किसी दूसरे का अनुसरण करने की जगह भारत को भारत बनकर ही रहना होगा : मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को द्वापर युग आधारित काफी टेबल बुक कनेक्टिंग विद द महाभारत का विमोचन किया। तकरीबन 300 पेज की इस पुस्तक के जरिए महाभारत काल के इतिहास भौगोलिक स्थिति पुरातत्व संस्कृति व कला पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि विकास के लिए भारत को किसी दूसरे देश का अनुसरण करने की बजाए 'भारत' बनकर ही रहना होगा। अगर हम चीन, रूस व अमेरिका बनने का प्रयास करेंगे, तो वह नकल करना होगा। ऐसा करने पर लोग तमाशा देखने जरूर आएंगे, लेकिन वह भारत का विकास नहीं होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास तथा उसके धन व रण गौरव को निरंतर गलत बताने वाले लोगों पर विश्वास करना गलती थी और विकास के दीर्घकालिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए भूगोल की जानकारी व इतिहास पर गर्व करना जरूरी है। वह इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में काफी टेबल बुक ‘कनेक्टिंग विद द महाभारत’ के विमोचन अवसर को संबोधित कर रहे थे।
देश के इतिहास को भुलाने का हुआ प्रयास
सरसंघचालक ने कहा कि कुछ लोगों ने प्रयत्न किए कि हम अपने देश और अपने इतिहास को भूल जाएं। वे हमें बता रहे थे कि हमारे इतिहास में कुछ नहीं है, कोई धन, रण गौरव नहीं है। वे हमारे ग्रंथों को गलत और पूर्वजों को मुर्ख बता रहे थे। ऐसे लोग इस तरह की बातें इसलिए कह रहे थे क्योंकि उन्हें स्वार्थ साधना था। उन्होंने महाभारत व रामायण को काव्य -कहानी बताया, लेकिन यह समझना जरूरी है कि क्या कोई कल्पना इतनी लंबी चलती है?
धर्म पर रहिए कायम... सुख और दुख आते जाते रहते हैं
भागवत ने कहा कि वेद व्यास को सिंहासन की आस नहीं थी और वे एक ऋषि थे, ऐसे में महाभारत में व्यास गलत क्यों बोलेंगे? उन्होंने कहा कि सुख और दुख आने जाने वाली बात है और हमें अपने धर्म पर कायम रहना चाहिए... यहीं महाभारत का बोध है। इसी धर्म को हम भूले हैं तो पर्यावरण प्रदूषण के साथ अन्य समस्याएं पैदा हो रही है।
इसके साथ ही उन्होंने पुरातात्विक साक्ष्यों के पचड़े में पड़ने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि हम अगर इतिहास का सुबूत जुटाने चलेंगे तो वह कुछ हजार साल पहले का नहीं मिलेगा, जबकि हमारा इतिहास उससे भी पहले का है। ऐसे में कार्बनडेटिंग में परेशानी आएगी। हमें अपने मौजूदा साक्ष्यों व कथाओं को संकलित कर उसे ही सबको बताना होगा। इस दिशा में काम शुरू हो गया है।
हम विकास की ओर अग्रसर
हमारी गाड़ी अब विकास की ओर मुड़ गई है और हम उस ओर बढ़ रहे हैं। हमें इस उद्देश्य के लिए एक लंबा लक्ष्य लेकर चलना होगा और उस पर आगे बढ़ते रहना होगा। इसके लिए इतिहास और भूगोल की जानकारी और गौरव के साथ संतुलन और संयम का ध्यान रखना होगा। स्वयं की जगह दूसरों को भी देखना होगा। पुस्तक की लेखक व द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट की संस्थापक चेयरपर्सन नीरा मिश्रा ने पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें महाभारत काल के इतिहास, भौगोलिक स्थिति, पुरातत्व, संस्कृति व कला पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
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