटेलिंग, रेट्रोफिटिंग का अभाव, अपर्याप्त नींव, दीवार व स्लैब निर्माण में अधोमानक सामग्री का इस्तेमाल, कमजोर कालम-बीम जाइंट्स, अनाधिकृत अतिरिक्त मंजिलें, मजबूत नींव का अभाव और भूकंप-प्रतिरोधी डिजाइन की कमी को एनबीसी ने खतरनाक माना है।

    जोन-वार भवनों की संख्या (लाख में)

    -एमसीडी 52.5, एनडीएमसी : 2.5

    साउथ जोन: 9.5

    वेस्ट जोन: 8.5

    सेंट्रल जोन: 4.5

    ईस्ट जोन (ट्रांस-यमुना) : 7.5

    नार्थ जोन: 10.5

    नजफगढ़/नरेला: 7

    करोल बाग/सिटी : 5

    प्रमुख घटनाएं

    12 जुलाई 2025 : वेलकम क्षेत्र में चार मंजिला इमारत ढहने से छह की मौत।

    11 जुलाई 2025 : आजाद मार्केट में तीन मंजिला इमारत गिरने से एक की मौत।

    नौ जून 2025 : नांगलोई में दो मंजिला इमारत गिरने से आठ वर्षीय बच्चे की मौत।

    17 मई 2025 : पहाड़गंज में निर्माणाधीन इमारत ढहने से दो की मौत।

    11अप्रैल 2025 : मधु विहार में दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत।

    28 जनवरी 2025 : बुराड़ी में चार मंजिला इमारत गिरने से पांच की मौत।

    ''दिल्ली के करीब 55 लाख भवन में से 20 प्रतिशत के करीब भवन ही एनबीसी मानकों का पालन कर बनें हैं, बाकी के 80 प्रतिशत के भवनों के निर्माण में इनका अनुपालन नहीं किया गया है। इतना ही नहीं आवश्यक तकनीकी संसाधनों के अभाव में भवनों का सर्वेक्षण और खतरनाक इमारतों का निरीक्षण संभव ही नहीं हो पाता। नतीजतन, भवन गिरने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।'' - अरुण कुमार, अधीक्षण अभियंता (अवकाश प्राप्त), नगर निगम दिल्ली