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    दिल्ली में वन विभाग को मिलेगा रिज क्षेत्र का पहला वर्किंग प्लान, वन अनुसंधान संस्थान ने शुरू किया काम

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 06:00 AM (IST)

    दिल्ली सरकार रिज क्षेत्र के संरक्षण और विकास के लिए एक कार्ययोजना बना रही है। देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) इसमें मदद कर रहा है। इस योजना में विलायती कीकर को हटाकर स्वदेशी प्रजातियों को लगाने पर ध्यान दिया जाएगा। रिज क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराने और पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने का भी लक्ष्य है।

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    उत्तरी रिज क्षेत्र में फैला विलायती कीकर। जागरण

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में विलायती कीकर को वृक्ष की श्रेणी से हटाने की तैयारियों के बीच वन विभाग को रिज क्षेत्र का पहला वर्किंग प्लान भी जल्द मिलेगा।

    यह प्लान विभाग के लिए रिज क्षेत्र की कार्ययोजना भी होगा व मैनुअल भी। इसी के आधार पर रिज क्षेत्र को अतिक्रमण एवं विलायती कीकर से मुक्त करके स्वदेशी प्रजाति के पेड़ पौधों की पुनर्स्थापना की जाएगी।

    दिल्ली में रिज क्षेत्र चार हिस्सों में बंटा हुआ है, जिसमें उत्तरी रिज, मध्य रिज, दक्षिण-मध्य रिज और दक्षिणी रिज हैं। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 7,777 से 7,784 हेक्टेयर है।

    समस्या क्या है कि अति महत्वपूर्ण होते हुए भी इसकी अभी तक उपेक्षा ही होती रही है। यही कारण है कि जहां तहां रिज क्षेत्र अतिक्रमण का शिकार है।

    वहीं ब्रिटिशकाल से इसके एक बड़े हिस्से पर विलायती कीकर ने जड़ें जमा रखी हैं। कहीं कहीं रिज की जमीन पर विभिन्न विभागों के बीच स्वामित्व विवाद भी सुनने में आता रहता है।

    ऐसे में रिज क्षेत्र के संरक्षण और उसकी बेहतरी के लिए ही दिल्ली सरकार ने देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की सहायता ली है।

    एफआरआई की टीम ने रिज क्षेत्र के वर्किंग प्लान पर काम भी शुरू कर दिया है। इस प्लान में रिज क्षेत्र का तमाम पहलुओं से आंकलन करके उसके संरक्षण और बेहतरी के लिए कार्ययोजना तैयार की की जाएगी।

    दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने बताया कि रिज क्षेत्र के वर्किंग प्लान में विलायती कीकर के प्रबंधन सहित वहां पर स्थानीय प्रजातियों की पुनर्स्थापना कर अरावली पर्वत शृंखला के विघटित पारिस्थितिकी तंत्र की वापसी कैसे हो।

    इस लेकर भी विस्तार से उपयोगी तकनीक व दिशा-निर्देश की जानकारी रहेगी। सरकार के इस प्रयास से राजधानी में वायु गुणवत्ता एवं भूजल संरक्षण की दिशा में भी बढ़ावा मिलेगा।

    बताया जाता है कि इस वर्किंग प्लान का ड्राफ्ट फाइनल हो जाने के बाद दिल्ली सरकार इसे अनुमोदन के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भी भेजेगी। वहां से हरी झंडी मिल जाने पर इस प्लान पर क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा।

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    किस रिज क्षेत्र में कितनी जमीन

    • उत्तरी रिज - 87 हेक्टेयर
    • मध्य रिज - 864 हेक्टेयर
    • दक्षिण-मध्य रिज - 626 हेक्टेयर
    • दक्षिणी रिज - 6,200 हेक्टेयर

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